{"_id":"631ca35317aac83512136d2f","slug":"big-disclosure-in-changing-copies-of-bams-former-vice-chancellor-full-information","type":"story","status":"publish","title_hn":"DBRAU: बीएएमएस की कॉपियां बदलने के खेल में बड़ा खुलासा, पूर्व कुलपति को थी पूरी जानकारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
DBRAU: बीएएमएस की कॉपियां बदलने के खेल में बड़ा खुलासा, पूर्व कुलपति को थी पूरी जानकारी
Sun, 11 Sep 2022 07:32 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sun, 11 Sep 2022 07:32 AM IST
सार
प्रभारी कुलपति ने बताया कि बीएएमएस की कॉपियां बदलने का खेल दो साल से चल रहा था। खबरी ने पूर्व कुलपति और परीक्षा नियंत्रक को इसकी जानकारी दी थी, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
विज्ञापन
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में बीएएमएस की कॉपी बदलने की जांच एसटीएफ कर रही है। ऐसे में इस मामले को लेकर प्रभारी कुलपति ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि ये पूर खेल दो साल से चल रहा था। इसकी जानकारी पूर्व कुलपति और परीक्षा नियंत्रक को भी थी।
विज्ञापन
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो. विनय पाठक ने बताया है कि मेडिकल की उत्तर पुस्तिकाएं बदलने का खेल दो साल से भी अधिक समय से चल रहा है। इसकी जानकारी खबरी ने पूर्व कुलपति और परीक्षा नियंत्रक को भी दी थी, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।खंदारी परिसर स्थित अतिथि गृह में मीडिया से मुखातिब प्रभारी कुलपति प्रो. पाठक ने बताया कि उनके पास एक व्यक्ति का फोन आया था, उसने बताया कि कर्मचारी की सांठगांठ से बीएएमएस की कॉपियां छलेसर कैंपस के पास बने जंगल में बदली जाती हैं। इस पर प्रति कुलपति प्रो. अजय तनेजा को जांच करने के लिए भेजा, लेकिन उन्हें ऐसा कुछ नहीं मिला।
विज्ञापन
जानकारी देने वाले व्यक्ति को फोन कर बताया कि वहां तो कुछ नहीं मिला। इस पर उसने बताया कि पक्की खबर है, ये खेल दो-तीन साल से चल रहा है। इसकी जानकारी पूर्व कुलपति और परीक्षा नियंत्रक को भी दी थी, लेकिन कोई जांच नहीं हुई। प्रो. पाठक ने बताया कि इस पर प्रो. संजीव शर्मा को दूसरे दिन फिर भेजा और संविदाकर्मी देवेंद्र को पकड़ा। पुलिस के आला अधिकारियों को जानकारी देते हुए मुकदमा दर्ज कराया।
विज्ञापन