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बेबसी के बीच भी चमकेगा समर्पण का चांद

Thu, 29 Oct 2015 02:03 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा Updated Thu, 29 Oct 2015 02:03 AM IST
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Among the shining moon of helplessness surrender
उनके चेहरों पर छाई उदासी यह कहती है, जिंदगी कभी इतनी बेबस भी होती है। उनके पास न चांद होगा और न सुहाग। न नई साड़ी होगी और न सोलह शृंगार। न हाथों में मेंहदी और न पांवों में महावर। होगी तो बस पति के सलामती की कामना। जेल की सलाखों के पीछे भी सुहागिनों का प्रेम और विश्वास चमकेगा।
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पति की लंबी उम्र के लिए निर्जल व्रत रखेंगी, लेकिन ये साधना उन सुहागिनों को अकेले ही पूरी करनी होगी। करवाचौथ के दिन भी वे अपने सुहाग का चेहरा नहीं देख पाएंगीं। एक जेल में होकर भी उनसे दूर रहेंगीं। इससे बड़ी मजबूरी और क्या हो सकती है।
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जिला जेल की महिला बंदी भी करवाचौथ का व्रत रखेंगीं। चांद निकलने के बाद सब बैरक में ही पूजा कर कहानी सुनेंगीं। वहीं अर्घ्य भी देंगीं। कुछ के घर से पूजा व शृंगार का सामान आया है तो कुछ के मिलने वाले अब तक नहीं आए।
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पिछले तीन साल से जेल में बंद सीमा की बातों में मायूसी झलकती है।
 उसके घर से कोई सामान लेकर नहीं आया। डेढ़ महीने से इंतजार कर रही है। वह व्रत रखेगी। दूसरी बंदियों से पूजा की सामग्री लेकर काम चलाएगी। उसका पति बंटी इसी जेल में बंद है।
गीता के घर से पूजा व शृंगार का थोड़ा बहुत सामान आ गया है। पिछले ढाई साल से जेल में बंद गीता का पति अशोक भी यही है, पर करवाचौथ के दिन मिल नहीं पाएगी। जेल में बंद रिश्तेदारों की शनिवार को मिलाई का नियम है।
 गीता को इस बात का अफसोस है। पिछले साल भी करवाचौथ का व्रत रही थी।
आशा के घर से भी सामान नहीं आया है। उसे भी इस बात की चिंता है कि बिना सामग्री के पूजा कैसे होगी। वह पिछले पांच साल से बंदी है और हर बार करवाचौथ का व्रत रहती है। पति गोपाल इसी जेल में बंद है।
अर्चना जेल में अकेली है। बस इतना ही कहती है, व्रत में भगवान से यही मांगते हैं वो जहां हैं सलामत रहें। यहां रहते हुए एक साल दो महीने हो गए। पति बाहर हैं। पिछले साल भी करवाचौथ का व्रत रहे थे। इस बार भी रहेंगे।
पूजा और शृंगार का सामान आ गया है। करवाचौथ के दिन जेल में पकवान बनते है।
अपना-अपना नसीब है
हाथों में पांच दिन का बच्चा और आंखों में आंसू लिए संगम अपने पति सुभाष से मिलने आई थी। वह चार महीने से जेल में बंद है। करवाचौथ का नाम आने पर संगम फफकने लगी। बोली, क्या करें नसीब ही ऐसा है।

 इस बार उनके बिना ही करवाचौथ का त्योहार मनाना पड़ेगा। व्रत रहकर उनकी लंबी उम्र की प्रार्थना करूंगी।
मंगा दी जाएंगी जरूरत की चीजें
जेलर प्रमोद त्रिपाठी ने बताया कि जेल में 103 महिला बंदी व 12 बच्चे हैं। इनमें से 50 बंदी करवाचौथ का व्रत रखेंगीं। उनके कहने पर करवा और जरूरत की चीजें मंगवा दी जाती हैं। जेल में बंद रिश्तेदारों की मुलाकात का दिन शनिवार है। करवाचौथ के दिन मिलने का कोई नियम नहीं है। कोई महिला बंदी इच्छा जताएगी तो करा देंगे।
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