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बेबी ताज: ताजमहल के समान खूबसूरत है यहां की नक्काशी और चित्रकारी, कद्रदान तो हैं; पर मेहरबान नहीं निगहबान
Sun, 28 May 2023 01:18 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sun, 28 May 2023 01:18 PM IST
सार
आगरा में यमुना नदी के बायीं ओर चीनी का रोजा के बाद है एत्माद-उद-दौला का मकबरा, जिसे मुगल बादशाह जहांगीर की बेगम नूरजहां ने अपने पिता की याद में बनवाया था। यह पहला मकबरा है, जिसमें पहली बार संगमरमर में पच्चीकारी का काम किया गया है। इसको ताज के निर्माण के लिए प्रेरणास्रोत माना जाता है। इसीलिए बेबी ताज का नाम दिया गया।
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एत्माद्दौला स्मारक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बेबी ताज के नाम से मशहूर सम्राज्ञी नूरजहां का कला केंद्र निगहबानों की मेहरबानी के लिए तरस गया है। 17 एकड़ में फैला यह स्मारक मुगल, फारसी व ईरानी कला का इतिहास समेटे हुए है। मुख्य मकबरा में छिपी ईरान, फारस और हिंदु वास्तुकला संरक्षण के अभाव में मिट रही है। स्मारक का प्रचार भी नहीं है। ऐसे में कद्रदान भी इससे दूर हैं। जहां ताज देखने के लिए रोज औसतन 20,000 पर्यटक आगरा आते हैं, वहीं यमुना तट पर बने सफेद संगमरमर के बेबी ताज यानी एत्माउद्दौला में रोज 200 पर्यटक भी नहीं पहुंचते।
मुगल शहंशाह जहांगीर की बेगम नूरजहां ने अपने पिता मिर्जा ग्यास बेग की याद में इसे बनवाया था। मिर्जा ग्यास बेग मुगल दरबार में कोषाधिकारी थे। बाद में वजीर बन गए। 1622 में उनकी मृत्यु हो गई। 1628 में एत्माउद्दौला बना। मिर्जा ग्यास बेग को एत्माउद्दौला की उपाधि मिली थी। इसका मतलब होता है ईमानदार।
ताजमहल से 25 साल पहले बने इस मकबरा के जर्रे-जर्रे में नूरजहां की कला है। चार बाग के बीच 149 फुट वर्ग में बना आयताकार मकबरा सफेद संगमरमर पर की गई नक्काशी से ढका है। मकबरे के दरवाजों से लेकर कब्र के गुंबद, फर्श और दीवारों पर खूबसूरत नक्काशी और चित्रकारी है, जो ताजमहल में की गई नक्काशी से कम नहीं है। ताज का ही अक्स दिखती है। सजावट की डिजाइन नूरजहां ने बनाई, जिन्हें कलाकारों ने मकबरा में सजाया। गुंबद के ऊपर संगमरमर पर कुरान की आयतें खुदी हैं। गुंबद के लिए तब ईरान से गोल्ड पेंट लाया गया था।
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मुगल शहंशाह जहांगीर की बेगम नूरजहां ने अपने पिता मिर्जा ग्यास बेग की याद में इसे बनवाया था। मिर्जा ग्यास बेग मुगल दरबार में कोषाधिकारी थे। बाद में वजीर बन गए। 1622 में उनकी मृत्यु हो गई। 1628 में एत्माउद्दौला बना। मिर्जा ग्यास बेग को एत्माउद्दौला की उपाधि मिली थी। इसका मतलब होता है ईमानदार।
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ताजमहल से 25 साल पहले बने इस मकबरा के जर्रे-जर्रे में नूरजहां की कला है। चार बाग के बीच 149 फुट वर्ग में बना आयताकार मकबरा सफेद संगमरमर पर की गई नक्काशी से ढका है। मकबरे के दरवाजों से लेकर कब्र के गुंबद, फर्श और दीवारों पर खूबसूरत नक्काशी और चित्रकारी है, जो ताजमहल में की गई नक्काशी से कम नहीं है। ताज का ही अक्स दिखती है। सजावट की डिजाइन नूरजहां ने बनाई, जिन्हें कलाकारों ने मकबरा में सजाया। गुंबद के ऊपर संगमरमर पर कुरान की आयतें खुदी हैं। गुंबद के लिए तब ईरान से गोल्ड पेंट लाया गया था।
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