कोरोना जांच में गड़बड़ी की आशंका: आगरा की निजी लैबों की रिपोर्ट में 54 फीसदी संक्रमित, सरकारी में 2 फीसदी
आगरा में कोरोना संक्रमण के नए मामले लगातार कम हो रहे हैं। इस बीच निजी और सरकारी लैब की कोरोना जांचों में बड़ा अंतर सामने आया है। इससे डॉक्टर भी हैरान हैं।
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कोरोना की जांच रिपोर्ट में भी गड़बड़ियों की आशंका है। निजी पैथलॉजी लैबों में आरटीपीसीआर जांच के 54 फीसदी सैंपल की रिपोर्ट पॉजिटिव हैं, जबकि सरकारी एसएन की लैब में महज 2 फीसदी सैंपल ही पॉजिटिव मिल रहे हैं। ऐसे में गड़बड़ी की आशंका पर तीन निजी लैब के 15 सैंपल दोबारा जांच के लिए लखनऊ भेजे गए हैं।
जिले में 32 जांच केंद्र हैं। शहर में 17 और देहात में 15 केंद्र हैं। शहर में 17 केंद्रों में से एक जिला अस्पताल को छोड़कर बाकी 16 जगह जांचें बंद हैं। शहर में निजी पैथलॉजी लैब सांइटफिक, पैथकाइंड और एसआरएल में आरटीपीसीआर जांच की अनुमति हैं।
तीनों निजी लैब में अब तक 68 लोगों के सैंपल की जांच में 37 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई हैं। इस तरह पॉजिटिविटी दर 54 फीसदी पाई गई। दूसरी तरफ एसएन मेडिकल कॉलेज में रविवार को 6128 सैंपल की जांच में 111 सैंपल करीब 2 फीसदी पॉजिटिव मिले हैं। सरकारी और निजी लैब की जांच में इस बड़े अंतर को लेकर जिला प्रशासन भी हैरान है।
सीएमओ डॉ. आरसी पाण्डेय ने कहा कि निजी लैब की जांच में गड़बड़ी हो सकती है। 68 सैंपल में 37 पॉजिटिव नहीं हो सकते। जिले में 10 अप्रैल से संक्रमण दर 5 से 2 फीसदी बीच रही है। निजी लैब से जिनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, उन मरीजों के सैंपल दोबारा जांच को भेजे गए हैं।
रिपोर्ट के बाद करेंगे कार्रवाई
जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने बताया कि प्राइवेट लैब का पॉजिटिविटी रेट बहुत हाई है। क्रॉस वेरीफिकेशन के लिए 15 सैंपल भेजे हैं। जांच रिपार्ट आने दीजिए उसके बाद निर्णय करेंगे क्या कार्रवाई करनी है।
पिछले साल निरस्त हो चुकी हैं अनुमति
अगस्त 2020 में कई निजी लैब को कोरोना जांच करने की अनुमति दी गई थी। तब भी कई लैब की जांच में मिले पॉजिटिव नमूनों की दोबारा जांच की गई तो वह नेगेटिव मिले थे। तब सितंबर 2020 में प्रशासन ने सभी निजी लैब की अनुमति निरस्त कर दी थी। अप्रैल 2021 में प्रशासन ने तीन लैबों को दोबारा अनुमति दी थी। पॉजिटिविटी रेट हाई मिलने पर प्रशासन को अब भी जांच में गड़बड़ी का अंदेशा है।
सरकारी जांच केंद्रों पर टेस्ट फ्री में हो रहे हैं, हालांकि इस समय टेस्ट किट की कमी है, जिसकी वजह से शहर में कई पैथोलॉजी के कर्मचारी चोरी-छुपे एंटीजन टेस्ट किट की आड़ में कमाई कर रहे हैं। घर-घर जाकर संदिग्ध मरीजों का 1000 रुपये प्रति व्यक्ति की दर से एंटीजन टेस्ट कर रहे हैं। इस दौरान कमला नगर स्थित एक लैब टेक्नीशियन संक्रमित हो चुका है। ऐसी जांचों में पॉजिटिव मिले मरीजों को प्रशासन कोविड सूची में भी दर्ज नहीं करता।
जांच के लिए कतार
कुआंखेड़ा निवासी मनोज यादव ने बताया कि जिला अस्पताल में जांच के लिए लाइन लगती है। बाकी सभी केंद्र बंद हैं। दूर-दूर से लोगों को जांच के लिए धूप में इंतजार करना पड़ता है।
निजी पैथोलॉजी से कराई जांच
ताजगंज के रहने वाले राजेश उपाध्याय ने कहा कि मेरे पिताजी की तबियत खराब थी। मैंने एक हजार रुपये में निजी लैब से एंटीजन टेस्ट कराया। 20 दिन से दवाएं खाने पर अब सुधार हैं।
जांच के इंतजाम फेल
साकेत कॉलोनी के धीरज गुप्ता ने कहा कि कोरोना जांच के इंतजाम फेल हैं। शहर में एक ही केंद्र है, वहां भी लंबी लाइनें हैं। सरकार और प्रशासन ग्रामीण क्षेत्रों में जांच करा रहा है। शहर में मरीज जांच के लिए परेशान हैं।