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कासगंज: कृषि कानूनों की वापसी का एलान, 'किसानों की बड़ी जीत', किसान नेता, राजनेता और किसान बोले देश हित में है निर्णय
Fri, 19 Nov 2021 01:16 PM IST
Abhishek Saxena
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 19 Nov 2021 01:16 PM IST
सार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देश को संबोधित किया और तीनों कृषि कानून वापस लेने की घोषणा की। इसके बाद किसान नेताओं और किसानों अलग-अलग प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं।
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कासगंज में किसानों ने किया प्रदर्शन (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीनों कृषि कानूनों की वापसी का एलान करने से किसान नेता, किसानों और राजनेताओं के अलग-अलग विचार हैं। किसानों और किसान नेताओं ने इस निर्णय को सराहा है। नेताओं ने इसे किसानों की बड़ी जीत बताई है। किसानों ने प्रधानमंत्री को कृषि प्रधान देश का सच्चा सेवक बताया है।
किसान नेताओं की बात
कृषि कानून किसान विरोधी कानून है। इसीलिए इनको वापस करने के लिए आंदोलन किया जा रहा था। प्रधानमंत्री ने कृषि कानून वापस करने का ऐलान किया है। यह निर्णय सराहनीय है। प्रधानमंत्री को यह निर्णय पहले ही लेना चाहिए था। कुलदीप पांडे, राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन स्वराज
हमारा देश कृषि प्रधान देश है और कृषि प्रधान देश के प्रधानमंत्री ने भले ही देर से निर्णय लिया, लेकिन सही निर्णय लिया है, क्योंकि कृषि कानून किसी भी हाल में किसानों के हित में नहीं थे। प्रधानमंत्री का आभार है। श्यामवीर सिंह, राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव भारतीय किसान यूनियन स्वराज
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किसानों की बात
कृषि कानून से क्या फायदे और क्या नुकसान होने थे। इसकी विस्तृत जानकारी नहीं है, लेकिन इतना पता है कि जिस प्रकार आंदोलन चल रहा था। उससे लग रहा था कि कानून किसानों के हित में नहीं है। इससे किसानों का नुकसान होगा। प्रधानमंत्री ने आंदोलनकारियों की मांग पूरी करके किसानों को सम्मान दिया है। राकेश कुमार, किसान
किसान दिन रात खेतों में मेहनत करता है। देश को समृद्ध बनाने में किसान की मुख्य भूमिका है। कृषि कानून किसानों को नुकसान पहुंचाने वाले कानून दिखाई दे रहे थे। इसीलिए इनका विरोध चल रहा था। अब यह कानून वापस होने पर विरोध थम जाएगा। निर्णय सराहनीय है। सत्यप्रकाश सिंह, किसान
पहले भी सही था निर्णय और अब भी सही है निर्णय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि प्रधान देश के किसानों के हित में कृषि कानूनों को लागू किया था। इन कानूनों से किसानों को फायदा होना था, लेकिन किसानों ने विरोध किया तो किसानों की भावनाओं की प्रधानमंत्री ने कद्र की और उनकी मांग को पूरा करते हुए कानून रद्द करने का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री सदैव ही किसानों के हित में निर्णय लेते हैं। भाजपा कभी भी किसी भी वर्ग के साथ द्वेष भावना नहीं करती है। केपी सिंह सोलंकी, जिलाध्यक्ष भाजपा
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किसान नेताओं की बात
कृषि कानून किसान विरोधी कानून है। इसीलिए इनको वापस करने के लिए आंदोलन किया जा रहा था। प्रधानमंत्री ने कृषि कानून वापस करने का ऐलान किया है। यह निर्णय सराहनीय है। प्रधानमंत्री को यह निर्णय पहले ही लेना चाहिए था। कुलदीप पांडे, राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन स्वराज
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हमारा देश कृषि प्रधान देश है और कृषि प्रधान देश के प्रधानमंत्री ने भले ही देर से निर्णय लिया, लेकिन सही निर्णय लिया है, क्योंकि कृषि कानून किसी भी हाल में किसानों के हित में नहीं थे। प्रधानमंत्री का आभार है। श्यामवीर सिंह, राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव भारतीय किसान यूनियन स्वराज
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किसानों की बात
कृषि कानून से क्या फायदे और क्या नुकसान होने थे। इसकी विस्तृत जानकारी नहीं है, लेकिन इतना पता है कि जिस प्रकार आंदोलन चल रहा था। उससे लग रहा था कि कानून किसानों के हित में नहीं है। इससे किसानों का नुकसान होगा। प्रधानमंत्री ने आंदोलनकारियों की मांग पूरी करके किसानों को सम्मान दिया है। राकेश कुमार, किसान
किसान दिन रात खेतों में मेहनत करता है। देश को समृद्ध बनाने में किसान की मुख्य भूमिका है। कृषि कानून किसानों को नुकसान पहुंचाने वाले कानून दिखाई दे रहे थे। इसीलिए इनका विरोध चल रहा था। अब यह कानून वापस होने पर विरोध थम जाएगा। निर्णय सराहनीय है। सत्यप्रकाश सिंह, किसान
पहले भी सही था निर्णय और अब भी सही है निर्णय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि प्रधान देश के किसानों के हित में कृषि कानूनों को लागू किया था। इन कानूनों से किसानों को फायदा होना था, लेकिन किसानों ने विरोध किया तो किसानों की भावनाओं की प्रधानमंत्री ने कद्र की और उनकी मांग को पूरा करते हुए कानून रद्द करने का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री सदैव ही किसानों के हित में निर्णय लेते हैं। भाजपा कभी भी किसी भी वर्ग के साथ द्वेष भावना नहीं करती है। केपी सिंह सोलंकी, जिलाध्यक्ष भाजपा