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खेतीबाड़ी को लेकर बदली किसान ने सोच, बाग में उगाए एप्पल बेर, मिली नई राह
Wed, 06 Jan 2021 01:14 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 06 Jan 2021 01:14 PM IST
सार
- जनवरी के अंत तक बिक्री के लिए तैयार होगा फल
- पचास ग्राम तक का होता है एक फल
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एप्पल बेर की खेती करने वाले किसान मनोज
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
फिरोजाबाद जनपद के नारखी ब्लॉक में वर्षों से मिर्च और आलू की फसल कर रहे एक किसान ने एप्पल बेर का बाग लगाकर परंपरागत खेती से हटकर कदम उठाया है। किसान ने प्रयोग के लिए चार बीघा क्षेत्र में एप्पल बेर की पेड़ लगाए। किसान का यह प्रयोग सफल रहा। वह अब इसका दायरा बढ़ाने की तैयारी में है।
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खेतीबाड़ी को लेकर क्षेत्रीय किसानों की सोच बदल रही है। जनपद के कुछ उन्नतशील किसान क्षेत्र में नए-नए प्रयोग कर परंपरागत उपज की सोच को बदल रहे हैं। नारखी ब्लॉक के गांव सलेमपुर में युवा किसान मनोज कुमार शर्मा वर्षों से अपने खेत में आलू और मिर्च की फसल करते आ रहे हैं। जुलाई 2020 में उन्होंने अपने खेत के चार बीघा क्षेत्र में एप्पल बेर के दो सौ से अधिक पौधे लगाए। मानक के अनुसार उन्होंने पौध को सींचा। अब पौधे पेड़ का रूप ले चुके हैं और इन पर एप्पल बेर का फल आ गया है। दो सौ से अधिक पेड़ों पर एप्पल बेर के बडे़-बडे़ फल लदे देखकर मनोज को अपना प्रयोग सफल होने की खुशी है तो वर्षों से परंपरागत खेती से इतर फसल करने की नई राह भी मिल गई है।
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जनवरी के अंत तक बिक्री के लिए तैयार होगा फल
युवा किसान मनोज ने जुलाई माह में पौधे लगाए थे। पेड़ पर फल तो आ गए लेकिन जनवरी के अंतिम सप्ताह में यह पककर बिक्री के लिए तैयार हो जाएंगे। एक पेड़ पर करीब 80 किलोग्राम बेर होने की उम्मीद है।
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खेतीबाड़ी को लेकर क्षेत्रीय किसानों की सोच बदल रही है। जनपद के कुछ उन्नतशील किसान क्षेत्र में नए-नए प्रयोग कर परंपरागत उपज की सोच को बदल रहे हैं। नारखी ब्लॉक के गांव सलेमपुर में युवा किसान मनोज कुमार शर्मा वर्षों से अपने खेत में आलू और मिर्च की फसल करते आ रहे हैं। जुलाई 2020 में उन्होंने अपने खेत के चार बीघा क्षेत्र में एप्पल बेर के दो सौ से अधिक पौधे लगाए। मानक के अनुसार उन्होंने पौध को सींचा। अब पौधे पेड़ का रूप ले चुके हैं और इन पर एप्पल बेर का फल आ गया है। दो सौ से अधिक पेड़ों पर एप्पल बेर के बडे़-बडे़ फल लदे देखकर मनोज को अपना प्रयोग सफल होने की खुशी है तो वर्षों से परंपरागत खेती से इतर फसल करने की नई राह भी मिल गई है।
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जनवरी के अंत तक बिक्री के लिए तैयार होगा फल
युवा किसान मनोज ने जुलाई माह में पौधे लगाए थे। पेड़ पर फल तो आ गए लेकिन जनवरी के अंतिम सप्ताह में यह पककर बिक्री के लिए तैयार हो जाएंगे। एक पेड़ पर करीब 80 किलोग्राम बेर होने की उम्मीद है।
पचास ग्राम तक का होता है एक फल
यह बेर साधारण बेर से अलग है। साधारण बेर छोटा होता है लेकिन यह बेर कम से कम पचास ग्राम वजनी होता है। किसान मनोज शर्मा ने कहा कि जब वह एप्पल बेर के पौध खरीद कर लाए थे तब शंका थी कि जनपद के वायुमंडल के अनुसार पेड़ पर बेर आएंगे या नहीं लेकिन उनका प्रयोग सफल रहा। आलू और मिर्च की फसल करने वाली जमीन पर बेर का पेड़ लगाने का विचार उन्हें मथुरा क्षेत्र में कुछ स्थानों पर लगे एप्पल बेर के पेड़ देखकर आया। कोसमा, बटेश्वर आदि क्षेत्रों से वह ढाई सौ पौध लेकर आए और खेत के चार बीघा क्षेत्र में इन्हें लगा दिया।
80 रुपये प्रति किलो तक बिकता है एप्पल बेर
बेर की पौध 80 से सौ रुपये तक की है। इन्हें लगाने की लागत अधिक नहीं है। इनके रखरखाव पर अधिक ध्यान देना पड़ता है। जंगली जानवरों से पेड़ बचाने के लिए चारों ओर मनोज ने तारों की बाड़ लगाई। फलों की रक्षा के लिए मजदूर भी रखे हैं। बाजार में एप्पल बेर 80 रुपये प्रति किलो तक बिक जाता है।
यह बेर साधारण बेर से अलग है। साधारण बेर छोटा होता है लेकिन यह बेर कम से कम पचास ग्राम वजनी होता है। किसान मनोज शर्मा ने कहा कि जब वह एप्पल बेर के पौध खरीद कर लाए थे तब शंका थी कि जनपद के वायुमंडल के अनुसार पेड़ पर बेर आएंगे या नहीं लेकिन उनका प्रयोग सफल रहा। आलू और मिर्च की फसल करने वाली जमीन पर बेर का पेड़ लगाने का विचार उन्हें मथुरा क्षेत्र में कुछ स्थानों पर लगे एप्पल बेर के पेड़ देखकर आया। कोसमा, बटेश्वर आदि क्षेत्रों से वह ढाई सौ पौध लेकर आए और खेत के चार बीघा क्षेत्र में इन्हें लगा दिया।
80 रुपये प्रति किलो तक बिकता है एप्पल बेर
बेर की पौध 80 से सौ रुपये तक की है। इन्हें लगाने की लागत अधिक नहीं है। इनके रखरखाव पर अधिक ध्यान देना पड़ता है। जंगली जानवरों से पेड़ बचाने के लिए चारों ओर मनोज ने तारों की बाड़ लगाई। फलों की रक्षा के लिए मजदूर भी रखे हैं। बाजार में एप्पल बेर 80 रुपये प्रति किलो तक बिक जाता है।