फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   August kranti history in agra after death of youth parashuram

अगस्त क्रांति: युवा परशुराम की शहादत के बाद जिले भर में शुरू हो गए थे तीव्र आंदोलन, पढ़ें इतिहास

Wed, 11 Aug 2021 12:02 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Wed, 11 Aug 2021 12:02 AM IST
सार

इतिहासकार बताते हैं कि क्रांतिकारियों ने इस शहादत का बदला लेने की योजना बनाई। नौ अगस्त की रात को बेलनगंज के एक मकान में खुफिया बैठक बुलाई गई। युवा क्रांतिकारियों को रेलवे स्टेशनों को निशाना बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई।

विज्ञापन
August kranti history in agra after death of youth parashuram
अगस्त क्रांति - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ताजनगरी में क्रांति की ज्वाला लगातार तेज हो रही थी। युवा परशुराम की शहादत के बाद पूरे जिले में आंदोलन तीव्र हो गया। नौ अगस्त की रात को तय किया गया कि सुबह होते ही रेलवे को निशाना बनाया जाएगा। दस अगस्त को अलग-अलग गुटों में युवा रेलवे स्टेशन पहुंच गए और टेलीफोन की तारें काट दीं। इससे रेलवे की संचार व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई। कई रेल गाड़ियां जहां की तहां खड़ी हो गईं।

विज्ञापन

हाथी घाट पर पुलिस फायरिंग में शहीद हुए परशुराम और तमाम लोगों के घायल होने की खबर पूरे जिले में फैल गई थी। लोग अंग्रेजों के इस कदम से खासे नाराज थे। इतिहासकार बताते हैं कि क्रांतिकारियों ने इस शहादत का बदला लेने की योजना बनाई। नौ अगस्त की रात को बेलनगंज के एक मकान में खुफिया बैठक बुलाई गई। युवा क्रांतिकारियों को रेलवे स्टेशनों को निशाना बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
विज्ञापन

पौ फटते ही क्रांति के दीवानों के छह से अधिक दल (जिनमें दस-दस युवक शामिल थे) प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर पहुंच गए। युवाओं ने वहां के टेलीफोन की लाइनें काट दीं। संचार व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई। कई रेल गाड़ियां रास्ते में ही खड़ी हो गईं। कुछ ही देर में क्रांतिकारियों के इस कदम की जानकारी पुलिस को लग गई और सरकारी मोटरगाड़ियों ने स्टेशनों की ओर दौड़ लगा दी। योजना रेलवे स्टेशनों को आग के हवाले करने की थी लेकिन अंग्रेज अधिकारियों के पहुंचने के कारण ऐसा नहीं हो सका। आंदोलन को अगले दिन के लिए स्थगित कर युवा वहां से रवाना हो गए। इस दौरान कई युवकों को पुलिस ने पकड़ा लेकिन उनके खिलाफ कोई सुबूत न होने के कारण तीन दिन बाद छोड़ दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

देहात में तेज करना था आंदोलन
क्रांतिकारी दस अगस्त की शाम को किनारी बाजार पहुंचे लेकिन वहां पुलिस का पहरा था। इतिहासकार बताते हैं कि पुलिस को पता चल गया कि युवाओं की टोली बेलनगंज और किनारी बाजार के कुछ मकानों में गुप्त बैठकें करती थी। इसके बाद युवाओं ने नूरी दरवाजा का रुख किया। यहां एक युवक के घर पर बैठक हुई और देहात क्षेत्र में आंदोलन को गति देने पर चर्चा की गई। युवाओं के गुट अलग-अलग टुकड़ियों में उसी रात देहात क्षेत्रों के क्रांतिकारियों से मिलने के लिए रवाना हो गए।

अंग्रेजों ने किया प्रताड़ित
रेलवे स्टेशनों को निशाना बनाने वाले युवाओं की तलाश में पुलिस ने कई जगह दबिश दी। कई क्रांतिकारियों की गिरफ्तारियां भी हुईं। अंग्रेजों ने उन्हें प्रताड़ित किया फिर भी आजादी के मतवालों ने हार नहीं मानी। -शशि शिरोमणी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रकाश नारायण शिरोमणी के परिजन

क्रांति की ज्वाला: अगस्त क्रांति के पहले शहीद थे परशुराम, गुप्त बैठक के बाद आगरा की सड़कों पर उतर आए थे हजारों लोग
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed