सादिक खां का मकबराः आगरा का ऐसा स्मारक, जहां एक ही परिसर में दफन हैं पिता-पुत्र
सादिक खां का मकबरा सिकंदरा स्मारक से दो किमी दूरी पर आगरा-दिल्ली हाईवे किनारे स्थित है। प्रचार के अभाव में यहां बहुत ही कम पर्यटक पहुंचते हैं।
विस्तार
ताजनगरी में आगरा-दिल्ली हाईवे पर मुगल दरबारी सादिक खां का मकबरा बना है। 1633 से 1635 के बीच दो साल में सादिक खां के बेटे सलावत खां ने पिता का मकबरा बनवाया। पिता के मकबरे के पास ही सलावत खां का मकबरा है, जो 64 खंभा के नाम से चर्चित है।
यह पहला ऐसा मकबरा है, जहां एक ही परिसर में पिता-पुत्र दफन हैं। सादिक खां का मकबरा अपने आप में अनूठा है और सफेद गुंबद के साथ अष्ठकोणीय है। इसके ठीक सामने ही सलावत खां का मकबरा है।
एक सीध में है पिता-पुत्र की कब्रें
खास पहलू ये है कि पिता-पुत्र की कब्रें एक सीध में हैं। सादिक खां एत्माद्दौला की पदवी वाले मिर्जा ग्यास बेग के भतीजे थे जो मुगल बादशाह जहांगीर और शाहजहां के दरबार में भी रहे। जहांगीर ने मीर बख्शी के रूप में उन्हें 1622 में नियुक्त किया और उसके बाद 1623 में पंजाब का गवर्नर नियुक्त कर दिया।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पास मौजूद जानकारी के मुताबिक जहांगीर के बाद शाहजहां ने सादिक खां को 4000 जात का मनसब और 4000 सवार का मनसब प्रदान किया। 3 सितंबर 1633 को सादिक खां के निधन के बाद बेटे सलावत खां ने उनका गैलाना में मकबरा बनवाया।
सिकंदरा स्मारक से दो किमी की दूरी पर है
यह सिकंदरा स्मारक से दो किमी की दूरी पर है। दो साल पहले सादिक खां और सलावत खां मकबरे का संरक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने कराया है। दोनों स्मारक अपनी अलग-अलग अनूठी वास्तु और निर्माण शैली के बने हैं।