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अरमानों को आंसुओं में न बहा दें अरिदमन
ब्यूरो, अमर उजाला अागरा
Updated Sat, 31 Oct 2015 02:10 AM IST
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने महेंद्र अरिदमन सिंह को मंत्रिमंडल से बाहर कर सिर्फ उन्हें ही झटका नहीं दिया है, उनके इस फैसले से कई भाजपाई भी सकते आ गए हैं। जो भाजपा नेता 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद मोदी लहर पर सवार होकर विधानसभा का रास्ता तलाश रहे थे, उन्हें अरिदमन के बाहर होने के कारण की चर्चाओं से अपने अरमानों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। हालांकि चुनाव दूर है लेकिन चुनावी समीकरणों का खेल अभी से शुरू हो गया है। ऐसे में अरिदमन को लगा झटका, भविष्य में कई भाजपाइयों को हिला सकता है।
ये हैं कारण
महेंद्र अरिदमन सिंह के भाजपा में आने की चर्चाएं ऐसे ही नहीं हैं। दरअसल, उन्हें राजनाथ सिंह का करीबी तो माना ही जाता है। चुनावी समीकरणों के हिसाब से भी वे बाह विधानसभा सीट पर पार्टी के लिए दमदार प्रत्याशी साबित हो सकते हैं। वर्ष 1989 के बाद से सात बार हुए विधानसभा चुनावों में वह छह बार जीत का परचम लहरा चुके हैं। वह भी अलग-अलग दलों में रहकर। ऐसे में राजनीति के पंडित उन्हें विनिंग कैडिडेट के तौर पर देखते हैं। वह सपा से पहले भाजपा सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं। इतना ही नहीं, उनके पिता महेंद्र रिपुदमन सिंह भी तीन बार बाह विधानसभा सीट से विधायक रहे हैं। वे भी मंत्री रहे थे। आजादी के बाद से प्रदेश में 16 बार विधानसभा चुके चुनाव हुए हैं, इनमें से नौ बार महेंद्र अरिदमन और उनके पिता महेंद्र रिपुदमन सिंह चुनाव जीत चुके हैं।
तैयारियों को लगा झटका
जिले के अधिकांश विधानसभा क्षेत्रों पर बहुत सेे भाजपा नेताओं ने काफी पहले से अपनी तरफ से चुनावी तैयारी शुरू कर दी है। इन्हें पार्टी की तरफ से किसी भी स्तर पर प्रत्याशी बनाए जाने के खुलतौर पर न तो संकेत दिए गए हैं और न ही कोई घोषणा की है। इसके बाद भी वे खुद को प्रत्याशी मानकर तैयारियों के साथ-साथ चुनावी गणित बैठाने में लगे हुए थे। बाह विधानसभा सीट से भी कई भाजपाई चुनाव लड़ने के सपने देख रहे हैं। इसके लिए वे लगातार क्षेत्र में सक्रिय भी हैं। ऐसे में अरिदमन के भाजपा में आने की चर्चाओं से उन्हें झटका लगा है। क्याेंकि वे जानते हैं कि यदि अरिदमन की ‘घर वापसी’ हुई तो किसी भी संभावित लड़ाके लिए उनकी टिकट काट पाना मुश्किल होगा।
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बिल्डर के सपने पर संकट!
