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बीएसए कार्यालय के लिपिक और कर्मचारी एसटीएफ के रडार पर
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मैनपुरी। फर्जी शिक्षक मामले में बीएसए कार्यालय के लिपिक और कर्मचारी एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) की रडार पर हैं। शासन ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। एसटीएफ ने मामले की गोपनीय जांच शुरू कर दी है।
अनामिका शुक्ला प्रकरण के बाद मैनपुरी का नाम फर्जीवाड़े में सबसे ऊपर उभर के आया है। अभी तक एसटीएम ने जितने मामलों का खुलासा किया है उनमें आठ शिक्षक- शिक्षिकाएं मैनपुरी के शामिल मिले हैं। एसटीएफ से शासन को भेजी गई रिपोर्ट में मैनपुरी बीएसए कार्यालय की संलिप्तता की बात कही गई है। एक ही नाम से अलग-अलग जनपदों में नियुक्ति पाने वाले अधिकतर शिक्षक मैनपुरी के हैं। इनमें कई के अभिलेख मैनपुरी कार्यालय से ही निकाले गए हैं। यहां तक कि अनामिका शुक्ला प्रकरण का मास्टर माइंड पुष्पेंद्र भी मैनपुरी का ही है। अभी तक तीन ऐसे प्रकरण जनपद में सामने आए हैं जिनकी पहली नियुक्ति मैनपुरी में हुई और उसी नाम से बाद में दूसरे जनपदों में नियुक्ति की गई। इससे यह साबित हो रहा है कि मैनपुरी कार्यालय से ही उनके अभिलेख निकाले गए।
केस नंबर एक
कुरावली में तैनात शिक्षक सुशील कुमार कौशल की नियुक्ति वर्ष 2014 में मैनपुरी में प्रथम काउंसलिंग से हुई। सुशील कुमार कौशल के नाम से ही तीसरी काउंसलिंग में वर्ष 2014 में फर्रुखाबाद जनपद में सुशील कुमार कौशल की नियुक्ति हुई। जांच में मैनपुरी का शिक्षक सही पाया गया।
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केस नंबर दो
मैनपुरी में वर्ष 2006 में तैनात शिक्षक देवेंद्र प्रताप सिंह की तैनाती हुई। इसी नाम से वर्ष 2009 में जनपद कन्नौज में शिक्षक की तैनाती हुई। इस मामले की जांच अभी जारी है। प्रथम जांच में माना गया है कि मैनपुरी में तैनात शिक्षक ही असली है।
केस नंबर तीन
मैनपुरी के जागीर विकास खंड में तैनात अनीता सिंह की नियुक्ति वर्ष 2006 में हुई। जबकि इसी नाम से वर्ष 2009 में फर्रुखाबाद के राजेपुर विकास खंड में एक दूसरी शिक्षिका की तैनाती हुई। इस प्रकरण की भी जांच जारी है। प्रथम जांच में पाया गया है कि मैनपुरी में तैनात शिक्षिका अनीता ही असली है।
फर्जी शिक्षक मामले की हर स्तर से जांच कराई जा रही है। जो भी दोषी होगा उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई होगी।
विजय प्रताप सिंह बीएसए
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अनामिका शुक्ला प्रकरण के बाद मैनपुरी का नाम फर्जीवाड़े में सबसे ऊपर उभर के आया है। अभी तक एसटीएम ने जितने मामलों का खुलासा किया है उनमें आठ शिक्षक- शिक्षिकाएं मैनपुरी के शामिल मिले हैं। एसटीएफ से शासन को भेजी गई रिपोर्ट में मैनपुरी बीएसए कार्यालय की संलिप्तता की बात कही गई है। एक ही नाम से अलग-अलग जनपदों में नियुक्ति पाने वाले अधिकतर शिक्षक मैनपुरी के हैं। इनमें कई के अभिलेख मैनपुरी कार्यालय से ही निकाले गए हैं। यहां तक कि अनामिका शुक्ला प्रकरण का मास्टर माइंड पुष्पेंद्र भी मैनपुरी का ही है। अभी तक तीन ऐसे प्रकरण जनपद में सामने आए हैं जिनकी पहली नियुक्ति मैनपुरी में हुई और उसी नाम से बाद में दूसरे जनपदों में नियुक्ति की गई। इससे यह साबित हो रहा है कि मैनपुरी कार्यालय से ही उनके अभिलेख निकाले गए।
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केस नंबर एक
कुरावली में तैनात शिक्षक सुशील कुमार कौशल की नियुक्ति वर्ष 2014 में मैनपुरी में प्रथम काउंसलिंग से हुई। सुशील कुमार कौशल के नाम से ही तीसरी काउंसलिंग में वर्ष 2014 में फर्रुखाबाद जनपद में सुशील कुमार कौशल की नियुक्ति हुई। जांच में मैनपुरी का शिक्षक सही पाया गया।
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केस नंबर दो
मैनपुरी में वर्ष 2006 में तैनात शिक्षक देवेंद्र प्रताप सिंह की तैनाती हुई। इसी नाम से वर्ष 2009 में जनपद कन्नौज में शिक्षक की तैनाती हुई। इस मामले की जांच अभी जारी है। प्रथम जांच में माना गया है कि मैनपुरी में तैनात शिक्षक ही असली है।
केस नंबर तीन
मैनपुरी के जागीर विकास खंड में तैनात अनीता सिंह की नियुक्ति वर्ष 2006 में हुई। जबकि इसी नाम से वर्ष 2009 में फर्रुखाबाद के राजेपुर विकास खंड में एक दूसरी शिक्षिका की तैनाती हुई। इस प्रकरण की भी जांच जारी है। प्रथम जांच में पाया गया है कि मैनपुरी में तैनात शिक्षिका अनीता ही असली है।
फर्जी शिक्षक मामले की हर स्तर से जांच कराई जा रही है। जो भी दोषी होगा उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई होगी।
विजय प्रताप सिंह बीएसए