यूपी चुनाव 2022: मथुरा में भाजपा पर मंडराता भितरघात का खतरा, टिकट बंटेवार से उठे बागी सुर
भाजपा में टिकट बंटवारे के बाद मांट और गोवर्धन क्षेत्र में विरोध के सुर उठ रहे हैं। भले ही यह सुर कुछ दिन बाद शांत हो जाएंगे, लेकिन भितरघात का खतरा पार्टी पर मंडराता रहेगा।
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मथुरा जिले में भाजपा को इस बार अपनों के भितरघात से जूझना पड़ सकता है। गोवर्धन और मांट विधानसभा क्षेत्र में टिकटों के फेरबदल ने इस स्थिति को और बढ़ा दिया है। हालांकि पार्टी अंदरखाने इस स्थिति को खत्म करने की कोशिश में जुट गई है।
2017 के चुनाव में भाजपा ने जनपद की पांच में से चार सीटों पर कब्जा किया था। एक मात्र मांट विधानसभा सीट पर भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन यहां भी पार्टी के खाते में अप्रत्याशित वोट आए थे।
उम्मीद की जा रही थी 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा फिर पुराने मोहरों पर ही दांव लगा सकती है, लेकिन भाजपा नेतृत्व ने गोवर्धन के विधायक ठाकुर कारिंदा सिंह का टिकट काटते हुए मांट विधानसभा क्षेत्र में भी उम्मीदवार का चेहरा बदल दिया।
पिछले चुनाव में एसके शर्मा ने दी थी कड़ी टक्कर
2017 के चुनाव में मांट विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार एसके शर्मा को 59 हजार से अधिक मत प्राप्त किए थे। भाजपा के लिए यह प्रदर्शन अब तक का सर्वश्रेष्ठ रहा है। इस बार एसके शर्मा के पक्ष में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मांट में जनसभा को भी संबोधित कर गए थे। ऐसे में टिकट के बदलाव से भितरघात की स्थिति पैदा हो गई है।
उन्होंने यहां तक कह दिया है कि इस बार पार्टी की जमानत जब्त हो जाएगी। यही स्थिति गोवर्धन क्षेत्र में भी बनी है। यहां भी भाजपा ने मौजूदा विधायक का टिकट काटते हुए नया उम्मीदवार बनाया है। हालांकि विधायक, समर्थकों को समझा रहे हैं कि पार्टी के निर्णय को स्वीकार करें।
दो दिन से चल रहा हंगामा
एसके शर्मा समर्थक और कारिंदा सिंह के समर्थक पिछले दो दिन से हंगामा कर रहे हैं। एसके शर्मा ने पार्टी के निर्णय के विरोध में खुलेआम एलान कर दिया है।
राजनीतिक जानकार डॉ. पीके पचौरी का मानना है कि जब इस तरह की घटनाएं हो जाती हैं तो निराशा बढ़ती ही जाती है। भले ही व्यक्ति पार्टी में रहे लेकिन मन व तन से वह पार्टी की सेवा नहीं कर पाता है। ऐसी स्थितियां अक्सर चुनाव में प्रभाव डालती हैं।