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आगरा में प्रदूषण रोकने को उठाया बड़ा कदम, इसकी आवक पर ‘नो एंट्री’
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Sat, 06 Jan 2018 09:55 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) में कोयले के प्रयोग को पूर्णत: प्रतिबंधित करने के लिए कवायद तेज कर दी गई है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पेठा इकाइयों को कोयला भट्ठी बंद करने के लिए कहा है। वहीं, मंडलायुक्त के. राममोहन राव ने शहर में कोयले की आवक ही प्रतिबंधित करने के निर्देश दिए हैं। टीटीजेड में कृषि अपशिष्ट जलाने पर रोक पर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
इस संबंध में मंडलायुक्त ने टीटीजेड अंतर्गत आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, हाथरस, एटा और भरतपुर के जिलाधिकारियों को पत्र लिखा है। कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत टीटीजेड में किसी भी प्रकार की प्रदूषणकारी गतिविधि अनुमन्य नहीं है।
एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के आदेश के तहत दो एकड़ से कम क्षेत्रफल में कृषि अपशिष्ट जलाए जाने पर 2500 रुपए प्रति घटना, पांच एकड़ से कम क्षेत्रफल में कृषि अपशिष्ट जलाए जाने पर 5000 रुपए और पांच एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में कृषि अपशिष्ट जलाए जाने पर 15 हजार रुपए प्रति घटना अर्थ दंड वसूला जाएगा। मंडलायुक्त ने टीटीजेड में कृषि अपशिष्ट जलाने पर पूरी तरह से रोक लगाने का आदेश दिया है।
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इस संबंध में मंडलायुक्त ने टीटीजेड अंतर्गत आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, हाथरस, एटा और भरतपुर के जिलाधिकारियों को पत्र लिखा है। कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत टीटीजेड में किसी भी प्रकार की प्रदूषणकारी गतिविधि अनुमन्य नहीं है।
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एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के आदेश के तहत दो एकड़ से कम क्षेत्रफल में कृषि अपशिष्ट जलाए जाने पर 2500 रुपए प्रति घटना, पांच एकड़ से कम क्षेत्रफल में कृषि अपशिष्ट जलाए जाने पर 5000 रुपए और पांच एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में कृषि अपशिष्ट जलाए जाने पर 15 हजार रुपए प्रति घटना अर्थ दंड वसूला जाएगा। मंडलायुक्त ने टीटीजेड में कृषि अपशिष्ट जलाने पर पूरी तरह से रोक लगाने का आदेश दिया है।
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तो होगी पांच वर्ष की कैद
प्रदूषण को नियंत्रित रखने की दृष्टि से यूपीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी अतुलेश यादव ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत पेठा इकाइयों को कोयले के प्रयोग को बंद करने के लिए कहा है। कहा है कि कोयला भट्ठी प्रयोग करते पकड़े जाने पर एक लाख रुपए जुर्माना और पांच साल की कैद हो सकती है।
इधर, मंडलायुक्त ने पिछले दिनों हुई टीटीजेड की बैठक में कोयले की आवक ही शहर में प्रतिबंधित करने के निर्देश दिए थे। उनका कहना था कि जब कोयला शहर में आएगा ही नहीं तो लोग इसका प्रयोग ही नहीं कर पाएंगे। इसलिए अब कोयले की ‘नो एंट्री’ की तैयारी की जा रही है।
पिछले महीने यूपीपीसीबी की टीम ने पेठा इकाइयों का निरीक्षण किया था, इसमें पता चला कि 28 इकाइयां अभी भी कोयला भट्ठी से संचालित हैं। इसकी रिपोर्ट एडीएम सिटी को भेजी गई थी। तमाम सख्ती के बाद भी अब तक लगाम नहीं लग पाई है।
इधर, मंडलायुक्त ने पिछले दिनों हुई टीटीजेड की बैठक में कोयले की आवक ही शहर में प्रतिबंधित करने के निर्देश दिए थे। उनका कहना था कि जब कोयला शहर में आएगा ही नहीं तो लोग इसका प्रयोग ही नहीं कर पाएंगे। इसलिए अब कोयले की ‘नो एंट्री’ की तैयारी की जा रही है।
पिछले महीने यूपीपीसीबी की टीम ने पेठा इकाइयों का निरीक्षण किया था, इसमें पता चला कि 28 इकाइयां अभी भी कोयला भट्ठी से संचालित हैं। इसकी रिपोर्ट एडीएम सिटी को भेजी गई थी। तमाम सख्ती के बाद भी अब तक लगाम नहीं लग पाई है।
संकट में प्राचीन उद्योग
शहर में लगभग 400 पेठा इकाइयां छोटे-बड़े रूप में संचालित हैं। इन्हें शहर से बाहर शिफ्ट करने के लिए पूर्व में कवायद की गई थी। इसके लिए कालिंदी विहार में जगह उपलब्ध कराई गई। लगभग 70 पेठा इकाई शिफ्ट भी हुईं। मगर, पानी समस्या और गैस भट्ठी के लिए गैस की अनुपलब्धता के चलते इन्हें यहां से भागना पड़ा।
अब गिनी-चुनी इकाइयां ही यहां संचालित हो रही हैं। पेठा कुटीर उद्योग संस्था के पूर्व मंत्री पवन कुमार गर्ग का कहना है कि वादे के अनुरूप इस उद्योग को संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। ऐसे में आगरा का यह प्राचीन उद्योग अब संकट में है।
अब गिनी-चुनी इकाइयां ही यहां संचालित हो रही हैं। पेठा कुटीर उद्योग संस्था के पूर्व मंत्री पवन कुमार गर्ग का कहना है कि वादे के अनुरूप इस उद्योग को संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। ऐसे में आगरा का यह प्राचीन उद्योग अब संकट में है।