{"_id":"631d6eb28634381f7bdc5d6299ca8fee","slug":"ambulances-were-casually-wastel-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"लापरवाही से कंडम हुईं एंबुलेंस ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लापरवाही से कंडम हुईं एंबुलेंस
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Thu, 20 Aug 2015 01:50 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एसएन मेडिकल कालेज में चिकित्सकीय सेवाओं के अलावा एंबुलेंस सेवा भी ध्वस्त है। कालेज प्रशासन की लापरवाही से दो एंबुलेंस कंडम हो गईं, तीन कतार में हैं। तकनीकी स्टाफ ने बताया कि मामूली खराबी होने के बाद इन्हें दुरुस्त नहीं कराया, नतीजतन ये कबाड़ में तब्दील हो गईं।
इमरजेंसी की नई इमारत का निर्माण करीब आठ साल पहले हुआ था। इसके लिए पांच एंबुलेंस खरीदी गई थीं। इमरजेंसी परिसर में खड़ी दो एंबुलेंस कबाड़ में तब्दील हो चुकी हैं। पहिए पंक्चर हैं, चिकित्सकीय उपकरण भी टूटे पड़े हैं। एक में कबाड़ भर दिया गया तो दूसरी को कर्मचारियों ने स्टोर रूम बना दिया है। इनके दूरी नापने वाले यंत्र में 40 हजार किमी दर्ज है। विडंबना है कि एंबुलेंस की कमी का दुखड़ा रोने वाले एसएन प्रशासन ने इन्हें ठीक कराने की कोशिश तक नहीं की।
नहीं हटी एंबुलेंस
इसे एंबुलेंस संचालकों की दबंगई कहें या फिर कालेज और जिला प्रशासन की मजबूरी। मरीजों से ठगाई करने वाले निजी हास्पिटलों के एजेंट एंबुलेंस संचालकाें के खिलाफ दोनों ही विभागों ने आंख बंद कर लीं। इनको हटाने की कोई पहल नहीं की। इससे इनके हौसले बुलंद हैं।
विज्ञापन
विशेषज्ञ से एंबुलेंस की जांच कराई जाएगी, सही हो सकने वाली एंबुलेंस को दुरुस्त कराया जाएगा। इमरजेंसी के बाहर लगी प्राइवेट एंबुलेंस को हटाया जाएगा।
-डा. एसके गर्ग, प्राचार्य
विज्ञापन
इमरजेंसी की नई इमारत का निर्माण करीब आठ साल पहले हुआ था। इसके लिए पांच एंबुलेंस खरीदी गई थीं। इमरजेंसी परिसर में खड़ी दो एंबुलेंस कबाड़ में तब्दील हो चुकी हैं। पहिए पंक्चर हैं, चिकित्सकीय उपकरण भी टूटे पड़े हैं। एक में कबाड़ भर दिया गया तो दूसरी को कर्मचारियों ने स्टोर रूम बना दिया है। इनके दूरी नापने वाले यंत्र में 40 हजार किमी दर्ज है। विडंबना है कि एंबुलेंस की कमी का दुखड़ा रोने वाले एसएन प्रशासन ने इन्हें ठीक कराने की कोशिश तक नहीं की।
विज्ञापन
नहीं हटी एंबुलेंस
इसे एंबुलेंस संचालकों की दबंगई कहें या फिर कालेज और जिला प्रशासन की मजबूरी। मरीजों से ठगाई करने वाले निजी हास्पिटलों के एजेंट एंबुलेंस संचालकाें के खिलाफ दोनों ही विभागों ने आंख बंद कर लीं। इनको हटाने की कोई पहल नहीं की। इससे इनके हौसले बुलंद हैं।
विज्ञापन
विशेषज्ञ से एंबुलेंस की जांच कराई जाएगी, सही हो सकने वाली एंबुलेंस को दुरुस्त कराया जाएगा। इमरजेंसी के बाहर लगी प्राइवेट एंबुलेंस को हटाया जाएगा।
-डा. एसके गर्ग, प्राचार्य