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पित्त की थैली का इलाज भी बनेगा आगरा की पहचान

Sun, 03 Apr 2016 02:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Updated Sun, 03 Apr 2016 02:51 AM IST
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Agra will identify for treatment of gall bladder
पित्त की थैली का इलाज भी बनेगा आगरा की पहचान - फोटो : अमर उजाला
आगरा का नाम सुनते ही जहन में ताजमहल और पेठा आते हैं। निकट भविष्य में इसकी पहचान पित्त की थैली के आपरेशन के लिए भी होगी। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) आगरा को मेडिकल टूरिज्म सिटी के तौर पर विकसित करेगा। शनिवार को होटल क्लार्क्स शिराज में आईएमए की सेंट्रल वर्किंग कमेटी की मीटिंग में इस प्रस्ताव पर मुहर लगी। यहां दो दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन 215वीं मीटिंग में देशभर से 400 सदस्य शामिल हुए। 
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टूरिज्म सिटी के लिए एप और वेबसाइट विकसित की जाएगी। इसमें दूरबीन विधि से पित्त की थैली के आपरेशन में माहिर विख्यात चिकित्सकों के नाम और हास्पिटल का जिक्र होगा। खास बात, इसमें आपरेशन में खर्च होने वाले पैकेज निश्चित होगा, इसमें दर्ज कीमत के  अतिरिक्त एक रुपया भी मरीज से नहीं वसूला जाएगा। इसमें एतिहासिक इमारतों के देखने के लिए भी अतिरिक्त पैकेज का उल्लेख होगा। आईएमए के सचिव डा. केके अग्रवाल ने बताया कि प्रदेश सरकार से वार्ता हुई है। टूरिज्म डिपार्टमेंट समेत अन्य वेबसाइटों पर भी इसका उल्लेख किया जाएगा। आईएमए अध्यक्ष डा. एसएस अग्रवाल ने कहा कि आगरा में पित्त की थैली के कई विश्वविख्यात चिकित्सक हैं। इससे शहर की मेडिकल टूरिज्म के तौर पर पहचान बनेगी। कार्यक्रम में डा. शरद अग्रवाल, डा. सुधीर ढाकरे, डा. जेएन टंडन, डा. सुनील शर्मा, डा. आमोद शंकर, डा. निर्मल चोपड़ा, डा. आलोक मित्तल आदि उपस्थित रहे। 
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आइएमए हर प्रदेश में बनाएगा मेडिकल कालेज
आईएमए की। गरीबों को बेहद रियायती दर पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए हर प्रदेश में मेडिकल कालेज स्थापित करने की योजना है। उत्तर प्रदेश में इसके लिए मुख्यमंत्री से वार्ता हो चुकी है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वर्ल्ड मेडिकल काउंसिल के अध्यक्ष डा. केतन देसाई ने इसकी जानकारी दी। बताया कि गांवों तक इलाज पहुंचाना अभी भी चुनौती है। प्रदेश की आबादी 22 करोड़ के करीब है। यहां चिकित्सा के लिहाज से 43 मेडिकल कालेज होने चाहिए, लेकिन आधे से भी कम हैं। मेडिकल कालेज स्थापित करने के लिए सरकारों से मदद ली जाएगी।
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ब्लड बैंक और डिस्पेंसरी भी
यूपी आईएमए प्रेसीडेंट डा. एपी सिंह ने बताया कि पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप माडल पर ब्लडबैंक चलाने का प्रस्ताव है। इसमें सरकार की ओर से तय कीमत पर गरीब मरीजों को रक्त, प्लाज्मा, जंबो पैक उपलब्ध कराया जाएगा। बरेली, इलाहाबाद में इसकी शुरूआत हो चुकी है। इसके अलावा दूरस्थ क्षेत्रों में भी पीपीपी माडल से डिस्पेंसरी भी चलाई जाएगी। 


डाक्टरों की ये रही समस्याएं
वर्किंग कमेटी ने पीसीपीएनडीटी एक्ट और हर साल हास्पिटल-क्लीनिक का रजिस्ट्रेशन के नाम पर शोषण रोकने, हास्पिटल के रजिस्ट्रेशन के लिए 17 मानकों को पूरा करने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम की व्यवस्था, हास्पिटल में तोड़फोड़ और डाक्टरों से मारपीट पर बने कानून का सख्ती से पालन करने की मांगों को पूरा करने के लिए शासन को सिफारिश भेजी जाएगी। सदस्यता बढ़ाने और लीगल मुद्दों पर अब तक हुई प्रगति पर भी प्रकाश डाला गया।
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