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एंबुलेंस की हड़ताल, ऑटो, ई-रिक्शा पर लेकर जानी पड़ी प्रसूताएं

Tue, 27 Jul 2021 01:39 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Tue, 27 Jul 2021 01:39 AM IST
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Ambulance strike... Maternities had to be taken on auto, e-rickshaw
आगरा। सरकारी एंबुलेंस की हड़ताल से चिकित्सकीय सेवाएं चरमरा गईं। प्रसूताओं को ऑटो और ई-रिक्शा से घर जाना पड़ा। प्रसव के लिए आने वाली गर्भवतियों को भी भाड़े के वाहन पर लाना पड़ा।
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जिले में सरकारी 90 एंबुलेंस संचालित हैं। इसमें गर्भवती-प्रसूताओं के लिए 40 एंबुलेंस 102 सेवा, 48 एंबुलेंस दुर्घटना में घायलों को लेकर जाने वाली 108 सेवा और एडवांस लाइफ सपोर्ट की दो एंबुलेंस संचालित हैं। समायोजन, स्थायी नियुक्ति, ठेका प्रथा बंद करने, कोरोना योद्धा घोषित करने समेत पांच मांगों के लिए सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। इससे शहर और देहात की एंबुलेंस सेवा ठप होने से मरीजों को परेशानी हुई।
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जीवनदायिनी स्वास्थ्य विभाग 108, 102 सेवा के स्टाफ ने सभी एंबुलेंस लेडी लॉयल में खड़ी करने के बाद कलक्ट्रेट में डीएम के यहां ज्ञापन दिया। वापस आने के बाद लेडी लॉयल में नारेबाजी करते हुए धरने पर बैठ गए। एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविंद सिंह और महामंत्री रविंद्र सिंह ने कहा कि मांग पूरी न होने तक हड़ताल जारी रहेगी। शरद यादव, प्रभात यादव, मुलायम सिंह, गुमान सिंह आदि रहे।
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सेवला के मुकेश कुमार अपनी पत्नी के प्रसव के बाद एंबुलेंस चालक के पास गए, तो उसने बताया कि आज हड़ताल है, हम नहीं जाएंगे। ऐसे में ऑटो से अपनी पत्नी और नवजात को लेकर गए।
धनौली के नरेश कुमार पत्नी और नवजात को लेडी लॉयल से घर लेकर जाने के लिए 350 रुपये का ऑटो करना पड़ा। इन्होंने बताया कि हड़ताल के कारण कोई भी एंबुलेंस लेकर नहीं गया।
दौरेठा की अफसाना आधा घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार करती रहीं, हड़ताल की जानकारी पर पति इस्लाम, ई-रिक्शा किराए पर करके ले गए। बताया कि 400 रुपये भाड़ा देना पड़ा।
खेरिया मोड़ के वेदपाल सिंह ने बताया कि एंबुलेंस की हड़ताल से परेशानी हुई। 500 रुपये भाड़े पर ऑटो लेकर आए, तब पत्नी और नवजात को लेकर घर पर पहुंचे।
एंबुलेंस की हड़ताल पर प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था करानी चाहिए, एंबुलेंस नहीं मिली तो भाड़े के वाहन पर पत्नी और नवजात को घर लेकर गया। - इस्लाम खान, दौरेठा

घंटे भर तक गेट पर बैठकर एंबुलेंस का इंतजार करते रहे, जब पता चला कि एंबुलेंस की हड़ताल है तो भाड़े के वाहन पर अपने मरीज को लेकर जाना पड़ा। - परवेश, फिरोजाबाद
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