बाह विधानसभा सीट पर महानगर के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के साथ कुछ और नेताओं की भी नजर है। इसके अलावा शहर के एक नामचीन बिल्डर भी कमल के फूल के सहारे विधानसभा में बैठने की तैयारी कर रहे हैं। अपने इस सपने को साकार करने के लिए वह भाजपा की सदस्यता पहले ही ले चुके हैं। गुपचुप तरीके से वे स्थानीय स्तर से लेकर लखनऊ और दिल्ली के पदाधिकारियों के लगातार संपर्क में हैं। अब तक वे अपनी दावेदारी को लेकर सुनिश्चित थे। मगर, अरिदमन के आने की चर्चाओं ने उनके माथे पर शिकन बढ़ा दी है।
रिकॉर्ड भी बना चुके हैं ‘राजा’
बाह सीट पर सबसे ज्यादा वोट हासिल करने का रिकॉर्ड भी महेंद्र अरिदमन सिंह के नाम है। इस सीट पर अब तक जीते प्रत्याशियों में अरिदमन को 2012 के विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा वोट मिले। उन्होंने 99379 वोट हासिल किए। 2007 के चुनाव में बसपा प्रत्याशी मधुसूदन शर्मा अरिदमन को शिकस्त देने में कामयाब जरूर रहे थे लेकिन उनके और अरिदमन के बीच हार-जीत का अंतर ज्यादा नहीं रहा था। इस चुनाव में मधुसूदन को 38877 वोट और अरिदमन को 34254 वोट मिले थे। जबकि इससे पहले 2002 में हुए चुनाव में अरिदमन को 54 हजार से अधिक वोट मिले थे। इस सीट पर हुए चुनाव में अब तक यह दूसरा सबसे बड़ा वोट हासिल करने का रिकॉर्ड था।
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ये हैं कारण
महेंद्र अरिदमन सिंह के भाजपा में आने की चर्चाएं ऐसे ही नहीं हैं। दरअसल, उन्हें राजनाथ सिंह का करीबी तो माना ही जाता है। चुनावी समीकरणों के हिसाब से भी वे बाह विधानसभा सीट पर पार्टी के लिए दमदार प्रत्याशी साबित हो सकते हैं। वर्ष 1989 के बाद से सात बार हुए विधानसभा चुनावों में वह छह बार जीत का परचम लहरा चुके हैं। वह भी अलग-अलग दलों में रहकर। ऐसे में राजनीति के पंडित उन्हें विनिंग कैडिडेट के तौर पर देखते हैं। वह सपा से पहले भाजपा सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं। इतना ही नहीं, उनके पिता महेंद्र रिपुदमन सिंह भी तीन बार बाह विधानसभा सीट से विधायक रहे हैं। वे भी मंत्री रहे थे। आजादी के बाद से प्रदेश में 16 बार विधानसभा चुके चुनाव हुए हैं, इनमें से नौ बार महेंद्र अरिदमन और उनके पिता महेंद्र रिपुदमन सिंह चुनाव जीत चुके हैं।
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तैयारियों को लगा झटका
जिले के अधिकांश विधानसभा क्षेत्रों पर बहुत सेे भाजपा नेताओं ने काफी पहले से अपनी तरफ से चुनावी तैयारी शुरू कर दी है। इन्हें पार्टी की तरफ से किसी भी स्तर पर प्रत्याशी बनाए जाने के खुलतौर पर न तो संकेत दिए गए हैं और न ही कोई घोषणा की है। इसके बाद भी वे खुद को प्रत्याशी मानकर तैयारियों के साथ-साथ चुनावी गणित बैठाने में लगे हुए थे। बाह विधानसभा सीट से भी कई भाजपाई चुनाव लड़ने के सपने देख रहे हैं। इसके लिए वे लगातार क्षेत्र में सक्रिय भी हैं। ऐसे में अरिदमन के भाजपा में आने की चर्चाओं से उन्हें झटका लगा है। क्याेंकि वे जानते हैं कि यदि अरिदमन की ‘घर वापसी’ हुई तो किसी भी संभावित लड़ाके लिए उनकी टिकट काट पाना मुश्किल होगा।
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बिल्डर के सपने पर संकट!
बाह विधानसभा सीट पर महानगर के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के साथ कुछ और नेताओं की भी नजर है। इसके अलावा शहर के एक नामचीन बिल्डर भी कमल के फूल के सहारे विधानसभा में बैठने की तैयारी कर रहे हैं। अपने इस सपने को साकार करने के लिए वह भाजपा की सदस्यता पहले ही ले चुके हैं। गुपचुप तरीके से वे स्थानीय स्तर से लेकर लखनऊ और दिल्ली के पदाधिकारियों के लगातार संपर्क में हैं। अब तक वे अपनी दावेदारी को लेकर सुनिश्चित थे। मगर, अरिदमन के आने की चर्चाओं ने उनके माथे पर शिकन बढ़ा दी है।
रिकॉर्ड भी बना चुके हैं ‘राजा’
बाह सीट पर सबसे ज्यादा वोट हासिल करने का रिकॉर्ड भी महेंद्र अरिदमन सिंह के नाम है। इस सीट पर अब तक जीते प्रत्याशियों में अरिदमन को 2012 के विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा वोट मिले। उन्होंने 99379 वोट हासिल किए। 2007 के चुनाव में बसपा प्रत्याशी मधुसूदन शर्मा अरिदमन को शिकस्त देने में कामयाब जरूर रहे थे लेकिन उनके और अरिदमन के बीच हार-जीत का अंतर ज्यादा नहीं रहा था। इस चुनाव में मधुसूदन को 38877 वोट और अरिदमन को 34254 वोट मिले थे। जबकि इससे पहले 2002 में हुए चुनाव में अरिदमन को 54 हजार से अधिक वोट मिले थे। इस सीट पर हुए चुनाव में अब तक यह दूसरा सबसे बड़ा वोट हासिल करने का रिकॉर्ड था।