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Agra News: यमुना के घाट पर किया भुजरियों का विसर्जन, गूंजे लोकगीत

Sun, 30 Aug 2026 02:36 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Updated Sun, 30 Aug 2026 02:36 AM IST
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Bhujries were immersed at the Yamuna Ghats, folk songs resonated.
बटेश्वर मे यमुना मे भुजरियो का विसर्जन करते ग्रामीण
आगरा। रक्षाबंधन के दूसरे दिन पड़वा पर जिले के गांव और कस्बों में भुजरिया का पर्व पूरी श्रद्धा, उत्साह और सामाजिक सौहार्द के साथ मनाया गया। यमुना के घाटों पर भुजरियों का विसर्जन किया गया। इस दौरान नदी के घाटों पर पारंपरिक लोकगीतों की गूंज सुनाई दी।
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बटेश्वर और आसपास के करीब एक दर्जन गांवों में भुजरियों का पर्व पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। सुबह श्रद्धालुओं ने घरों में पूरी-पकवान और मिष्ठान से भुजरियों का पूजन कर उन्हें झूला झुलाया। इसके बाद यमुना घाटों पर भुजरियों का विसर्जन किया गया। कुछ भुजरियां लाकर प्रसिद्ध ब्रह्मलाल मुख्य मंदिर सहित अन्य देवालयों में अर्पित की गईं। लोगों ने बुजुर्गों, रिश्तेदारों और इष्ट-मित्रों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया और एक-दूसरे को गले मिलकर भुजरियां भेंट कीं। कई स्थानों पर ढोलक की थाप और मंजीरों की धुन पर आल्हा लोकगीत गाए गए।
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अकोला के प्राचीन देवी मंदिर पर शनिवार को भुजरिया मेला आयोजित किया गया। बहनें टोकरी में सजी भुजरिया लेकर मंदिर पहुंचीं और पास स्थित तालाब में विधि-विधान से उनका विसर्जन किया। विसर्जन के बाद बहनों ने मंदिर प्रांगण में लोकगीतों के बीच जमकर नृत्य किया और भाइयों के कानों पर भुजरिया रखकर उनकी लंबी उम्र की कामना की। भाइयों ने भी बहनों को दक्षिणा और उपहार दिए।
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पिनाहट कस्बे में बस स्टेशन के पास हर वर्ष की तरह भुजरिया मेला लगा, जहां महिलाओं और बच्चों की भारी भीड़ रही। महिलाओं ने तालाब में भुजरिया का पूजन और विसर्जन कर भाइयों को भुजरिया भेंट कीं। दाऊजी मंदिर के पास ग्रामीणों की ओर से आल्हा गायन का आयोजन किया गया। आल्हा गायक रामवीर ने ओजपूर्ण अंदाज में वीरगाथाओं का बखान किया। ‘ऐसो किला बनो नाहर को, बादल तीन हाथ रह जाए’ जैसे वीर रस से ओतप्रोत बोलों और बुंदेलखंड की शौर्यगाथाओं को सुनकर श्रोता झूम उठे।

खेरागढ़ के कागारौल रोड पर फुलरिया मेला आयोजित किया गया। बहनों ने पहले बिहारी जी मंदिर में जौ की फुलरिया अर्पित कीं। इसके बाद भाइयों को फुलरिया देकर उनकी लंबी उम्र की कामना की और उपहार प्राप्त किए। पकौड़ी और श्रृंगार की दुकानों पर महिलाओं व बच्चों की खासी भीड़ रही। रंग-बिरंगी रोशनी से सजा यह मेला देर रात तक गुलजार रहा।
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