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दोस्ती जो बन गई मिसाल: साथ खेले, स्कूल गए और फिर जब आई मौत की बारी...तो भी न छूटा साथ; गजब का रहा याराना
Sun, 13 Oct 2024 03:02 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sun, 13 Oct 2024 03:02 PM IST
सार
दोस्ती की कहानियां तो बहुत सुनी होंगी, लेकिन मैनपुरी में सड़क हादसे में जिन तीन दोस्तों की एक साथ मौत हुई, उनका याराना बचपन से था। साथ खेले, स्कूल गए और फिर जब मौत की बारी आई, तो भी तीनों का साथ नहीं छूटा।
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तीनों दोस्तों के फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मैनपुरी के कस्बा बेवर में शनिवार को एनएच 34 पर हुए सड़क हादसे में जिंदगी के आखिरी सफर में भी तीन दोस्तों को एक दूसरे का साथ नसीब हुआ। मृतक विनोद, खेमकरन और सिंह लाल अक्सर साथ रहते थे। खेती के अलावा परिवार के भरण पोषण के लिए भंडारा आदि आयोजन में खाना बनाने का काम भी करते थे। विनोद और सिंह लाल चचेरे भाई थे। हादसे के बाद घरों में चीख पुकार मची है।
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हादसे में गांव खांकेताल के रहने वाले तीन किसानों की मौत के बाद शनिवार शाम को शव गावं पहुंचे तो कोहराम मच गया। गमगीन माहौल में सभी का अंतिम संस्कार किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि हादसे में जान गंवाने वाले विनोद शाक्य और सिंह लाल चचेरे भाई थे लेकिन उनके बीच दोस्तों जैसा रिश्ता था। खेमकरन भी दोनों का बेहद खास दोस्त था।
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तीनों अक्सर साथ ही रहा करते थे। सिंह लाल की पत्नी की दो साल पहले मृत्यु हो चुकी थी। वहीं विनोद की पत्नी 10 साल पहले गुजर चुकी थी। पत्नियों की मौत के बाद अब बच्चों की जिम्मेदारी भी उठा रहे थे। तीनों परिवार का भरण पोषण करने के लिए खेती के अलावा भंडारा आदि आयोजन में खाना बनाने का काम भी किया करते थे। इस तरह से तीनों अधिकतर समय साथ ही बिताते थे। सुबह होते ही खेत पर और समय मिलने पर आयोजनों में एक साथ दिखाई देते थे।
शनिवार की सुबह भी राशन लेने जाते समय विनोद ने सिंह लाल के घर जाकर बुलाया और फिर दोनों खेमकरन के घर पहुंचे और राशन लेकर आने की बात कही। तीनों दोस्त अपनी अपनी साइकिलों पर बात करते हुए आगे बढ़ रहे थे। लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा। हादसे के बाद मृतकों के घरों में चीख पुकार मची है।