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Agra News: नहर में गिरे मासूम, मातम में शामिल होने आ रहे चाचा की हादसे में गई जान
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तरासाें में चाचा-भतीजे की मौत: मृतक चन्द्रपाल की बेसुध पत्नी काजल, बिलखती मां द्रोपदी एवं छोटे
बाह। तरासाें गांव में मंगलवार की शाम 4 बजे हर्ष (4) की नहर में गिरने से मौत हो गई थी। मातम में शामिल होने के लिए चाचा चंद्रपाल (30) रात में ही गाजियाबाद से बाइक से निकले थे। बल्लभगढ़ में डिवाइडर से बाइक टकराने से उनकी जान चली गई। चाचा-भतीजे की मौत से परिवार में मातम छा गया। तरासों गांव शोक में डूबा हुआ है।
तरासाें गांव के बंटू का मझला बेटा हर्ष मंगलवार की शाम 4 बजे बच्चों के साथ नहर पर खेल रहा था। नहर पार करने के लिए गर्डर की पटरी बनाई है। इससे निकलते समय हर्ष नहर में गिर गया। बच्चों की सूचना पर पहुंचे परिजन ने हर्ष को बेहोशी की हालत में निकाला और सीएचसी बाह पर ले पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं, हर्ष के चाचा चंद्रपाल गाजियाबाद में रेहड़ी लगाकर परिवार का भरण पोषण करते थे। मासूम की मौत की खबर पर चाचा चंद्रपाल ने परिवार के लोगों को बस में बैठा दिया और खुद बाइक से घर के लिए निकले। मंगलवार की रात बल्लभगढ़ में डिवाइडर से बाइक टकराने से उनकी मौत हो गई। मासूम के बाद चाचा की मौत की खबर से परिवार में मातम छा गया। बुधवार की शाम पोस्टमार्टम के बाद शव घर पर पहुंचा तो पूरा गांव शोक में डूब गया। बुधवार को किसी भी घर में चूल्हे तक नहीं जले।
तरासों के रहने वाले चंद्रपाल घर में अकेला कमाने वाला था। गाजियाबाद में उसके रेहड़ी लगाने से परिवार की गुजर हो रही थी। हादसे में चंद्रपाल की मौत से पूरा परिवार सदमे में है। पत्नी काजल बेसुध पड़ी है। मां द्रोपदी की चीत्कार ढांढ़स बंधाने वालों को रुला रही है। काजल को नहीं सूझ रहा कि 6 माह के बेटे शिवम, नंदनी (5), कनक (4), नैना (3) की परवरिश कैसे होगी। काजल और द्रोपदी के बीच बैठे बच्चे पिता की मौत से अनजान हैं। कभी बेसुध काजल को देखते हैं तो पलक झपकते ही बिलखती दादी द्रोपदी पर उनकी निगाहें टिक जाती हैं। मासूमों को देखने वाले भी अपनी आंखों में आंसू नहीं रोक पा रहे।
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तरासाें गांव के बंटू का मझला बेटा हर्ष मंगलवार की शाम 4 बजे बच्चों के साथ नहर पर खेल रहा था। नहर पार करने के लिए गर्डर की पटरी बनाई है। इससे निकलते समय हर्ष नहर में गिर गया। बच्चों की सूचना पर पहुंचे परिजन ने हर्ष को बेहोशी की हालत में निकाला और सीएचसी बाह पर ले पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं, हर्ष के चाचा चंद्रपाल गाजियाबाद में रेहड़ी लगाकर परिवार का भरण पोषण करते थे। मासूम की मौत की खबर पर चाचा चंद्रपाल ने परिवार के लोगों को बस में बैठा दिया और खुद बाइक से घर के लिए निकले। मंगलवार की रात बल्लभगढ़ में डिवाइडर से बाइक टकराने से उनकी मौत हो गई। मासूम के बाद चाचा की मौत की खबर से परिवार में मातम छा गया। बुधवार की शाम पोस्टमार्टम के बाद शव घर पर पहुंचा तो पूरा गांव शोक में डूब गया। बुधवार को किसी भी घर में चूल्हे तक नहीं जले।
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तरासों के रहने वाले चंद्रपाल घर में अकेला कमाने वाला था। गाजियाबाद में उसके रेहड़ी लगाने से परिवार की गुजर हो रही थी। हादसे में चंद्रपाल की मौत से पूरा परिवार सदमे में है। पत्नी काजल बेसुध पड़ी है। मां द्रोपदी की चीत्कार ढांढ़स बंधाने वालों को रुला रही है। काजल को नहीं सूझ रहा कि 6 माह के बेटे शिवम, नंदनी (5), कनक (4), नैना (3) की परवरिश कैसे होगी। काजल और द्रोपदी के बीच बैठे बच्चे पिता की मौत से अनजान हैं। कभी बेसुध काजल को देखते हैं तो पलक झपकते ही बिलखती दादी द्रोपदी पर उनकी निगाहें टिक जाती हैं। मासूमों को देखने वाले भी अपनी आंखों में आंसू नहीं रोक पा रहे।
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