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Atal Bihari Vajpayee Birth Anniversary: आखिरी बार घर आए 'अटल' ने खाए थे चूरमा-लड्डू, आम और झरबेरी के बेर

Mon, 25 Dec 2023 11:00 AM IST
भूपेन्द्र सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Mon, 25 Dec 2023 11:00 AM IST
सार

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर परिजन ने यादों की गांठ खोली। बताया कि आखिरी बार घर आए 'अटल' ने चूरमा लड्डू खाए थे। आम और झरबेरी के बेर भी खाए थे। उन्हें मालपुआ बेहद पसंद थे।

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Atal Bihari Vajpayee birth anniversary is being celebrated as Good Governance Day
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जन्मस्थली बटेश्वर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित उनकी जन्मस्थली बटेश्वर में सुशासन दिवस के रूप में मनाई जा रही है। अमर उजाला के उनके घर की चौखट पर दस्तक देते ही परिजन ने भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के बचपन की यादों की गांठ खोल दी। 

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रिश्ते की बहू गंगा देवी ने बताया कि अटल जी बटेश्वर में छह अप्रैल 1999 (आगरा, इटावा वाया बटेश्वर रेल लाइन का शिलान्यास हेतु) को आखिरी बार घर पर आए थे। तब उन्होंने घर पर बने चूरमा के लड्डू बड़े चाव से खाए थे। उन्हें मालपुआ बेहद पसंद थे। वह मालपुआ की दावत खाने के लिए कई कोस पैदल चले जाते थे। खाने के बाद आम काफी पसंद थे। बड़े होने पर भी आम का जायका नहीं छोड़ा था।

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अटल जी के भतीजे राकेश वाजपेयी ने बताया कि परिवार के बुर्जुग उनसे जुड़ी यादें बताते रहते हैं। आम के अलावा झरबेरी के बेर उन्हें बेहद पसंद थे। सुबह ही बीहड़ के टीलों पर झरबेरियों को ढूंढकर बेर तोड़ते थे। खूब कांटे लगे, पर दोपहरी तक बेर खाने में मस्त रहते थे। सीजन में आम के लिए पेड़ पर चढ़ जाते थे। ढेले फेंककर भी खूब आम तोड़े थे। खाने के बाद आम जरूर लेते थे। बड़े होने पर भी आम का शौक बरकरार रहा।

अटल जी की बचपन की पाठशाला में पढ़े और बाद में उसी में शिक्षक बने पुत्तू लाल ने बताया कि स्कूल में उनका भाषण उम्दा होता था। कविता पाठ पर कई बार पुरस्कार जीते थे। पारिवारिक भतीजे अश्वनी वाजपेयी ने बताया कि बचपन में छुट्टी के बाद यमुना किनारे गुटरियों से खूब खेलते थे। कुएं में गुटरियां फेंक कर आने वाली छप्प की आवाज पर खूब ताली बजाते थे।

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संकुल केंद्र में दिखेगी अटल जी की जीवन यात्रा, लगेगी फोटो गैलरी

सोमवार को बटेश्वर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 12.23 करोड़ में बनकर तैयार हुए अटल सांस्कृतिक संकुल केंद्र और उसमें लगी भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का लोकार्पण करेंगे। संकुल केंद्र में अटल जी की जीवन यात्रा की फाटो गैलरी लगेगी। पत्र-पत्रिकाओं की कटिंग भी देखने को मिलेगी। 

पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि संकुल केंद्र की आंतरिक सज्जा एवं फर्नीचर के लिए 2.59 करोड़ तथा पुस्तकालय में किताबों के लिए 5.70 लाख का बजट आवंटित किया है। संकुल केंद्र के भूतल पर स्टेज समेत बहुउद्देशीय हॉल, रिसेप्शन हॉल, लाइब्रेरी, पैंट्री और स्टोर रूम, किचन और टॉयलेट हैं। प्रथम तल पर म्यूजियम, कांफ्रेस हॉल, डोरमेट्री हॉल, डायनिंग हॉल, वर्क स्टेशन, केबिन, रिसेप्शन रूम आदि हैं। 

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वहीं बाहर अटल जी की प्रतिमा के साथ बच्चों के खेलकूद के साधन हैं। अटल जी के भतीजे राकेश वाजपेयी ने बताया कि जिस स्थान पर अटल संकुल केन्द्र बना है, उस स्थान पर 400 साल पहले अटल जी के पूर्वज मणिराम वाजपेयी ने वाजपेय यज्ञ शुरू कराया था। बादशाह जहांगीर के जमाने में तत्कालीन भदावर नरेश ने 14 बीघा जमीन वाजपेय यज्ञ के लिए दान दी थी।

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