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जयंती विशेष: योगी जी उम्मीदों का दामन फैलाए बैठा है अटल का बटेश्वर, जब पूर्व पीएम के बोल संग घाट पर लगते ठहाके
Mon, 25 Dec 2023 11:47 AM IST
भूपेन्द्र सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Mon, 25 Dec 2023 11:47 AM IST
सार
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर अटल का बटेश्वर सीएम से उम्मीदों का दामन फैलाए बैठा है।यहां पूर्व पीएम के बोल संग दोस्त घाट पर ठहाके लगाते थे।
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जयंती विशेष: योगी जी उम्मीदों का दामन फैलाए बैठा है अटल का बटेश्वर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्मोत्सव उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित उनकी जन्मस्थली बटेश्वर में सुशासन दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। सोमवार को सीएम योगी के द्वारा अटल संकुल केंद्र के होने वाले लोकार्पण और 104 करोड़ की विकास परियोजनाओं के शिलान्यास को लेकर बटेश्वर खुश है। फिर भी बटेश्वर के लोग अपनी उम्मीदों का दामन फैलाए बैठे हैं।
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बटेश्वर की उम्मीदों को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने 1976 में आवाज दी थी। कहा था कि बटेश्वर के कण-कण में इतिहास समाया है। प्रत्येक भरके में भूतकाल निद्रा निमग्न है। जरूरत है इसके संरक्षण की। आजादी के आंदोलन के इतिहास के दस्तावेज में दर्ज अटल का बटेश्वर की उम्मीदों की झोली बड़ी है और जरूरी भी।
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पर्यटन कांप्लेक्स का किया था लोकार्पण
बटेश्वर आने वाले पर्यटकों को ठहराने के लिए छह अप्रैल 1999 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने यूपी टूरिज्म के राही पर्यटन काम्पलेक्स का लोकार्पण किया था। तब से काम्पलेक्स बदहाल पड़ा है। टूटकर गिरी पानी की टंकी जमीन पर पड़ी है। काम्पलेक्स के दरवाजे, खिड़की, शीशे आदि टूटे पड़े हैं। टॉयलेट, कमरों की दीवारें दरक गई हैं। खंडहर में तब्दील हो रहे पर्यटन काम्पलेक्स के अटल से जुड़े होने की वजह से उनकी अस्थि विसर्जन के वक्त जीर्णोद्धार की बात चली थी। लेकिन, उनकी यह सौगात उपेक्षित पड़ूी है। इससे स्थानीय लोगों में मायूसी है।जब अटल के बोल 'शादी तो मैंने की ही नहीं' संग बटेश्वर के घाट पर लगे ठहाके
अटल जी जब भी बटेश्वर आते, यमुना के घाट पर खूब भांग घुटवाते थे। अपने स्मृति पटल को ताजा करते हुए उनका सानिध्य पाने वाले विनोद जैन ने बताया कि भांग घोटने के दौरान अटल जी से उनके बचपन के दोस्तों ने पूछा कि ठण्डाई कैसी रहेगी? सादी!इस पर हाजिर जवाब अटल जी ने मजाकिया लहजे में कहा था कि 'शादी तो मैंने की ही नहीं', फिर क्या था? सब ठहाके मार कर हंस पड़े। उनका सानिध्य पाने वाले बटेश्वर के राम सिंह आजाद ने बताया कि अटल जी भोले के भक्त थे। बटेश्वर आने पर यमुना स्नान किए बिना नहीं रहते थे। बटेश्वर के विकास के लिए चिंतित थे।
ताजमहल पर अटल जी की कविता-
यह ताजमहल, यह ताजमहलयमुना की रोती धार विकल,
कल कल चल चल।
जब रोया हिन्दुस्तान सकल,
तब बन पाया ताजमहल।
'अटल जी का सानिध्य पाने वाले विनोद जैन ने अटल की इस कविता को साझा किया'।