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Ahoi Ashtami 2020: चार योग बनने के कारण अहोई अष्टमी का व्रत है फलदायी
Sun, 08 Nov 2020 10:19 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sun, 08 Nov 2020 10:19 AM IST
सार
निर्जला उपवास करके महिलाएं तारों को अर्घ्य देकर या चंद्रमा को अर्घ्य प्रदान करके व्रत खोलती हैं। निसंतान महिलाएं भी संतान प्राप्ति
के लिए इस व्रत को रखती हैं। इससे शुभ फल प्राप्त होता है।
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अहोई अष्टमी
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विस्तार
अहोई अष्टमी रविवार को मनाई जा रही है। सुबह 7.29 बजे के उपरांत पूरे दिन अष्टमी तिथि है। ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि अहोई अष्टमी का व्रत इस बार चार योगों में होने के कारण बहुत फलदायी है। इस दिन अहोई यानी अनहोनी को समाप्तकरने वाली वाली माता पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन महिलाएं उपवास रखकर साही माता एवं पार्वती से संतान के लिए आशीष मांगती हैं।
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि इस बार अष्टमी पर रवि पुष्प योग है, जोकि बच्चों के लिए नाम और यश की प्राप्ति देने वाला है। सर्वार्थ सिद्धि योग बच्चों को परीक्षा में सफलता दिलाएगा। शश योग होने के कारण समूह में नेतृत्व की क्षमता विकसित करने वाला होगा।
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पूजन का समय
पूजा का समय: 5.55 बजे से 7.57 बजे सायंकाल
व्रत का परायण
निर्जला उपवास करके महिलाएं तारों को अर्घ्य देकर या चंद्रमा को अर्घ्य प्रदान करके व्रत खोलती हैं। निसंतान महिलाएं भी संतान प्राप्ति के लिए इस व्रत को रखती हैं। इससे शुभ फल प्राप्त होता है। सिद्धि विनायक मंदिर के महंत पंडित ज्ञानेश शास्त्री ने बताया कि संतान की प्राप्ति, संतान की दीर्घायु और संतान को किसी भी अनिष्ट से बचाने के लिए महिलाएं अहोई माता यानी मां पार्वती का व्रत रखती हैं।
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ज्योतिषाचार्य ने बताया कि इस बार अष्टमी पर रवि पुष्प योग है, जोकि बच्चों के लिए नाम और यश की प्राप्ति देने वाला है। सर्वार्थ सिद्धि योग बच्चों को परीक्षा में सफलता दिलाएगा। शश योग होने के कारण समूह में नेतृत्व की क्षमता विकसित करने वाला होगा।
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पूजन का समय
पूजा का समय: 5.55 बजे से 7.57 बजे सायंकाल
व्रत का परायण
निर्जला उपवास करके महिलाएं तारों को अर्घ्य देकर या चंद्रमा को अर्घ्य प्रदान करके व्रत खोलती हैं। निसंतान महिलाएं भी संतान प्राप्ति के लिए इस व्रत को रखती हैं। इससे शुभ फल प्राप्त होता है। सिद्धि विनायक मंदिर के महंत पंडित ज्ञानेश शास्त्री ने बताया कि संतान की प्राप्ति, संतान की दीर्घायु और संतान को किसी भी अनिष्ट से बचाने के लिए महिलाएं अहोई माता यानी मां पार्वती का व्रत रखती हैं।