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यूपीः डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से बीएड 2004-05 के 3635 अभ्यर्थियों को बड़ी राहत
Tue, 01 Sep 2020 12:08 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 01 Sep 2020 12:08 AM IST
सार
विश्वविद्यालय ने एसआईटी की सूची के आधार पर इनको फर्जी घोषित किया था। कोर्ट ने एसआईटी की जांच के आधार पर फर्जी घोषित करने को सही नहीं माना था। कोर्ट के फैसले के मद्देनजर विवि ने यह निर्णय लिया है।
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बीएड 2004-05 सत्र के 3635 अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय ने इनको फर्जी घोषित करने के आदेश को स्थगित कर दिया है। विश्वविद्यालय ने एसआईटी की सूची के आधार पर इनको फर्जी घोषित किया था। कोर्ट ने एसआईटी की जांच के आधार पर फर्जी घोषित करने को सही नहीं माना था। कोर्ट के फैसले के मद्देनजर विवि ने यह निर्णय लिया है।
फर्जी मार्कशीट की जांच कर रही एसआईटी ने विश्वविद्यालय को 3637 बीएड अभ्यर्थियों की सूची दी थी। इसके बाद विश्वविद्यालय ने पहले चरण में 2823 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र भी फर्जी पाए जाने पर इनको इसी साल सात फरवरी को फर्जी घोषित कर दिया। दूसरी सूची के तौर पर 814 अभ्यर्थियों को अपना पक्ष रखने के लिए कहा। इनमें से दो अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र ही विश्वविद्यालय की जांच में सही पाए गए।
इस पर विश्वविद्यालय ने 29 जुलाई को इन्हें फर्जी घोषित कर दिया था। इसके खिलाफ एक अभ्यर्थी ने कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर कोर्ट ने माना कि एसआईटी की जांच के आधार पर अभ्यर्थियों को फर्जी नहीं माना जा सकता है। कुलसचिव डॉ. अंजनि कुमार मिश्र ने बताया कि कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए 2004-05 के 3635 अभ्यर्थियों को फर्जी घोषित किए जाने वाले आदेश को अग्रिम आदेश आने तक स्थगित कर दिया है।
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फर्जी मार्कशीट की जांच कर रही एसआईटी ने विश्वविद्यालय को 3637 बीएड अभ्यर्थियों की सूची दी थी। इसके बाद विश्वविद्यालय ने पहले चरण में 2823 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र भी फर्जी पाए जाने पर इनको इसी साल सात फरवरी को फर्जी घोषित कर दिया। दूसरी सूची के तौर पर 814 अभ्यर्थियों को अपना पक्ष रखने के लिए कहा। इनमें से दो अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र ही विश्वविद्यालय की जांच में सही पाए गए।
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इस पर विश्वविद्यालय ने 29 जुलाई को इन्हें फर्जी घोषित कर दिया था। इसके खिलाफ एक अभ्यर्थी ने कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर कोर्ट ने माना कि एसआईटी की जांच के आधार पर अभ्यर्थियों को फर्जी नहीं माना जा सकता है। कुलसचिव डॉ. अंजनि कुमार मिश्र ने बताया कि कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए 2004-05 के 3635 अभ्यर्थियों को फर्जी घोषित किए जाने वाले आदेश को अग्रिम आदेश आने तक स्थगित कर दिया है।
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24 शिक्षकों की बहाली का रास्ता साफ
इनमें से 24 अभ्यर्थी बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों मेें शिक्षक हैं। इनको विश्वविद्यालय के फर्जी घोषित करने के बाद बीएसए ने बर्खास्त कर दिया था। अब उनकी बहाली का रास्ता भी साफ हो गया है।
इनमें से 24 अभ्यर्थी बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों मेें शिक्षक हैं। इनको विश्वविद्यालय के फर्जी घोषित करने के बाद बीएसए ने बर्खास्त कर दिया था। अब उनकी बहाली का रास्ता भी साफ हो गया है।