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सपा को आगरा में तीसरा बड़ा झटका
सपा को आगरा में तीसरा बड़ा झटका
Updated Sun, 15 Jan 2017 12:29 AM IST
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सपा को आगरा में तीसरा बड़ा झटका
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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समाजवादी पार्टी में चल रहे ‘दंगल’ के बीच आगरा में पार्टी के चार प्रत्याशी मैदान से बाहर हो गए हैं। विधायक अरिदमन सिंह और खेरागढ़ सीट से प्रत्याशी उनकी पत्नी पक्षालिका सिंह से पहले आगरा ग्रामीण सीट की प्रत्याशी हेमलता दिवाकर पार्टी की उम्मीदवारी को ठुकराकर भाजपा में शामिल हो चुकी हैं। चौथे प्रत्याशी के रूप में छावनी सीट के प्रत्याशी चंद्रसेन टपलू का आकस्मिक निधन हो चुका है। अरिदमन और पक्षालिका का नाम शिवपाल सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव दोनों की सूची में था।
विधानसभा चुनाव का बिगुल फुंक चुका है लेकिन सपा चुनाव के लिए अब तक तैयार नहीं हो पा रही। मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव में ‘साइकिल’ को लेकर जंग छिड़ी ही है, इस रार के चलते स्थानीय स्तर पर प्रत्याशी पार्टी से किनारा करने लगे हैं।
पहला झटका: अरिदमन-पक्षालिका
जिले की नौ विधानसभा सीटों में से बाह से अरिदमन सिंह सपा की टिकट पर 2012 में जीते थे। वह सबसे अधिक मतों से चुनाव जीतने वाले विधायक थे। उन्हें 99379 वोट मिले थे। इसी चुनाव में खेरागढ़ सीट से उनकी पत्नी पक्षालिका सिंह विधानसभा चुनाव में उतरी थीं। मगर, 7106 वोटों से बसपा प्रत्याशी से चुनाव हार गई थीं। इसके बाद पक्षालिका सिंह वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भी फतेहपुर सीकरी सीट से सपा की प्रत्याशी रहीं। इसमें वह तीसरे नंबर पर रही थीं। अरिदमन सिंह के साथ-साथ पक्षालिका की मजबूत पकड़ के चलते ही सपा ने अपनी पहली सूची में पक्षालिका को खेरागढ़ से प्रत्याशी घोषित कर दिया था। पार्टी में विवाद के बीच मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जब अपनी सूची जारी की तो उसमें भी अरिदमन और पक्षालिका का नाम था।
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दूसरा झटका: हेमलता दिवाकर
सपा ने अपनी पहली सूची में हेमलता दिवाकर को आगरा ग्रामीण सीट से प्रत्याशी घोषित किया था। मगर, पिछले दिनों उन्होंने भी सपा छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था। वर्ष 2012 के चुनाव में वह दूसरे नंबर पर रही थीं। उन्हें 51123 वोट मिले थे। इसी के चलते सपा ने उन्हें इस बार भी अपना उम्मीदवार बनाया था।
तीसरा झटका: चंद्रसेन टपलू
सपा को तीसरा झटका चंद्रसेन टपलू के रूप में लगा। वह छावनी से पार्टी के प्रत्याशी थे। उनका भी नाम सपा की पहली सूची में था। मगर, पिछले दिनों हार्टअटैक से उनका निधन हो गया। 2012 के चुनाव में वह तीसरे नंबर पर जरूर रहे थे लेकिन 45684 वोट हासिल किए थे।
चर्चाओं को दरकिनार करते हुए दिया था मौका
अरिदमन सिंह ने मकर संक्रांति पर भले ही भाजपा का दामन थामा हो लेकिन उनके सपा छोड़ने की चर्चाएं काफी दिनों से चल रही थीं। मगर, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इन चर्चाओं को दरकिनार करते हुए अपनी सूची में दोनों को जगह दी थी। सीएम ने जिले की नौ सीटों में से अपनी पहली सूची में सिर्फ तीन पर ही प्रत्याशी घोषित किए थे। इसमें से फतेहपुर सीकरी से लाल सिंह लोधी के अलावा बाह से अरिदमन सिंह और खेरागढ़ से पक्षालिका सिंह के ही नाम थे।
सपा की लहर में अरिदमन ने बनाया था रिकॉर्ड
वर्ष 1989 से 2012 के बीच अरिदमन सिंह सात बार अलग-अलग पार्टियों के बैनर तले विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। इसमें से छह बार विधायक चुने गए। मगर, अब तक की उनकी सबसे बड़ी जीत पिछले चुनाव में सपा के बैनर तले ही हुई थी। उन्हें 54.07 फीसदी वोट मिले थे। इससे पहले वर्ष 2007 में भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में उतरे लेकिन चुनाव हार गए थे। 2002 में भी भाजपा के प्रत्याशी रहे। तब 42.87 फीसदी वोट हासिल कर चुनाव जीता। इससे पहले 1996 में भी भाजपा प्रत्याशी के रूप में 44.27 वोट हासिल कर विधायक बने। 1993 में जनता दल के बैनर पर चुनाव लड़ा। 28.08 फीसदी वोट के साथ चुनाव जीता। 1991 में भी जनता दल से चुनाव लड़ा और 34.17 प्रतिशत वोट पाकर चुनाव जीता। 1989 में भी जनता दल के प्रत्याशी रहे। 49.74 फीसदी वोट मिले और विधायक बने। अब तक वह तीन बार जनता दल, दो बार भाजपा और एक बार सपा के बैनर तले चुनाव जीत चुके हैं।
