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आगरा में बैठ अमेरिकियों से ठगी: 'हैलो, मैं हैरी बोल रहा हूं, सस्ता लोन चाहिए' करोड़ों वसूले, ऐसे मिलता है डाटा

Sun, 26 Mar 2023 07:37 AM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Sun, 26 Mar 2023 07:37 AM IST
सार

आगरा में फर्जी कॉल सेंटर चलाकर अमेरिकी नागरिकों से करोड़ों की ठगी का मामला सामने आया है। पुलिस ने कॉल सेंटर चलाने वाले अनुराग को गिरफ्तार किया है। कॉल सेंटर में कर्मचारी अंग्रेजी में बात करके लोगों को फंसाते थे।

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Arrested for defrauding American citizens of crores by running call center in Agra
कॉल सेंटर चलाकर अमेरिकियों से ठगी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में अमेरिकी नागरिकों से ठगी का मामला सामने आया है। यहां फर्जी कॉल सेंटर चलाने वाला अनुराग खुद भी काल सेंटर में काम करता था। लॉकडाउन में नौकरी छूटने पर उसने ऑनलाइन ठगी सीखी थी। पुलिस के मुताबिक, संचालक ने स्काइप की मदद से लोगों का डाटा खरीदा। कर्मचारी अंग्रेजी में बात करके फंसाते थे। इसके बाद हवाला और बिट क्वाइन के माध्यम से रकम आती थी। दो साल में संचालक ने करोड़ों रुपये कमाए हैं। आरोपी के खातों की जानकारी जुटाई जा रही है।

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डीसीपी सिटी विकास कुमार ने बताया कि पूछताछ में पता चला है कि कॉल सेंटर का संचालक अनुराग प्रताप सिंह है। पिता पीडब्ल्यूडी में इंजीनियर पद से सेवानिवृत्त हुए थे। अनुराग स्नातक है। वह दिल्ली एनसीआर के कॉल सेंटर में नौकरी करता था। विदेशी नागरिकों से बात करते विदेश में संपर्क हो गए। लॉकडाउन में नौकरी छूट गई। उसने ऑनलाइन ठगी सीखने के लिए ट्रेनिंग ली। अमेरिका की कंपनी से डाटा खरीदना शुरू किया। पांच हजार लोगों का डाटा 60 यूएस डालर में मिल जाता है। अनुराग की पत्नी भी कॉल सेंटर में थी, लेकिन उसने नौकरी छोड़ दी थी।

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दो साल में लिया 60 हजार लोगों का डाटा

अनुराग अब तक 50 से 60 हजार लोगों का डाटा खरीद चुका है। डाटा में नागरिक का नाम, मोबाइल नंबर, स्टेट और कितने लोन की जरूरत है, यही होता था। कॉलिंग के लिए जॉइपर एप से लाइसेंस लेते थे। इससे कॉल करने पर नंबर अमेरिका का आता था। वायस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल का प्रयोग करते थे। कॉल सेंटर के कर्मचारी अंग्रेजी जानते हैं। सीमित भाषा में बात करते थे। रोजाना 150 लोगों को फोन करते तो दो से पांच लोग झांसे में आ जाते थे। निजी जानकारी ले लेते थे।

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हैलो, मैं हेरी बोल रहा हूं

पुलिस ने बताया कि कॉल करने पर कर्मचारी अपना नाम डेविड, हेरी आदि अमेरिकी नागरिकों की तरह बताते थे। सस्ते ब्याज पर लोन की बात करते थे। तैयार होने पर बैंक खाते, सोशल सिक्योरिटी नंबर और लाइसेंस की जानकारी प्राप्त करते थे। जानकारी कर्मचारी संचालक को देते थे। वो इसे आगे उपलब्ध करा देता था। बैंक में कॉल कर कहा जाता था कि ठगी हो गई है। इस पर बैंक ग्राहक के खाते में जितनी की ठगी होती थी, उस रकम को वापस कर देता था।


मगर, यह रकम जांच पूरी होने के बाद ही प्रयोग में लाई जा सकती थी। इसका फायदा गिरोह के सदस्य उठाते थे। वो अमेरिकी लोगों को कॉल करके कहते थे कि आपके खाते में लोन की रकम आ गई है। गिफ्ट वाउचर लेने पर प्रयोग में ला सकते हैं। गिफ्ट वाउचर की जानकारी लेकर अमेरिकी एजेंट कैश करा लेते थे। एजेंट अपने कमीशन के बाद रकम को हवाला और बिट क्वाइन के माध्यम से भारत में भेजते थे, जो कॉल सेंटर संचालकों को मिल जाती थी।

संचालक के खातों का पता कर रही पुलिस

कॉल सेंटर संचालक अनुराग के दो खातों की जानकारी पुलिस को मिली है। इनमें एक आगरा की निजी बैंक का है, जबकि दूसरा बिट क्वाइन का है। पुलिस दोनों की जानकारी जुटा रही है। इनमें कब कितनी रकम आई। किन खातों से रकम भेजी गई। यह सब पता किया जा रहा है। बिट क्वाइन को कैश कराने के लिए दोगुना कर देना होता है।

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