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कोरोना महामारी से मरने वाले व्यापारियों को मिले सहायता राशि-डॉ. सुमंत
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मैनपुरी। कोरोना महामारी को लेकर अखिल भारतीय वैश्य एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने चिंता जताई है। उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम पत्र भेजकर जरूरी व्यवस्थाएं कराने की मांग की। साथ ही कहा कि कोरोना महामारी से मरने वाले व्यापारियों को सहायता राशि दी जाए।
व्यापारी नेता ने प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की बढ़ती संख्या को देखते हुए केंद्र व प्रदेश सरकार से मांग है कि व्यापारियों व कार्यरत कर्मचारियों को टीकाकरण की अविलंब अलग से व्यवस्था की जाए। जिले में टीकाकरण केंद्रों पर वैक्सीन नहीं हैं ऐसे में दूसरा डोज समय से नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में न तो बेड है न हीं दवाइयां और न ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा में व्यवस्था है। यहां तक कि शवों को ढोने के लिए एंबुलेंस भी समय से नहीं मिल पा रही है।
उन्होंने कहा कि इस महामारी को रोकने का सबसे सशक्त माध्यम टीकाकरण अभियान है। सरकार को इस विषय पर ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से मांग की कि कोरोना महामारी के दौरान मरने वाले मृतक व्यापारियों के परिवार को जो जीएसटी में पंजीकृत हैं, उनको बीस लाख रुपये की धनराशि तथा जो पंजीकृत नहीं हैं लेकिन उनके पास कॉमर्शियल कनेक्शन व श्रम विभाग में पंजीकृत व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं को दस लाख रूपये की आर्थिक सहायता दिलाई जाए। ये भी सुनिश्चित किया जाए कि जो छोटे, मध्यम व मझोले व्यापारियों को पुलिस न परेशान करें।
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व्यापारी नेता ने प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की बढ़ती संख्या को देखते हुए केंद्र व प्रदेश सरकार से मांग है कि व्यापारियों व कार्यरत कर्मचारियों को टीकाकरण की अविलंब अलग से व्यवस्था की जाए। जिले में टीकाकरण केंद्रों पर वैक्सीन नहीं हैं ऐसे में दूसरा डोज समय से नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में न तो बेड है न हीं दवाइयां और न ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा में व्यवस्था है। यहां तक कि शवों को ढोने के लिए एंबुलेंस भी समय से नहीं मिल पा रही है।
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उन्होंने कहा कि इस महामारी को रोकने का सबसे सशक्त माध्यम टीकाकरण अभियान है। सरकार को इस विषय पर ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से मांग की कि कोरोना महामारी के दौरान मरने वाले मृतक व्यापारियों के परिवार को जो जीएसटी में पंजीकृत हैं, उनको बीस लाख रुपये की धनराशि तथा जो पंजीकृत नहीं हैं लेकिन उनके पास कॉमर्शियल कनेक्शन व श्रम विभाग में पंजीकृत व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं को दस लाख रूपये की आर्थिक सहायता दिलाई जाए। ये भी सुनिश्चित किया जाए कि जो छोटे, मध्यम व मझोले व्यापारियों को पुलिस न परेशान करें।
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