#हिंदीहैंहम: 'सरकारी दफ्तरों में सिर्फ सात दिन नहीं, पूरे साल किया जाए हिंदी में कामकाज'
- आगरा में अमर उजाला के ‘हिंदी हैं हम’ अभियान के तहत हुए ई-संवाद में शिक्षकों ने कहा, प्रतियोगी परीक्षाएं हिंदी में कराई जाएं
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'14 सितंबर को हिंदी दिवस आता है तो सरकारी कार्यालयों में सात दिन के लिए हिंदी में कामकाज किया जाता है लेकिन यह काफी नहीं है। मातृभाषा के प्रचार और प्रसार को तेजी देने के लिए यह अनिवार्य किया जाना चाहिए कि पूरे साल सरकारी कामकाज हिंदी में ही किया जाए। हिंदी पट्टी में प्रतियोगी परीक्षाएं भी हिंदी में ही होनी चाहिए।'
ये सुझाव अमर उजाला के ‘हिंदी हैं हम’ अभियान के तहत आगरा में गुरुवार को आयोजित ई-संवाद में हिंदी विषय के शिक्षकों ने दिए हैं। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के लागू होने पर हिंदी को बढ़ावा मिलेगा लेकिन इसमें कुछ समय है। सरकार को चाहिए कि दफ्तरों में कामकाज हिंदी में कराने केलिए इसी हिंदी दिवस पर आदेश जारी कर दे।
'अंग्रेजी को बेहतर समझना भूल'
आगरा के राजकीय इंटर कॉलेज के प्रवक्ता डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि हमारे बच्चे अंग्रेजी में बात करते हैं तो हमें अच्छा लगता है क्योंकि मानसिकता ऐसी हो गई है कि अंग्रेजी बेहतर भाषा है, लेकिन यह सच नहीं है। हिंदी का क्षेत्र कम व्यापक नहीं है, हमें हिंदीभाषी होने पर गर्व होना चाहिए।
'हिंदी ही हिंदुस्तान की पहचान'
महाराजा अग्रसेन इंटर कॉलेज के प्रवक्ता सोमवीर सिंह यादव ने कहा कि फ्रांस के लोग फ्रेंच से पहचाने जाते हैं, इंग्लैंड के अंग्रेजी से, चीन के चीनी भाषा से, इसी तरह हिंदुस्तान की पहचान हिंदी है। हमें अपनी विशिष्ट पहचान बनाए रखनी है तो हिंदी पर गर्व करना होगा।
'रुचिकर तरीके से पढ़ाना होगा'
आरबीएस इंटर कॉलेज के प्रवक्ता एचपी सिंह ने कहा कि छात्र-छात्राओं को विभिन्न पत्र-पत्रिकाएं पढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए। हिंदी को रुचिकर तरीके से पढ़ाने के लिए मुहावरों व लोकोक्तियों आदि का इस्तेमाल करना चाहिए। काव्यपाठ के लिए विद्यार्थी को प्रेरित करना चाहिए।
'हिंदी में कामकाज को बढ़ावा दें'
आरबीएस इंटर कॉलेज की प्रवक्ता डॉ. सुधा सिंह ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में हिंदी की अपेक्षा अंग्रेजी को प्राथमिकता दी जा रही है। अभिभावकों की भी मंशा होती है कि उनका बच्चा अंग्रेजी में बात करे। प्रत्येक क्षेत्र में हिंदी में कामकाज को बढ़ावा देना होगा। तभी विद्यार्थियों का रुझान बढ़ेगा।
'नई शिक्षा नीति से बदलेगी स्थिति'
मुफीद-ए-आम इंटर कॉलेज के शिक्षक अतुल यादव ने कहा कि नई शिक्षा नीति में विद्यार्थियों को प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में देने की व्यवस्था की गई है। इसके लागू होने पर परिस्थिति बदलेगी। अभी विद्यार्थी और अभिभावक दोनों अंग्रेजी के प्रति अधिक आकर्षित होते हैं। हिंदी भाषा को कम प्राथमिकता देते हैं।
'हिंदी हमें जड़ों से जोड़ती है '
श्रीमती जॉय हैरिस गर्ल्स इंटर कॉलेज की सहायक अध्यापिका सुशीला देवी तिवारी ने कहा कि हिंदी सिर्फ भाषा नहीं है, यह संस्कार भी है और संस्कृति भी। यह हमें जड़ों से जोड़ती है। बच्चे को कोई बात जितने अच्छे से मातृभाषा में समझ में आती है, उतनी किसी और भाषा में नहीं। हिंदी अपनी भाषा है, अपनों की भाषा है।
'अंग्रेजी में पढ़ाई पर जोर न दें'
एमडी जैन इंटर कॉलेज के सहायक अध्यापक संदीप परिहार ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा के दौरान विद्यार्थियों में हिंदी विषय के प्रति रुचि पैदा करनी चाहिए। अभिभावक बच्चों को हिंदी की अपेक्षा अंग्रेजी पढ़ाने पर जोर नहीं दें। नई शिक्षा नीति की व्यवस्था से हिंदी में रुझान बढ़ेगा।