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आगरा विविः फर्जी मार्कशीट प्रकरण के मास्टरमाइंड पर बड़ी कार्रवाई
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
Updated Wed, 27 Dec 2017 08:33 AM IST
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आगरा विवि
- फोटो : अमर उजाला
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डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय शिक्षणेतर कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष हरीश कसाना को निलंबित कर दिया है। वह बिना कारण बताए चार वर्ष से गायब है। फर्जी मार्कशीट प्रकरण में कसाना के गैर जमानती वारंट जारी किए गए हैं। वह फरार चल रहा है।
हरीश कसाना विश्वविद्यालय के खंदारी परिसर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ बेसिक साइंस के भौतिक विज्ञान विभाग में तैनात हैं। वह 2013 से अनुपस्थित चल रहा हैं। एसआईटी (विशेष जांच दल) की ओर से फर्जी मार्कशीट प्रकरण में दोषी ठहराए जाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने हरीश की ओर ध्यान दिया।
एसआईटी ने पिछले हफ्ते ही गैर जमानती वारंट जारी किए। वारंट तामील कराने के लिए एसएसपी के पास भेजे हैं। विश्वविद्यालय के कुलसचिव आरपी सिंह का कहना है कि हरीश कसाना चार वर्ष से बिना कारण बताए अनुपस्थित चल रहा था।
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कुलपति डा. अरविंद कुमार दीक्षित के आदेश पर निलंबन की कार्रवाई की गई है। कार्रवाई पहले ही होनी चाहिए थी। अनुपस्थिति रजिस्टर मेंटेन न होने से वह अभी तक बचा रहा। अब बायोमेट्रिक हाजिरी की व्यवस्था की गई है। इससे कर्मचारी पकड़ में आया है।
फर्जी मार्कशीट प्रकरण में चार कर्मचारी पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इनमें स्वामी शरण, सतेंद्र पाल सिंह, लक्ष्मण सिंह और साकेत प्रसाद हैं। फर्जी मार्कशीट से यूपी, राजस्थान और मध्य प्रदेश में कई लोगों ने नौकरी पा ली थी, इन्हें 28 अक्तूबर को ही निलंबित किया जा चुका है।
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हरीश कसाना विश्वविद्यालय के खंदारी परिसर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ बेसिक साइंस के भौतिक विज्ञान विभाग में तैनात हैं। वह 2013 से अनुपस्थित चल रहा हैं। एसआईटी (विशेष जांच दल) की ओर से फर्जी मार्कशीट प्रकरण में दोषी ठहराए जाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने हरीश की ओर ध्यान दिया।
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एसआईटी ने पिछले हफ्ते ही गैर जमानती वारंट जारी किए। वारंट तामील कराने के लिए एसएसपी के पास भेजे हैं। विश्वविद्यालय के कुलसचिव आरपी सिंह का कहना है कि हरीश कसाना चार वर्ष से बिना कारण बताए अनुपस्थित चल रहा था।
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कुलपति डा. अरविंद कुमार दीक्षित के आदेश पर निलंबन की कार्रवाई की गई है। कार्रवाई पहले ही होनी चाहिए थी। अनुपस्थिति रजिस्टर मेंटेन न होने से वह अभी तक बचा रहा। अब बायोमेट्रिक हाजिरी की व्यवस्था की गई है। इससे कर्मचारी पकड़ में आया है।
फर्जी मार्कशीट प्रकरण में चार कर्मचारी पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इनमें स्वामी शरण, सतेंद्र पाल सिंह, लक्ष्मण सिंह और साकेत प्रसाद हैं। फर्जी मार्कशीट से यूपी, राजस्थान और मध्य प्रदेश में कई लोगों ने नौकरी पा ली थी, इन्हें 28 अक्तूबर को ही निलंबित किया जा चुका है।