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Ahoi Ashtami 2023: अहोई अष्टमी आज, संतान की लंबी आयु के लिए इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा

Sun, 05 Nov 2023 08:52 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sun, 05 Nov 2023 08:52 AM IST
सार

अहोई अष्टमी का व्रत आज है। ये व्रत करवा चौथ के चार दिन बाद और दिवाली के सात दिन पहले मनाया जाता है। यह व्रत मां अपनी संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखती हैं। 
 

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Ahoi Ashtami 2023 Vrat Katha Vidhi And shubh muhurat
अहोई अष्टमी - फोटो : amar ujala

विस्तार

संतान की मंगल कामना के लिए रखा जाने वाला अहोई अष्टमी व्रत पांच नवंबर (रविवार) को है। कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन प्रदोषकाल में अहोई माता की पूजा की जाती है। सनातन धर्म मंदिर शहजादी मंडी के पुजारी पं. कृष्ण दत्त शास्त्री ने बताया कि अष्टमी तिथि चार नवंबर को रात 1:02 बजे से शुरू होकर पांच नवंबर को देर रात 3:21 बजे तक रहेगी। सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा करने वाली माताएं सूर्योदय के बाद पूजा कर व्रत संपन्न करेंगीं। इस दिन रवि पुष्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग भी बन रहा है।
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ऐसे करें पूजा
इस दिन सभी माताएं सूर्योदय से पहले जागें। दीवार पर अहोई माता का गेरू से चित्र बनाएं। चाहें तो बाजार में मिलने वाले चित्र का उपयोग भी कर सकती हैं। शाम के समय हाथ में गेहूं के सात दाने और कुछ दक्षिणा लेकर कथा पढ़ें या सुनें। माता के चित्र के सामने जल से भरा कलश रखें। रोली-अक्षत से तिलक करें। हलुआ पूड़ी का भोग लगाएं। रात को चंद्रमा निकलने पर तारों की छांव में अर्घ्य दें और बच्चों की मंगलकामना के लिए प्रार्थना करें।
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बेटा-बेटी दोनों के लिए शुभ है यह व्रत
पं. कृष्ण दत्त शास्त्री ने बताया आम धारणा है कि यह व्रत बेटों के लिए रखा जाता है, बेटियों की माताएं इस व्रत को नहीं करतीं। पर, आगरा में कई माताएं ऐसी हैं जो बेटी-बेटे में फर्क नहीं करतीं और बेटियों की मंगल कामना के लिए भी अहोई अष्टमी का व्रत रखती हैं। अमर उजाला ने ऐसी ही कुछ माताओं के विचार जाने...
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एक बेटी है, बेटे की ख्वाहिश नहीं
 कमला नगर निवासी रुचि अग्रवाल ने बताया कि आज के दौर में बेटा और बेटी का फर्क खत्म हो चुका है। मेरी एक ही बेटी है और मुझे बेटे की कोई ख्वाहिश भी नहीं है। मैं अपनी बेटी के लिए उसके जन्म से ही अहोई अष्टमी व्रत रख रही हूं।
 

व्रत संतान के लिए है
राजामंडी की रहने वाली विनी अग्रवाल ने बताया कि सिद्धी और वान्या दो बेटियां हैं। व्रत संतान के लिए है। हम उनके साथ भेदभाव कैसे कर सकते हैं। मेरी दोनों बेटियां ही मेरे बेटे हैं और मैं इनकी मंगल कामना और दीर्घायु के लिए व्रत रखती हूं।

व्रत नहीं करना कि वो बेटी है, गलत
कमला नगर निवासी रितु अग्रवाल गोयल ने बताया कि शादी के 17 सालों बाद मुझे ईश्वर ने संतान सुख दिया। शादी के बाद से ही मैं यह व्रत रख रही हूं। इतनी मन्नतों के बाद मुझे बेटी दी तो क्या व्रत सिर्फ इसीलिए नहीं करना कि वो एक बेटी है। यह गलत है। मेरी बेटी अभी पौने दो साल की है। मैं ईश्वर से प्रार्थना करूंगी कि वो स्वस्थ और दीर्घायु हो।
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