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विधानसभा चुनाव का बिगुल फुंक चुका है लेकिन सपा चुनाव के लिए अब तक तैयार नहीं हो पा रही। मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव में ‘साइकिल’ को लेकर जंग छिड़ी ही है, इस रार के चलते स्थानीय स्तर पर प्रत्याशी पार्टी से किनारा करने लगे हैं।
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पहला झटका: अरिदमन-पक्षालिका
जिले की नौ विधानसभा सीटों में से बाह से अरिदमन सिंह सपा की टिकट पर 2012 में जीते थे। वह सबसे अधिक मतों से चुनाव जीतने वाले विधायक थे। उन्हें 99379 वोट मिले थे। इसी चुनाव में खेरागढ़ सीट से उनकी पत्नी पक्षालिका सिंह विधानसभा चुनाव में उतरी थीं। मगर, 7106 वोटों से बसपा प्रत्याशी से चुनाव हार गई थीं। इसके बाद पक्षालिका सिंह वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भी फतेहपुर सीकरी सीट से सपा की प्रत्याशी रहीं। इसमें वह तीसरे नंबर पर रही थीं। अरिदमन सिंह के साथ-साथ पक्षालिका की मजबूत पकड़ के चलते ही सपा ने अपनी पहली सूची में पक्षालिका को खेरागढ़ से प्रत्याशी घोषित कर दिया था। पार्टी में विवाद के बीच मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जब अपनी सूची जारी की तो उसमें भी अरिदमन और पक्षालिका का नाम था।
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दूसरा झटका: हेमलता दिवाकर
सपा ने अपनी पहली सूची में हेमलता दिवाकर को आगरा ग्रामीण सीट से प्रत्याशी घोषित किया था। मगर, पिछले दिनों उन्होंने भी सपा छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था। वर्ष 2012 के चुनाव में वह दूसरे नंबर पर रही थीं। उन्हें 51123 वोट मिले थे। इसी के चलते सपा ने उन्हें इस बार भी अपना उम्मीदवार बनाया था।
तीसरा झटका: चंद्रसेन टपलू
सपा को तीसरा झटका चंद्रसेन टपलू के रूप में लगा। वह छावनी से पार्टी के प्रत्याशी थे। उनका भी नाम सपा की पहली सूची में था। मगर, पिछले दिनों हार्टअटैक से उनका निधन हो गया। 2012 के चुनाव में वह तीसरे नंबर पर जरूर रहे थे लेकिन 45684 वोट हासिल किए थे।
चर्चाओं को दरकिनार करते हुए दिया था मौका
अरिदमन सिंह ने मकर संक्रांति पर भले ही भाजपा का दामन थामा हो लेकिन उनके सपा छोड़ने की चर्चाएं काफी दिनों से चल रही थीं। मगर, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इन चर्चाओं को दरकिनार करते हुए अपनी सूची में दोनों को जगह दी थी। सीएम ने जिले की नौ सीटों में से अपनी पहली सूची में सिर्फ तीन पर ही प्रत्याशी घोषित किए थे। इसमें से फतेहपुर सीकरी से लाल सिंह लोधी के अलावा बाह से अरिदमन सिंह और खेरागढ़ से पक्षालिका सिंह के ही नाम थे।
सपा की लहर में अरिदमन ने बनाया था रिकॉर्ड
वर्ष 1989 से 2012 के बीच अरिदमन सिंह सात बार अलग-अलग पार्टियों के बैनर तले विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। इसमें से छह बार विधायक चुने गए। मगर, अब तक की उनकी सबसे बड़ी जीत पिछले चुनाव में सपा के बैनर तले ही हुई थी। उन्हें 54.07 फीसदी वोट मिले थे। इससे पहले वर्ष 2007 में भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में उतरे लेकिन चुनाव हार गए थे। 2002 में भी भाजपा के प्रत्याशी रहे। तब 42.87 फीसदी वोट हासिल कर चुनाव जीता। इससे पहले 1996 में भी भाजपा प्रत्याशी के रूप में 44.27 वोट हासिल कर विधायक बने। 1993 में जनता दल के बैनर पर चुनाव लड़ा। 28.08 फीसदी वोट के साथ चुनाव जीता। 1991 में भी जनता दल से चुनाव लड़ा और 34.17 प्रतिशत वोट पाकर चुनाव जीता। 1989 में भी जनता दल के प्रत्याशी रहे। 49.74 फीसदी वोट मिले और विधायक बने। अब तक वह तीन बार जनता दल, दो बार भाजपा और एक बार सपा के बैनर तले चुनाव जीत चुके हैं।