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वृंदावनः बांकेबिहारी मंदिर में दर्शन का समय बदला, पढ़िए पट खुलने से लेकर आरती की जानकारी
Tue, 29 Oct 2019 05:05 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 29 Oct 2019 05:05 PM IST
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बांकेबिहारी मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
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ठा. बांकेबिहारी मंदिर में भगवान के दर्शन और आरतियों के समय में मंगलवार से परिवर्तन किया जाएगा। ठा. बांकेबिहारी मंदिर के सह प्रबंधक उमेश सारस्वत ने बताया कि शीतकालीन समय के अनुसार 29 अक्तूबर से मंदिर के सुबह 8.45 से एक बजे तक पट खुलेंगे। सुबह 8.55 पर श्रृंगार आरती, दोपहर 12.55 बजे राजभोग आरती की जाएगी।
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शाम को 4.30 बजे से दोबारा दर्शन के लिए पट खुलेंगे। 7.30 बजे शयन भोग आएगा। इसके बाद आठ से ठा. बांकेबिहारी भक्तों को दर्शन देंगे। 8.25 बजे शयन भोग आरती के दर्शन भक्त कर सकेंगे।
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दीपावली पर ठाकुर राधावल्लभ ने खेली चौसर
दीपावली पर ठा. राधावल्लभ मंदिर में सिर पर ताज और लाल रंग की पोशाक धारण कर चांदी की हठरी में विराजमान होकर ठाकुरजी ने चौसर खेली। वर्ष में एक बार होने वाले इस विशेष दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ी।
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शाम को 4.30 बजे से दोबारा दर्शन के लिए पट खुलेंगे। 7.30 बजे शयन भोग आएगा। इसके बाद आठ से ठा. बांकेबिहारी भक्तों को दर्शन देंगे। 8.25 बजे शयन भोग आरती के दर्शन भक्त कर सकेंगे।
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दीपावली पर ठाकुर राधावल्लभ ने खेली चौसर
दीपावली पर ठा. राधावल्लभ मंदिर में सिर पर ताज और लाल रंग की पोशाक धारण कर चांदी की हठरी में विराजमान होकर ठाकुरजी ने चौसर खेली। वर्ष में एक बार होने वाले इस विशेष दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ी।
दीपावली पर्व पर ठा. राधावल्लभ मंदिर को रंग बिरंगी विद्युत झालरों और फूल मालाओं से सजाया गया। इस अवसर पर ठा. महाराज को गोस्वामियों ने लाल रंग की पोशाक धारण कराई।
शाम ढलते ही सेवायतों द्वारा ठाकुरजी के समक्ष चौसर सजाई। सेवायतों ने प्रतीकात्मक चौसर खेलकर मंदिर की प्राचीन पंरपरा का निवर्हन किया। मंदिर के सेवायत चंदन गोस्वामी ने बताया कि प्रिया प्रियतम अपनी सखियों के साथ निकुंज में चौसर खेला करता थे। वहीं परंपरा आज भी ठा. राधावल्लभ मंदिर में निर्वाह की जा रही है।
शाम ढलते ही सेवायतों द्वारा ठाकुरजी के समक्ष चौसर सजाई। सेवायतों ने प्रतीकात्मक चौसर खेलकर मंदिर की प्राचीन पंरपरा का निवर्हन किया। मंदिर के सेवायत चंदन गोस्वामी ने बताया कि प्रिया प्रियतम अपनी सखियों के साथ निकुंज में चौसर खेला करता थे। वहीं परंपरा आज भी ठा. राधावल्लभ मंदिर में निर्वाह की जा रही है।