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मथुरा की गैया के लिए चार करोड़ आ गए भैया
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मथुरा। मथुरा की गायों के चारा पानी के लिए योगी सरकार ने चार करोड़ रुपया अवमुक्त किया है। आए दिन गोवंश की भूख प्यास से मौत होने के मामले मेें योगी सरकार ने पैसा पशुपालन विभाग को भेजा है। हालांकि गोवंश की संख्या के हिसाब से मिली रकम काफी कम मानी जा रही है।
जनपद में आवारा गोवंश को लेकर किसान खासे परेशान हैं। इसे लेकर दिसंबर व जनवरी माह में गांवों में नए 40 गो आश्रय स्थल बनाए गए। इनका संचालन ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव करा रहे हैं, वहीं हर नगर पंचायत में एक एक गोशाला खोली गई है। जनपद में पंजीकृत गोशाला 39 हैं। इनमें 58000 से अधिक गोवंश हैं।
वहीं नगर पंचायतों की 14 गोशालाओं में 13 हजार से अधिक गोवंश हैं। जिला पंचायत की तीन व अपंजीकृत गोशालाओं 42 गोशालाओं में 15 हजार से अधिक गोवंश हैं। कुछ गोशालाएं समाज सेवियों द्वारा मिलने वाले पैसे से संचालित हैं। गायों के लिए प्रदेश सरकार से दो समय के चारे में लिए 30 रुपये के हिसाब से पैसा अवमुक्त किया जा रहा है।
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आठ माह पूर्व मचे हल्ले को लेकर जनवरी में एक करोड़, मार्च के अंत मेें एक करोड़ और अब लोकसभा चुनाव के बाद चार करोड़ की राशि अवमुक्त की गई है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा भूदेव सिंह ने बताया कि गायों के चारे को चार करोड़ रुपया मिला है। गोशाला संचालकों के खाते में रकम गायों की संख्या के हिसाब से हर महीनेवार भेजी जा रही है।
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जनपद में आवारा गोवंश को लेकर किसान खासे परेशान हैं। इसे लेकर दिसंबर व जनवरी माह में गांवों में नए 40 गो आश्रय स्थल बनाए गए। इनका संचालन ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव करा रहे हैं, वहीं हर नगर पंचायत में एक एक गोशाला खोली गई है। जनपद में पंजीकृत गोशाला 39 हैं। इनमें 58000 से अधिक गोवंश हैं।
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वहीं नगर पंचायतों की 14 गोशालाओं में 13 हजार से अधिक गोवंश हैं। जिला पंचायत की तीन व अपंजीकृत गोशालाओं 42 गोशालाओं में 15 हजार से अधिक गोवंश हैं। कुछ गोशालाएं समाज सेवियों द्वारा मिलने वाले पैसे से संचालित हैं। गायों के लिए प्रदेश सरकार से दो समय के चारे में लिए 30 रुपये के हिसाब से पैसा अवमुक्त किया जा रहा है।
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आठ माह पूर्व मचे हल्ले को लेकर जनवरी में एक करोड़, मार्च के अंत मेें एक करोड़ और अब लोकसभा चुनाव के बाद चार करोड़ की राशि अवमुक्त की गई है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा भूदेव सिंह ने बताया कि गायों के चारे को चार करोड़ रुपया मिला है। गोशाला संचालकों के खाते में रकम गायों की संख्या के हिसाब से हर महीनेवार भेजी जा रही है।