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यहां विजयदशमी पर हुई रावण की पूजा, हवन कर आरती उतारी, पुतला दहन का विरोध
Sun, 25 Oct 2020 04:59 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sun, 25 Oct 2020 04:59 PM IST
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रावण स्वरूप की पूजा करते लोग
- फोटो : अमर उजाला
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विजयदशमी पर जगह-जगह रावण का पुतला दहन किया जाएगा, लेकिन आगरा में दशानन की पूजा की गई। लंकापति दशानन रावण महाराज पूजा आयोजन समिति ने रविवार को भगवान महादेव और रावण की पूजा अर्चना हवन कर आरती की। इस दौरान समिति के लोगों ने रावण के पुतला दहन का विरोध किया।
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सिकंदरा के रामलाल वृद्ध आश्रम का बद्धेश्वर महादेव शिव मंदिर में भगवान महादेव की पूजा अर्चना की गई। साथ ही लंकेश के स्वरूप महाराज दशानन की आरती हुई। लंकापति दशानन रावण महाराज पूजा समिति के सदस्य डॉ. मदन मोहन शर्मा ने बताया कि भगवान राम ने रामेश्वरम में स्वयं रावण से पूजा कराई थी।
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रावण का पुतला दहन राम का अपमान
उन्होंने कहा कि ऐसे प्रकांड विद्वान रावण का प्रतिवर्ष पुतला दहन भगवान राम का अपमान है। चूंकि भगवान राम ने लंकेश को अपना आचार्य माना था। भगवान के आचार्य का प्रतिवर्ष पुतला दहन एक कुरीति है, जिससे वातावरण प्रदूषित होता है। आने वाली नई पीढ़ी को गलत संदेश मिलता है। हिन्दू संस्कृति में एक व्यक्ति का अंतिम संस्कार एक बार ही होता है और उसका बार-बार पुतला दहन करना एक अपमान है।
'पुतला दहन की कुप्रथा पर रोक लगे'
महंत गौरव गिरी शिवप्रसाद शर्मा ने कहा कि रावण की शक्ति और उनके पराक्रम से हमें सीख लेनी चाहिए। भगवान राम का भक्त होने के नाते रावण का अपमान नहीं करना चाहिए। दशहरा पर राम और रावण का मंच पर युद्ध हो और हिन्दू संस्कृति को बढ़ाने के लिए इसका प्रचार प्रसार हो, लेकिन पुतला दहन की कुप्रथा पर रोक लगनी चाहिए।
उधर, श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में भी दशानन रावण की पूजा की गई। यमुना पुल के समीप लंकेश भक्त मंडल द्वारा आयोजित लंकेश पूजन के दौरान दशानन स्वरूप रावण ने शिवजी की पूजा की। इसके बाद लंकेश भक्त मंडल के पदाधिकारी और सदस्यों ने लंकापति रावण की आरती उतारी। इस दौरान रावण के पुतला दहन का विरोध किया गया।
महंत गौरव गिरी शिवप्रसाद शर्मा ने कहा कि रावण की शक्ति और उनके पराक्रम से हमें सीख लेनी चाहिए। भगवान राम का भक्त होने के नाते रावण का अपमान नहीं करना चाहिए। दशहरा पर राम और रावण का मंच पर युद्ध हो और हिन्दू संस्कृति को बढ़ाने के लिए इसका प्रचार प्रसार हो, लेकिन पुतला दहन की कुप्रथा पर रोक लगनी चाहिए।
उधर, श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में भी दशानन रावण की पूजा की गई। यमुना पुल के समीप लंकेश भक्त मंडल द्वारा आयोजित लंकेश पूजन के दौरान दशानन स्वरूप रावण ने शिवजी की पूजा की। इसके बाद लंकेश भक्त मंडल के पदाधिकारी और सदस्यों ने लंकापति रावण की आरती उतारी। इस दौरान रावण के पुतला दहन का विरोध किया गया।