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Piles: इन चीजों का सेवन दे रहा बवासीर का दर्द, 2 घंटे लगातार न बैठें; 16 साल की उम्र है तो भी न करें नजर अंदाज

Mon, 04 Sep 2023 11:43 AM IST
धीरेन्द्र सिंह धर्मेंद्र त्यागी, आगरा
धर्मेंद्र त्यागी, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Mon, 04 Sep 2023 11:43 AM IST
सार

अब खानपान ऐसे बदल रहा है कि बवासीर 15-16 साल की उम्र में ही दर्द दे रही है। ऐसे में इस बीमारी का सही समय पर पता लगना और सही समय पर इसका इलाज करना बेहद जरूरी है, नहीं तो ये आगे चलकर काफी तकलीफ दे सकती है। 
 

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Avoid These Foods In Piles Or Bawaseer In Hindi Do not ignore even if you are 15-16 years old
पाइल्स - फोटो : amar ujala

विस्तार

आज के दौर में हर एक व्यक्ति को बीमारियों से बचकर रहना पड़ता है, लेकिन कई बीमारियां ऐसी भी हैं जो उम्र के किसी न किसी पड़ाव पर हो ही जाती हैं। इसी में से एक बीमारी है बवासीर। लगभग 60 प्रतिशत लोगों को ये बीमारी कभी न कभी हो ही जाती है। चिकित्सक बताते हैं कि मोमोज, बर्गर, पेटीज, चाऊमीन समेत अन्य फास्ट फूड की लत और खराब दिनचर्या से 15-16 साल की उम्र में भी बवासीर का दर्द मिल रहा है। आगरा सर्जंस एसोसिएशन के अध्ययन में 15-22 साल के 31.5 फीसदी मरीजों में बवासीर, फिशर जैसी परेशानी मिली। छोटी उम्र में बीमारी से चिकित्सक चिंतित हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि लत नहीं छोड़ने पर भगंदर-मानसिक विकार का भी खतरा है।
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एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. समीर कुमार ने बताया कि 1158 मरीजों में से 15-22 साल के 31.5 फीसदी मरीजों में बवासीर के शुरुआती लक्षण मिले। इनको जलन, खुजली, मल त्यागने पर दर्द, रक्त आना, 10-15 मिनट तक शौचालय में बैठे रहने पर भी पेट साफ न होना, मल कठोर होने की दिक्कत मिली। पूछताछ में पता लगा कि ये सप्ताह में 3 से 5 दिन फास्ट फूड और बाजार के तले भोजन से पेट भरते हैं। मैदा निर्मित भोजन सामग्री खाते हैं। देर रात तक बैठकर पढ़ने, चाय-काफी अधिक लेने, पानी कम पीने, खेलकूद-शारीरिक परिश्रम भी कम करते हैं।
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23-45 साल के 32.6 फीसदी मरीजों में अधिकांश कामकाजी हैं, जिनका बैठकर कार्य करना, 10-11 बजे के बाद भोजन करना, देर रात मोबाइल देखना और फिर सुबह व्यायाम न करने और तले-बाजार के भोजन, फास्ट फूड की वजह से बीमारी बनी। 46 साल की उम्र के 35.9 फीसदी रहे। इनमें पाचन तंत्र गड़बड़ाने ओर उम्र संबंधी परेशानी भी वजह मिली।
 
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फल-सलाद, तीन किमी पैदल चलने की डालें आदत

आगरा सर्जंस एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डाॅ. सुनील शर्मा ने बताया कि राहत की बात है कि 15-22 साल की उम्र के मरीजों में परहेज, खानपान सुधारने से 70 फीसदी की बीमारी ठीक हो रही है। 30 फीसदी ऐसे हैं, जो दर्द-परेशानी बढ़ने पर नियम से चलते हैं, लेकिन आराम मिलने के बाद फिर से वही अपना लेते हैं। ऐसे मरीजों को ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है।
 

बीमारी से पढ़ाई व कामकाज प्रभावित, चिड़चिड़ापन

विशेषज्ञ डॉ. अमित श्रीवास्तव ने बताया कि बवासीर की परेशानी से किशोरों और युवाओं की पढ़ाई-कामकाज प्रभावित हो रहा है। इससे चिड़चिड़ापन होना, तनाव, खून की कमी होना, कमजोरी की भी परेशानी मिली। तकलीफ के कारण कई बार बीमारी छिपाते हैं, परेशानी बढ़ने पर डॉक्टर को दिखाने आए। दवा के साथ खानपान, दिनचर्या बेहतर करने से मर्ज में आराम मिला।
 

इन पर करें अमल

- रोजाना 4-5 लीटर पानी पीएं, 400-500 ग्राम फल, सलाद खाएं।
- मैदे से बनी खाद्य सामग्री, बाजार के भोजन व फास्ट फूड से बचें।
- 3 किमी रोजाना पैदल चलें या 5 किमी नियमित साइकिल चलाएं।
- 9 बजे तक भोजन कर लें, खाने के बाद 15-20 मिनट जरूर टहलें।
- भाेजन में हरी तरकारी, दाल, सलाद अधिक खाएं, दूध-दही लें।
- दो घंटे लगातार बैठने के बाद 10-15 मिनट जरूर टहलें।
(जैसा कि डॉ. आरसी अग्रवाल, अध्यक्ष, आगरा सर्जंस एसोसिएशन ने बताया)
 

अध्ययन में हुआ खुलासा

1158 बवासीर के मरीजों पर अध्ययन
364 मरीजों की उम्र 15 से 22 साल
377 मरीजों की उम्र 23 से 45 साल
415 मरीज 46 साल से अधिक के
आगरा सर्जंस एसोसिएशन के 1158 मरीजों पर अध्ययन, खानपान, सोने का शेड्यूल बिगड़ा मिला
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