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सब्जियों का राजा इस बार किसानों को देगा सारे जहां की खुशी
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टूंडला के गांव लतुर्रा में आलू की छटायी करते मजदूर
- फोटो : TUNDLA
टूंडला। आलू की अच्छी फसल को देखकर किसान काफी खुश हैं। उन्हें उम्मीद है कि इस बार उनके पिछले सालों में हो रहे नुकसान की भरपाई कर लेंगे। एक और जहां फसल अच्छी हुई है, दूसरी ओर फसल खोदाई के साथ ही अच्छी कीमत मिल रही हैं।
पिछले साल आलू की फसल से किसान बर्बाद हो गए थे। इसी के चलते कुछ किसानों ने इस बार आलू से मुंह मोड़ लिया या फिर कम क्षेत्रफल में आलू की बुआई की थी। इससे पिछले वर्ष की तुलना में आलू की खेती 20 प्रतिशत कम क्षेत्रफल में हुई है। लेकिन आलू अभी से ही करीब 500 रुपए प्रति पैकेट या 1000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से जा रहा है। इससे किसान खुश हैं।
बैंक और साहूकार का कर्जा कर देंगे अदा
टूंडला। आलू के छोटे किसान सालिगराम, चंदनसिंह, सुखिया आदि ने बताया कि पिछले वर्ष आलू की फसल ने बर्बाद कर दिया था। इस बार आलू की स्थिति ठीक दिख रही है। इससे लग रहा है कि वह इस बार बैंक से लेकर साहूकार तक का कर्जा अदा कर देंगे।
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क्षेत्र में कई नये कोल्ड स्टोरेज खुले हैं। इससे उन्हें उम्मीद है कि उनका आलू बाहर खेतों में पड़ा रहकर नहीं सड़ेगा। साथ ही इसकी कीमत भी अच्छी मिल जाएगी।
ब्रजवीर सिंह चौहान-आलू किसान
सरकार को आलू के निर्यात के विषय में अवश्य विचार करना चाहिए। इससे किसानों की काफी समस्या खत्म हो जाएगी।
संजीव सारस्वत-आलू किसान
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पिछले साल आलू की फसल से किसान बर्बाद हो गए थे। इसी के चलते कुछ किसानों ने इस बार आलू से मुंह मोड़ लिया या फिर कम क्षेत्रफल में आलू की बुआई की थी। इससे पिछले वर्ष की तुलना में आलू की खेती 20 प्रतिशत कम क्षेत्रफल में हुई है। लेकिन आलू अभी से ही करीब 500 रुपए प्रति पैकेट या 1000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से जा रहा है। इससे किसान खुश हैं।
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बैंक और साहूकार का कर्जा कर देंगे अदा
टूंडला। आलू के छोटे किसान सालिगराम, चंदनसिंह, सुखिया आदि ने बताया कि पिछले वर्ष आलू की फसल ने बर्बाद कर दिया था। इस बार आलू की स्थिति ठीक दिख रही है। इससे लग रहा है कि वह इस बार बैंक से लेकर साहूकार तक का कर्जा अदा कर देंगे।
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क्षेत्र में कई नये कोल्ड स्टोरेज खुले हैं। इससे उन्हें उम्मीद है कि उनका आलू बाहर खेतों में पड़ा रहकर नहीं सड़ेगा। साथ ही इसकी कीमत भी अच्छी मिल जाएगी।
ब्रजवीर सिंह चौहान-आलू किसान
सरकार को आलू के निर्यात के विषय में अवश्य विचार करना चाहिए। इससे किसानों की काफी समस्या खत्म हो जाएगी।
संजीव सारस्वत-आलू किसान