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Health News: माैसम में बदलाव से दिक्कत...खांस-खांस कर बुरा हाल, बलगम में आ रहा खून; बच्चे निमोनिया के शिकार
Sun, 26 Oct 2025 03:38 PM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Sun, 26 Oct 2025 03:38 PM IST
सार
माैसम में बदलाव और हवा में प्रदूषण के चलते लोगों की सेहत बिगड़ रही है। सांस रोगियों को अधिक दिक्कत हो रही है। उन्हें अस्पताल में भर्ती तक करना पड़ रहा है। बच्चे भी निमोनिया के शिकार हो रहे हैं।
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एसएन मेडिकल काॅलेज में भीड़।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
बदलते मौसम और हवा में धूल-धुआं से सांस और अस्थमा मरीजों की हालत खराब हो रही है। खांस-खांस कर बुरा हाल हो गया है। बलगम में खून भी आ रहा है। अस्थमा का अटैक भी पड़ रहा है। बच्चों में निमोनिया बढ़ गया है। शनिवार को एसएन मेडिकल कॉलेज के वक्ष एवं क्षय रोग विभाग में अस्थमा अटैक के 5 और इमरजेंसी में निमोनिया के 7 मरीज भर्ती हुए हैं।
वक्ष एवं क्षय रोग विभागाध्यक्ष डाॅ. संतोष कुमार ने बताया कि शनिवार को सांस उखड़ने पर अस्थमा अटैक के 5 मरीज इमरजेंसी में आए। इनको हाई ऑक्सीजन पर रखा गया है। इनमें से दो की हालत गंभीर है। ओपीडी में 231 मरीज आए। इनमें से 31 मरीज फॉलोअप वाले और 200 नए मरीज थे। इनको सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी होना, घबराहट और पसीना आने की परेशानी बताई। कई ऐसे मरीज थे, जिन्होंने धूल-धुआं के संपर्क में आने के बाद तकलीफ होने की बात कही। मरीजों को दवाओं की डोज बढ़ाने के साथ धूल-धुआं से बचने की सलाह दे रहे हैं।
बाल रोग विभाग के डॉ. नीरज यादव ने बताया कि दिवाली के बाद से निमोनिया के मरीज तेजी से बढ़े हैं। नलिकाओं में धूल-धुआं और अन्य तत्व जाने से संक्रमण हो रहा है। तेज बुखार, खांसी, गले में खराश और पसली चल रही है। अस्थमा पीड़ित बच्चों को सांस लेने में तकलीफ भी मिल रही है। ओपीडी में 180 मरीज आए, इनमें से 70 बच्चों को यही परेशानी मिली। इमरजेंसी में 7 बच्चे भर्ती हुए हैं।
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वक्ष एवं क्षय रोग विभागाध्यक्ष डाॅ. संतोष कुमार ने बताया कि शनिवार को सांस उखड़ने पर अस्थमा अटैक के 5 मरीज इमरजेंसी में आए। इनको हाई ऑक्सीजन पर रखा गया है। इनमें से दो की हालत गंभीर है। ओपीडी में 231 मरीज आए। इनमें से 31 मरीज फॉलोअप वाले और 200 नए मरीज थे। इनको सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी होना, घबराहट और पसीना आने की परेशानी बताई। कई ऐसे मरीज थे, जिन्होंने धूल-धुआं के संपर्क में आने के बाद तकलीफ होने की बात कही। मरीजों को दवाओं की डोज बढ़ाने के साथ धूल-धुआं से बचने की सलाह दे रहे हैं।
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बाल रोग विभाग के डॉ. नीरज यादव ने बताया कि दिवाली के बाद से निमोनिया के मरीज तेजी से बढ़े हैं। नलिकाओं में धूल-धुआं और अन्य तत्व जाने से संक्रमण हो रहा है। तेज बुखार, खांसी, गले में खराश और पसली चल रही है। अस्थमा पीड़ित बच्चों को सांस लेने में तकलीफ भी मिल रही है। ओपीडी में 180 मरीज आए, इनमें से 70 बच्चों को यही परेशानी मिली। इमरजेंसी में 7 बच्चे भर्ती हुए हैं।
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