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Agra News: ऋण मुक्ति के तहत बैंक करेें लोन माफ
Thu, 16 Jan 2025 10:56 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Thu, 16 Jan 2025 10:56 PM IST
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मैनपुरी। विधिक सेवा प्राधिकरण की स्थाई लोक अदालत ने बैंक ऋण के एक मामले का निस्तारण किया है। बैंक को आदेश दिया है कि वादी को ऋण मुक्ति योजना का लाभ देते हुए 30 कार्यदिवस के भीतर अदेय प्रमाण पत्र जारी करें।
वादी मुकेश सिंह निवासी जरामई, बिछवां ने बताया कि उन्होंने स्थाई लोक अदालत में 10 अक्तूबर 2024 को शाखा प्रबंधक आर्यावर्त बैंक, बिछवां शाखा के खिलाफ वाद दायर किया था। दावा था कि उन्होंने 50 हजार रुपये का लोन 2010 में दुग्ध उत्पादन के लिए लिया था। 7500 रुपये की सब्सिडी सरकार की ओर दी गई। लोन के भुगतान की एवज में 18 हजार रुपये कई किश्तों में जमा किए। 2011 में दुकान में आग लग गई।
इसके संबंध में थाना पुलिस और बैंक को जानकारी दी गई। वादी का आरोप है कि 2017 में राज्य सरकार ने कृषि एवं दुग्ध उत्पादन से संबंधित सभी ऋण माफ कर दिए थे। बैंक की ओर से लापरवाही बरतते हुए उन्हें इस योजना में शामिल नहीं किया गया और बैंक अधिकारी उन्हें 50 हजार रुपये जमा करने के लिए नोटिस देते रहे। इस मामले में विधिक सेवा प्राधिकरण के समझौता केंद्र में वाद बैंक के खिलाफ दायर किया।
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विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से बैंक शाखा को नोटिस जारी किया गया। शाखा प्रबंधक इस मामले में उपस्थित हुए। मगर, उन्होंने कोई जबाव वादी के वाद पत्र की एवज में नहीं दिया। विधिक सेवा प्राधिकरण ने दोनों पक्षों को सुना। काउंसलर प्रफुलचेत ने बताया कि प्राधिकरण ने वादी मुकेश सिंह के पक्ष में निर्णय किया है। आदेश दिया है कि बैंक शाखा प्रबंधक ऋण मुक्ति योजना का लाभ वादी को दें। 30 कार्यदिवस के भीतर वादी मुकेश सिंह को अदेय प्रमाण पत्र जारी करें।
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वादी मुकेश सिंह निवासी जरामई, बिछवां ने बताया कि उन्होंने स्थाई लोक अदालत में 10 अक्तूबर 2024 को शाखा प्रबंधक आर्यावर्त बैंक, बिछवां शाखा के खिलाफ वाद दायर किया था। दावा था कि उन्होंने 50 हजार रुपये का लोन 2010 में दुग्ध उत्पादन के लिए लिया था। 7500 रुपये की सब्सिडी सरकार की ओर दी गई। लोन के भुगतान की एवज में 18 हजार रुपये कई किश्तों में जमा किए। 2011 में दुकान में आग लग गई।
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इसके संबंध में थाना पुलिस और बैंक को जानकारी दी गई। वादी का आरोप है कि 2017 में राज्य सरकार ने कृषि एवं दुग्ध उत्पादन से संबंधित सभी ऋण माफ कर दिए थे। बैंक की ओर से लापरवाही बरतते हुए उन्हें इस योजना में शामिल नहीं किया गया और बैंक अधिकारी उन्हें 50 हजार रुपये जमा करने के लिए नोटिस देते रहे। इस मामले में विधिक सेवा प्राधिकरण के समझौता केंद्र में वाद बैंक के खिलाफ दायर किया।
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विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से बैंक शाखा को नोटिस जारी किया गया। शाखा प्रबंधक इस मामले में उपस्थित हुए। मगर, उन्होंने कोई जबाव वादी के वाद पत्र की एवज में नहीं दिया। विधिक सेवा प्राधिकरण ने दोनों पक्षों को सुना। काउंसलर प्रफुलचेत ने बताया कि प्राधिकरण ने वादी मुकेश सिंह के पक्ष में निर्णय किया है। आदेश दिया है कि बैंक शाखा प्रबंधक ऋण मुक्ति योजना का लाभ वादी को दें। 30 कार्यदिवस के भीतर वादी मुकेश सिंह को अदेय प्रमाण पत्र जारी करें।