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UP: नकली दवा कारोबार में हाईटेक तरीका, AI से तैयार किए क्यूआर कोड; ब्रांडेड कंपनियों की बना दीं दवाएं
Tue, 26 May 2026 11:36 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Tue, 26 May 2026 11:36 AM IST
सार
आगरा में नकली दवा माफिया द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कर नामी कंपनियों की पैकेजिंग और क्यूआर कोड तैयार करने का बड़ा खुलासा हुआ है। औषधि विभाग की जांच में करीब 2 करोड़ रुपये की नकली, एक्सपायर्ड और संदिग्ध दवाएं बरामद की गई हैं और कई फर्मों की जांच जारी है।
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बरामद दवाएं
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
माफिया नकली दवाओं के अवैध कारोबार में हाइटेक और वैज्ञानिक तरीका अपना रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से कंपनी की पैकेजिंग, क्यूआर कोड और लैब में कंपोनेंट की जांच कर बाजार में नकली दवा खपाते हैं। औषधि विभाग को आरोपियों से पूछताछ में ये जानकारी मिली है।
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लखनऊ मुख्यालय की 30 औषधि निरीक्षकों की टीम ने तीन दिन तक 18 फर्म और दो गोदाम से करीब दो करोड़ रुपये की नकली, सैंपल, एक्सपायर्ड और सरकारी अस्पतालों की दवाएं बरामद की हैं। औषधि विभाग के अधिकारी ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि नामी कंपनियों के विभिन्न मर्ज की दवा का पैकेट खरीदते हैं। इसमें पैकेट पर प्रिंट सभी जानकारी, दवा का रंग, आकार समेत अन्य को एआई की मदद से दूसरा पैकेट तैयार करते हैं।
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असली दवा का निजी लैब में जांच कराकर उसके कंपोनेंट पता करते हैं। इसी के आधार पर नकली दवा में ये कंपोनेंट मिलाते हैं। इसकी निजी लैब में जांच कराते हैं, जिसमें ये पास हो जाती है। इससे नकली दवा को पकड़ना आसान नहीं होता। सहायक आयुक्त औषधि बृजेश यादव ने बताया कि छापे में नकली दवा बनाने के मामले में कई ऐसे साक्ष्य भी मिले हैं। रैकेट में जुड़े और लोगों की जांच चल रही है।
कंपनी की बिक्री प्रभावित होने पर करते रेकी
बाजार में नामी कंपनी के नाम से नकली दवा बाजार में खपाने के लिए माफिया कीमत में छूट देते हैं। इससे दुकानदार उसी फर्म से खरीद करता है। जब कंपनी की बिक्री प्रभावित होती है, तब वह विभाग में शिकायत कर रेकी करते हैं। इसके बाद छापा मारकर कार्रवाई होती है।
बाजार में नामी कंपनी के नाम से नकली दवा बाजार में खपाने के लिए माफिया कीमत में छूट देते हैं। इससे दुकानदार उसी फर्म से खरीद करता है। जब कंपनी की बिक्री प्रभावित होती है, तब वह विभाग में शिकायत कर रेकी करते हैं। इसके बाद छापा मारकर कार्रवाई होती है।
जब्त 71 करोड़ रुपये की दवाओं के पास हुए थे नमूने
बीते साल अगस्त में एसटीएफ और औषधि विभाग की टीम ने पांच गोदाम में छापा मारकर नामी कंपनियों के नाम की 71 करोड़ रुपये की दवाएं जब्त की थी। इसमें एंटीबायोटिक, पेट रोग, एलर्जी समेत कई तरह की दवाएं शामिल थी। ये दवाएं पुडुचेरी में बनवाई जाती थीं। 28 दवाओं के नमूने लिए थे। औषधि विभाग की लैब की जांच में 27 नमूने पास हो गए और एक दवा का नमूना अधोमानक पाया गया।
बीते साल अगस्त में एसटीएफ और औषधि विभाग की टीम ने पांच गोदाम में छापा मारकर नामी कंपनियों के नाम की 71 करोड़ रुपये की दवाएं जब्त की थी। इसमें एंटीबायोटिक, पेट रोग, एलर्जी समेत कई तरह की दवाएं शामिल थी। ये दवाएं पुडुचेरी में बनवाई जाती थीं। 28 दवाओं के नमूने लिए थे। औषधि विभाग की लैब की जांच में 27 नमूने पास हो गए और एक दवा का नमूना अधोमानक पाया गया।
18 मेडिकल स्टोरों को भी नोटिस, बिल किए तलब
औषधि विभाग की टीम ने 18 मेडिकल स्टोरों को भी नोटिस जारी किए हैं। इनके यहां से सरकारी, सैंपल और एक्सपायर्ड दवाएं जब्त हुई थीं। जांच के लिए 85 नमूने भी लिए गए थे। इन मेडिकल स्टोरों से बीते तीन महीने में दवाओं की खरीद-बिक्री के बिल तलब किए गए हैं। इससे पहले जब्त की गई सैंपल और एक्सपायर्ड दवाओं की जांच के लिए 30 कंपनियों को नोटिस जारी कर पोर्ट मांगी है। इसमें पूछा गया है कि ये दवाएं उनके यहां बनी हैं या नहीं।
औषधि विभाग की टीम ने 18 मेडिकल स्टोरों को भी नोटिस जारी किए हैं। इनके यहां से सरकारी, सैंपल और एक्सपायर्ड दवाएं जब्त हुई थीं। जांच के लिए 85 नमूने भी लिए गए थे। इन मेडिकल स्टोरों से बीते तीन महीने में दवाओं की खरीद-बिक्री के बिल तलब किए गए हैं। इससे पहले जब्त की गई सैंपल और एक्सपायर्ड दवाओं की जांच के लिए 30 कंपनियों को नोटिस जारी कर पोर्ट मांगी है। इसमें पूछा गया है कि ये दवाएं उनके यहां बनी हैं या नहीं।
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