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सोशल ऑडिट के नाम पर प्रशासन की आंखों में झोंकी जा रही धूल
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केस एक:
मैनपुरी की ग्राम पंचायत हलपुरा में बीते माह अमित कुमार और सरिता चौहान ने सोशल ऑडिट किया था। प्रशासन को भेेजी गई रिपोर्ट में उन्होंने श्रमिकों के पास जॉब कार्ड उपलब्ध न होने, रोजगार दिवस न मनाए जाने, मेडिकल किट और योजना का बोर्ड न लगे होने की बात कही।
केस दो:
करहल के डुडगांव में विनोद कुमार और महेश्वर दयाल ने बीते माह सोशल ऑडिट किया था। उनकी रिपोर्ट में भी योजना का बोर्ड न होने, किट न होने, श्रमिकों के पास जॉब कार्ड उपलब्ध न होने की रिपोर्ट दी। हर बार यही रिपोर्ट सोशल ऑडिट कर भेजी जाती है।
मैनपुरी। मनरेगा कार्यों का ऑडिट करने के लिए सोशल ऑडिट कराया जाता है। विभाग की ओर से नामित दो ग्रामीणों की ओर से प्रतिमाह कार्यों का निरीक्षण कर ऑडिट रिपोर्ट भेजी जाती है। लेकिन ऑडिट के लिए नामित ग्रामीण साधारण रिपोर्ट देकर प्रशासन की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। सभी 552 ग्राम पंचायतों से आने वाली रिपोर्ट का यही हाल है।
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जिले की 552 ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना के तहत चक मार्ग निर्माण, नाली खोदाई, पौधरोपण, आवास निर्माण समेत अन्य कई कार्य किए जाते हैं। इन कार्यों में श्रमिकों को रोजगार मिले और फर्जीवाड़ा न हो इसके लिए शासन ने सोशल ऑडिट की शुरुआत की थी। लेकिन सोशल ऑडिट के नाम पर अब प्रशासन की आंखों में ही धूल झोंकी जा रही है। विभाग की ओर से प्रत्येक ग्राम पंचायत में नामित दो ग्रामीण ऑडिट कर अपनी रिपोर्ट देते हैं।
बीते छह माह से विभाग के पास आ रही रिपोर्ट में कमियों के नाम पर खानापूरी की जा रही है। सभी रिपोर्ट में एक सी चंद गिनी चुनी कमियों को लिखा जा रहा है। ये कमियां वे हैं, जो मानवीय भूल मात्र हैं। हर रिपोर्ट में मनरेगा श्रमिकों के पास जॉब कार्ड उपलब्ध न होने, पानी न होने, बोर्ड न होने या मेडिकल किट न होने की ही कमी लिखी जाती है। इसके अलावा किसी भी गड़बड़ी या अनियमिततता की रिपोर्ट प्रशासन को नहीं भेजी जा रही है। ऐसे में अधिकारी भी मौन होकर तमाशा देखने के लिए मजबूर हैँ।
अधिकारियों के निरीक्षण में मिलती हैं कमियां
मनरेगा कार्यों की सोशल ऑडिट रिपोर्ट भले ही सब कुछ सही बताती है, लेकिन अधिकारियों के निरीक्षण में हर बार कमियां मिलती हैं। उपायुक्त मनरेगा से लेकर मुख्य विकास अधिकारी के सामने गलत मस्टर रोल भरने के मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे में सोशल ऑडिट में ये कमियां क्यों नहीं मिलती हैं।
सोशल ऑडिट की रिपोर्ट के बारे में जानकारी की जाएगी। पता किया जाएगा कि वास्तव में ये ऑडिट किया भी जा रहा है या फिर नहीं। जहां भी लापरवाही की जा रही है, उसमें सुधार किया जाएगा। ईशा प्रिया, मुख्य विकास अधिकारी।
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मैनपुरी की ग्राम पंचायत हलपुरा में बीते माह अमित कुमार और सरिता चौहान ने सोशल ऑडिट किया था। प्रशासन को भेेजी गई रिपोर्ट में उन्होंने श्रमिकों के पास जॉब कार्ड उपलब्ध न होने, रोजगार दिवस न मनाए जाने, मेडिकल किट और योजना का बोर्ड न लगे होने की बात कही।
केस दो:
करहल के डुडगांव में विनोद कुमार और महेश्वर दयाल ने बीते माह सोशल ऑडिट किया था। उनकी रिपोर्ट में भी योजना का बोर्ड न होने, किट न होने, श्रमिकों के पास जॉब कार्ड उपलब्ध न होने की रिपोर्ट दी। हर बार यही रिपोर्ट सोशल ऑडिट कर भेजी जाती है।
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मैनपुरी। मनरेगा कार्यों का ऑडिट करने के लिए सोशल ऑडिट कराया जाता है। विभाग की ओर से नामित दो ग्रामीणों की ओर से प्रतिमाह कार्यों का निरीक्षण कर ऑडिट रिपोर्ट भेजी जाती है। लेकिन ऑडिट के लिए नामित ग्रामीण साधारण रिपोर्ट देकर प्रशासन की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। सभी 552 ग्राम पंचायतों से आने वाली रिपोर्ट का यही हाल है।
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जिले की 552 ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना के तहत चक मार्ग निर्माण, नाली खोदाई, पौधरोपण, आवास निर्माण समेत अन्य कई कार्य किए जाते हैं। इन कार्यों में श्रमिकों को रोजगार मिले और फर्जीवाड़ा न हो इसके लिए शासन ने सोशल ऑडिट की शुरुआत की थी। लेकिन सोशल ऑडिट के नाम पर अब प्रशासन की आंखों में ही धूल झोंकी जा रही है। विभाग की ओर से प्रत्येक ग्राम पंचायत में नामित दो ग्रामीण ऑडिट कर अपनी रिपोर्ट देते हैं।
बीते छह माह से विभाग के पास आ रही रिपोर्ट में कमियों के नाम पर खानापूरी की जा रही है। सभी रिपोर्ट में एक सी चंद गिनी चुनी कमियों को लिखा जा रहा है। ये कमियां वे हैं, जो मानवीय भूल मात्र हैं। हर रिपोर्ट में मनरेगा श्रमिकों के पास जॉब कार्ड उपलब्ध न होने, पानी न होने, बोर्ड न होने या मेडिकल किट न होने की ही कमी लिखी जाती है। इसके अलावा किसी भी गड़बड़ी या अनियमिततता की रिपोर्ट प्रशासन को नहीं भेजी जा रही है। ऐसे में अधिकारी भी मौन होकर तमाशा देखने के लिए मजबूर हैँ।
अधिकारियों के निरीक्षण में मिलती हैं कमियां
मनरेगा कार्यों की सोशल ऑडिट रिपोर्ट भले ही सब कुछ सही बताती है, लेकिन अधिकारियों के निरीक्षण में हर बार कमियां मिलती हैं। उपायुक्त मनरेगा से लेकर मुख्य विकास अधिकारी के सामने गलत मस्टर रोल भरने के मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे में सोशल ऑडिट में ये कमियां क्यों नहीं मिलती हैं।
सोशल ऑडिट की रिपोर्ट के बारे में जानकारी की जाएगी। पता किया जाएगा कि वास्तव में ये ऑडिट किया भी जा रहा है या फिर नहीं। जहां भी लापरवाही की जा रही है, उसमें सुधार किया जाएगा। ईशा प्रिया, मुख्य विकास अधिकारी।