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भोला की फरारी ने बढ़ाई सोनू गैंग की चिंता
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Thu, 28 May 2015 02:04 AM IST
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पिछले साल फरीदाबाद
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पुलिस ने सेना के भगोड़ा एनएसजी कमांडो कुख्यात अरुण फौजी के साथ जब
कुख्यात पंकज उर्फ भोला को पकड़ा था, तब यूपी पुलिस ने बड़ी राहत महसूस की
थी। मगर बुधवार को उसने फिरोजाबाद में पुलिस अभिरक्षा से भागकर अपने
पुराने जरायम पेशेवर साथी सोनू गौतम व हरेंद्र राणा गैंग की पेशानी पर
चिंता लकीरें पैदा कर दी हैं।
जिले के चर्चित अपराधी ढांठौली के बाबू की सरपरस्ती जरायम की एबीसीडी सीखने वाले ढांठौली के ही पंकज उर्फ भोला के विषय में कहा जाता है कि उसने अपने साथी नगनू के साथ अनगिनत अपराध किए हैं। तमाम घटनाएं ऐसी रहीं, जिनमें नाम नहीं आए। इलाके का ही होने के नाते यह दोनों सोनू गौतम से जुड़े और सोनू के भाई की हत्या के बदले में खुर्जा में खेमू की हत्या में भी भोला का नाम आया। इसी बीच वर्ष 2009 में क्वार्सी के जनकपुरी इलाके में कोचिंग सेंटर संचालक की हत्या के बाद उस पर जब पांच हजार का इनाम हुआ तो वह गायब हो गया। हालांकि एक अक्तूबर 2011 को पिसावा के पलसेड़ा में लूट के दौरान जनता मुठभेड़ में तीन बदमाश मारे गए, जिनमें पंकज बच निकला था। ठेठ देहाती अंदाज में और बिना मोबाइल के घूमने वाला पंकज लंबे समय तक पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा। हर बार बच निकलता। दो साल पहले गाजियाबाद के लोनी में अपने सबसे करीबी नगनू की हत्या के बाद से वह सोनू गौतम व हरेंद्र राणा से अलग हुआ। इसके बाद वह कुख्यात अरुण फौजी के साथ हो लिया और तभी से सोनू को मारने की साजिश रच रहा है। इसी क्रम में पिछले साल उसने अरुण फौजी को मथुरा-भरतपुर के बीच से छुड़ाया। उस समय भी सोनू जेल में था। मगर घटना होने से पहले फरीदाबाद पुलिस ने दबोच लिया। अब अचानक सोनू की गिरफ्तारी के बाद पंकज की फरारी बता रही है कि वह पुलिस हिरासत में सोनू पर हमला ज्यादा आसान मानता है। इसलिए उसने यह प्लानिंग बनाई है। यह बात पुलिस की समझ में भी आ रही है और खुद सोनू व हरेंद्र गैंग भी समझ रहा है।
जिले के चर्चित अपराधी ढांठौली के बाबू की सरपरस्ती जरायम की एबीसीडी सीखने वाले ढांठौली के ही पंकज उर्फ भोला के विषय में कहा जाता है कि उसने अपने साथी नगनू के साथ अनगिनत अपराध किए हैं। तमाम घटनाएं ऐसी रहीं, जिनमें नाम नहीं आए। इलाके का ही होने के नाते यह दोनों सोनू गौतम से जुड़े और सोनू के भाई की हत्या के बदले में खुर्जा में खेमू की हत्या में भी भोला का नाम आया। इसी बीच वर्ष 2009 में क्वार्सी के जनकपुरी इलाके में कोचिंग सेंटर संचालक की हत्या के बाद उस पर जब पांच हजार का इनाम हुआ तो वह गायब हो गया। हालांकि एक अक्तूबर 2011 को पिसावा के पलसेड़ा में लूट के दौरान जनता मुठभेड़ में तीन बदमाश मारे गए, जिनमें पंकज बच निकला था। ठेठ देहाती अंदाज में और बिना मोबाइल के घूमने वाला पंकज लंबे समय तक पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा। हर बार बच निकलता। दो साल पहले गाजियाबाद के लोनी में अपने सबसे करीबी नगनू की हत्या के बाद से वह सोनू गौतम व हरेंद्र राणा से अलग हुआ। इसके बाद वह कुख्यात अरुण फौजी के साथ हो लिया और तभी से सोनू को मारने की साजिश रच रहा है। इसी क्रम में पिछले साल उसने अरुण फौजी को मथुरा-भरतपुर के बीच से छुड़ाया। उस समय भी सोनू जेल में था। मगर घटना होने से पहले फरीदाबाद पुलिस ने दबोच लिया। अब अचानक सोनू की गिरफ्तारी के बाद पंकज की फरारी बता रही है कि वह पुलिस हिरासत में सोनू पर हमला ज्यादा आसान मानता है। इसलिए उसने यह प्लानिंग बनाई है। यह बात पुलिस की समझ में भी आ रही है और खुद सोनू व हरेंद्र गैंग भी समझ रहा है।