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आगरा: बैंककर्मियों की हड़ताल से 200 करोड़ का लेनदेन प्रभावित, पहले दिन दिखा असर
Tue, 16 Mar 2021 05:02 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 16 Mar 2021 05:02 PM IST
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बैंक हड़ताल: आगरा में बंद रही बैंक
- फोटो : अमर उजाला
बैंककर्मियों की दो दिवसीय हड़ताल के पहले दिन अनुमानित 200 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हो गया। जिले की करीब 410 बैंक शाखाओं में चेक क्लीयरिंग, डिमांड ड्राफ्ट, नकद जमा-निकासी जैसे कार्य ठप रहे। इधर, अधिकांश एटीएम में भी कैश खत्म होने से लोग भटकते नजर आए।
बैंकों के निजीकरण और श्रम विरोधी कानून के चलते बैंककर्मियों की सोमवार से दो दिवसीय हड़ताल की शुरुआत हो गई। पहले ही दिन बैंकों से संबधित लेनदेन बुरी तरह प्रभावित हो गए। जानकारी के अभाव में कई लोग शाखा जाकर लौटते दिखे। एटीएम की स्थिति भी गड़बड़ाती दिखी। माह का दूसरा शनिवार, रविवार और हड़ताल के चलते तीन दिन से एटीएम खाली हो गए। कई पर नो कैश के नोटिस भी लगे दिखे। इधर, मंगलवार को भी हड़ताल जारी रहने से समस्या विकट हो सकती है।
बैंककर्मियों ने लगाए नारे
संजय प्लेस स्थित एलआईसी परिसर और केनरा बैंक के अंचल कार्यालय पर बड़ी संख्या में बैंक अधिकारी व कर्मचारी एकत्रित हुए। एआईबीईए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एमएम राय ने कहा कि वर्ष 1969 में हमने 21 दिन की हड़ताल कर बैंकों का राष्ट्रीयकरण कराया था। फिर से एक बार वही समय आ गया है। आईबॉक के पुनीत सक्सेना ने कहा कि सार्वजनिक बैंकों में आम जनता का धन जमा है। जिस पर पूंजीपतियों की निगाह है। हम इसे लुटने नहीं देंगे। ऑल इंडिया नेशनलाइज्ड बैंक ऑफिसर्स फेडरेशन के राज्य समिति सदस्य अंकित सहगल ने कहा कि निजीकरण का फैसला आम आदमी के लिए विध्वंसक साबित होगा। विरोध करने वालों में वकील अली, सुरेश बाबू, मनीष शर्मा, विनोद यादव, विनय भटनागर, एमके चावला आदि शामिल रहे।
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कई एटीएम देखे नहीं मिला कैश
पैसों की सख्त जरूरत थी। एटीएम से पैसा निकालने आया था, लेकिन कई एटीएम देखने के बाद भी पैसा नहीं निकला है। तीन दिन के अवकाश के चलते सभी में कैश खत्म हो गया है। -शरद यादव, सिकंदरा
डिपॉजिट मशीन में भी रुपये जमा नहीं हुए
शुक्रवार से बैंक में पैसा जमा करने की सोच रहा था, लेकिन अगले दिन से ही बैंक बंद हो गए। कैश डिपॉजिट मशीन में कैश जमा करने आया, लेकिन इसमें भी जमा नहीं हुए। -सुनील नौहवार, शाहगंज
सामान्य दिनों में भी एटीएम खराब रहते हैं
सामान्य दिनों में ही एटीएम खराब और कैश खत्म रहता है। इस समय तो उम्मीद करना ही बेकार है। क्षेत्र के कई एटीएम देख लिए, लेकिन कहीं पैसे नहीं निकले। -रवि सिंह, सिकंदरा
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बैंकों के निजीकरण और श्रम विरोधी कानून के चलते बैंककर्मियों की सोमवार से दो दिवसीय हड़ताल की शुरुआत हो गई। पहले ही दिन बैंकों से संबधित लेनदेन बुरी तरह प्रभावित हो गए। जानकारी के अभाव में कई लोग शाखा जाकर लौटते दिखे। एटीएम की स्थिति भी गड़बड़ाती दिखी। माह का दूसरा शनिवार, रविवार और हड़ताल के चलते तीन दिन से एटीएम खाली हो गए। कई पर नो कैश के नोटिस भी लगे दिखे। इधर, मंगलवार को भी हड़ताल जारी रहने से समस्या विकट हो सकती है।
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बैंककर्मियों ने लगाए नारे
संजय प्लेस स्थित एलआईसी परिसर और केनरा बैंक के अंचल कार्यालय पर बड़ी संख्या में बैंक अधिकारी व कर्मचारी एकत्रित हुए। एआईबीईए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एमएम राय ने कहा कि वर्ष 1969 में हमने 21 दिन की हड़ताल कर बैंकों का राष्ट्रीयकरण कराया था। फिर से एक बार वही समय आ गया है। आईबॉक के पुनीत सक्सेना ने कहा कि सार्वजनिक बैंकों में आम जनता का धन जमा है। जिस पर पूंजीपतियों की निगाह है। हम इसे लुटने नहीं देंगे। ऑल इंडिया नेशनलाइज्ड बैंक ऑफिसर्स फेडरेशन के राज्य समिति सदस्य अंकित सहगल ने कहा कि निजीकरण का फैसला आम आदमी के लिए विध्वंसक साबित होगा। विरोध करने वालों में वकील अली, सुरेश बाबू, मनीष शर्मा, विनोद यादव, विनय भटनागर, एमके चावला आदि शामिल रहे।
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कई एटीएम देखे नहीं मिला कैश
पैसों की सख्त जरूरत थी। एटीएम से पैसा निकालने आया था, लेकिन कई एटीएम देखने के बाद भी पैसा नहीं निकला है। तीन दिन के अवकाश के चलते सभी में कैश खत्म हो गया है। -शरद यादव, सिकंदरा
डिपॉजिट मशीन में भी रुपये जमा नहीं हुए
शुक्रवार से बैंक में पैसा जमा करने की सोच रहा था, लेकिन अगले दिन से ही बैंक बंद हो गए। कैश डिपॉजिट मशीन में कैश जमा करने आया, लेकिन इसमें भी जमा नहीं हुए। -सुनील नौहवार, शाहगंज
सामान्य दिनों में भी एटीएम खराब रहते हैं
सामान्य दिनों में ही एटीएम खराब और कैश खत्म रहता है। इस समय तो उम्मीद करना ही बेकार है। क्षेत्र के कई एटीएम देख लिए, लेकिन कहीं पैसे नहीं निकले। -रवि सिंह, सिकंदरा