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Agra News: वैध लाइसेंस वाले मेडिकल स्टोरों को बिना प्रक्रिया सील करने पर रोक
Sun, 18 Oct 2026 03:01 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Sun, 18 Oct 2026 03:01 AM IST
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आगरा। अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) न्यायालय संख्या-1 अमृता श्रीवास्तव ने वैध लाइसेंस मेडिकल स्टोर संचालकों की अंतरिम निषेधाज्ञा अर्जी आंशिक रूप से स्वीकार कर उन्हें राहत दे दी। अदालत ने सक्षम प्राधिकारी को वैधानिक प्रक्रिया अपनाए बिना मेडिकल स्टोरों के कारोबार में हस्तक्षेप करने या उन्हें बंद अथवा सील करने पर रोक लगा दी। अब अगली सुनवाई 30 अक्तूबर को होगी।
श्री बांके बिहारी मेडिकल स्टोर व अन्य मेडिकल स्टोर संचालकों ने अदालत में प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया था। उनका कहना था कि वह ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और संबंधित नियमों के तहत जारी लाइसेंस के आधार पर दवाओं की थोक और फुटकर बिक्री करते हैं। इनमें एरोमैटिक कार्डमम टिंचर, ऑरेंज टिंचर और कैप्सिकम टिंचर जैसी औषधीय तैयार करना शामिल है। आबकारी विभाग के अधिकारियों की ओर से इन दवाओं में अल्कोहल की मात्रा और कथित दुरुपयोग का हवाला देकर कारोबार में हस्तक्षेप किया जा रहा है। आरोप लगाया कि 3 जनवरी 2025 को औषधि निरीक्षक, आबकारी निरीक्षक और पुलिसकर्मी दुकानों पर पहुंचे और दवाओं की बिक्री करने पर दुकानें सील करने की चेतावनी दी। उनके अधिवक्ता ने मुकदमे के अंतिम निस्तारण तक कारोबार में हो रहे अनुचित हस्तक्षेप रोकने की मांग की थी।
अधिकारियों की शक्तियां रहेंगी बरकरार
अदालत ने स्पष्ट किया कि अंतरिम राहत का अर्थ यह नहीं है कि मेडिकल स्टोर संचालक कानून से ऊपर हैं। सक्षम अधिकारी कानून के अनुसार निरीक्षण कर सकते हैं, नमूने ले सकते हैं और लाइसेंस की शर्तों अथवा अन्य वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई कर सकते हैं।
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श्री बांके बिहारी मेडिकल स्टोर व अन्य मेडिकल स्टोर संचालकों ने अदालत में प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया था। उनका कहना था कि वह ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और संबंधित नियमों के तहत जारी लाइसेंस के आधार पर दवाओं की थोक और फुटकर बिक्री करते हैं। इनमें एरोमैटिक कार्डमम टिंचर, ऑरेंज टिंचर और कैप्सिकम टिंचर जैसी औषधीय तैयार करना शामिल है। आबकारी विभाग के अधिकारियों की ओर से इन दवाओं में अल्कोहल की मात्रा और कथित दुरुपयोग का हवाला देकर कारोबार में हस्तक्षेप किया जा रहा है। आरोप लगाया कि 3 जनवरी 2025 को औषधि निरीक्षक, आबकारी निरीक्षक और पुलिसकर्मी दुकानों पर पहुंचे और दवाओं की बिक्री करने पर दुकानें सील करने की चेतावनी दी। उनके अधिवक्ता ने मुकदमे के अंतिम निस्तारण तक कारोबार में हो रहे अनुचित हस्तक्षेप रोकने की मांग की थी।
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अधिकारियों की शक्तियां रहेंगी बरकरार
अदालत ने स्पष्ट किया कि अंतरिम राहत का अर्थ यह नहीं है कि मेडिकल स्टोर संचालक कानून से ऊपर हैं। सक्षम अधिकारी कानून के अनुसार निरीक्षण कर सकते हैं, नमूने ले सकते हैं और लाइसेंस की शर्तों अथवा अन्य वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई कर सकते हैं।
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