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Agra News: देव दिवाली पर जगमगाए बटेश्वर के मंदिर और घाट
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देव दिवाली: बटेश्वर के घाट पर यमुना स्नान और दीपदान को उमड़े श्रद्धालु
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बाह। भगवान शिव की ओर से त्रिपुरासुर पर विजय की स्मृति में कार्तिक पूर्णिमा पर बुधवार को बटेश्वर में देव दिवाली मनाई गई। देव दिवाली पर शिव मंदिर शृंखला रोशनी से जगमगा उठी। मंदिर के पुजारी जय प्रकाश गोस्वामी ने बताया कि ब्रह्मलाल जी मंदिर में दीपदान किया गया।
मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा पर देवताओं ने धरती पर उतर कर गंगा, यमुना आदि नदियों में स्नान कर भगवान शिव की आराधना की थी। इसी मान्यता के चलते त्रिपुरोत्सव पर बुधवार की रात बटेश्वर के घाट पर यमुना स्नान करने और दीपदान करने के लिए श्रद्धालुओं का जमघट लगा रहा, ब्रह्मलाल महाराज की जयघोष से मंदिर क्षेत्र गूंज उठा। बटेश्वर के घाट से लेकर मंदिर तक जलते दीयों की रोशनी से ओउम और स्वास्तिक की आकृति बना कर भगवान भोलेनाथ की उपासना की गई। ज्योतिषाचार्य शिवशरण पाराशर ने बताया कि देव दिवाली पर देवताओं को प्रसन्न करने, घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचरण करने और परिवार में अन्न धन की कमी न होने की भोलेनाथ से प्रार्थना के लिए दीपदान किया गया।
बटेश्वर के घाट और गोकुलनाथ मंदिर में तुलसी का किया पूजन
बाह। बटेश्वर के घाट पर ''''गैल के बटोही जागे गोदी जागे ललना, संग की सखियां चाली हम हूं चाली जमना'''' गीत गाते हुए कार्तिक स्नान करने वाली महिलाएं और युवतियां समूह में पहुंची। यमुना नदी में स्नान किया। घाट और गोकुलनाथ मंदिर में तुलसी का पूजन किया। महिलाओं रीमा, गविता, सलौनी, अर्चना, ममता, रेखा ने बताया कि महिलाएं अपने एवं परिवार की सुख-समृद्धि के लिए और युवतियां योग्य वर की मन्नत के लिए कार्तिक महीने का स्नान अनुष्ठान करती हैं। तुलसी पूजन के बाद शिव पार्वती को पूजा। घाट पर ब्रज के गीत गाते हुए पहुंची जरार की प्रियंका, उर्मिला, ज्योती, जान्हवी, बाह की संगीता, खुशबू, रीना आदि ने बताया कि कार्तिक स्नान करने वाली महिलाओं और युवतियों ने सोमवार को शिव पार्वती की पूजा और परिक्रमा की है। कार्तिक पूर्णिमा स्नान के साथ महीने भर के स्नान, अनुष्ठान का समापन हो गया।
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मूर्ति विसर्जन हादसे का सबक... रात भर यमुना में डेरा डाले रहे अधिकारी
बटेश्वर में नहीं चलने दी नावें
बाह। खेरागढ़ के कुसियापुर गांव में 2 अक्तूबर को मूर्ति विसर्जन के दौरान हुए हादसे में 13 युवक डूबे थे, जिनमें से एक को बचाया था, 12 शव बरामद हुए थे। मूर्ति विसर्जन हादसे को डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी ने एक सबक के तौर पर लिया। बैकुंठ चतुर्दशी पर पहुंच कर उन्होंने घाट पर यमुना नदी में बैरीकेडिंग कराई, एसडीआरएफ की टीम लगाई, प्रशासन को रात भर अलर्ट मोड पर रखा। बाह के एसडीएम संतोष कुमार शुक्ला, तहसीलदार संपूर्ण कुलश्रेष्ठ, नायब तहसीलदार सुधीर गिरी रात में एसडीआरएफ की टीम के साथ आपात स्थिति से निपटने को यमुना नदी में नाव पर बैठे रहे। इतना ही नहीं घाट पर मंगलवार रात और बुधवार को दिन में नाव और मोटरबोट नहीं चलने दी। सुरक्षा मानक को धता बताकर चलने वाली मोटरबोट पर अंकुश लगने से श्रद्धालुओं को घाटों पर स्नान में सहूलियत हुई। महिलाओं के लिए घाटों पर परदे में कपड़े बदलने की व्यवस्था की गई थी। बुधवार को पहले डीसीपी पूर्वी अभिषेक कुमार अग्रवाल, एसीपी गिरीश कुमार के साथ घाटों पर पहुंचे। श्रद्धालुओं का स्नान पर्व को लेकर फीडबैक लिया। अपने मातहतों को अलर्ट रहने की हिदायत दी। इसके बाद डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी पहुंचे। घाट और मेला में बेहतर प्रबंधन के लिए स्थानीय प्रशासन को शाबासी तो दी, अलर्ट रहने के निर्देश भी दिए। एडीएम वित्त शुभांगी शुक्ला भी बटेश्वर में डेरा डाले रहीं।
महाभारत कालीन शौरीपुर में मेला आज
श्रीकृष्ण के चचेरे भाई भगवान नेमिनाथ की जन्मभूमि है शौरीपुर, निकलेगी रथयात्रा
बाह। महाभारत कालीन नगरी शौरीपुर श्रीकृष्ण के चचेरे भाई भगवान नेमिनाथ की जन्म कल्याणक भूमि है। यहां पर बृहस्पतिवार को मेले का आयोजन होगा। शौरीपुर से बटेश्वर तक भगवान नेमिनाथ की रथयात्रा निकलेगी। जैन सिद्ध क्षेत्र तीर्थ कमेटी के उपमंत्री विनोद जैन ने बताया कि बटेश्वर से तीन किमी दूर यमुना के बीहड़ में सूरसेन ने महाभारत कालीन नगर शौरीपुर बसाया था। उनके बेटे अंधक वृष्णि के पुत्र समुद्र विजय थे। समुद्र विजय की रानी शिवा के गर्भ से श्रावण सुदी छठ को 22 वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ का जन्म हुआ। समुद्र विजय के भाई बसुदेव के बेटे श्रीकृष्ण थे। जूनागढ़ के राजा उग्रसैन की बेटी से भगवान नेमिनाथ का विवाह तय हुआ था। विवाह को जाते समय मूक पशुओं के करुण रुदन से दुखी होकर भगवान नेमीनाथ कंकन बंधन तोड़ दिए और गिरनार पर्वत पर दीक्षा ग्रहण की। मेला आयोजन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
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मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा पर देवताओं ने धरती पर उतर कर गंगा, यमुना आदि नदियों में स्नान कर भगवान शिव की आराधना की थी। इसी मान्यता के चलते त्रिपुरोत्सव पर बुधवार की रात बटेश्वर के घाट पर यमुना स्नान करने और दीपदान करने के लिए श्रद्धालुओं का जमघट लगा रहा, ब्रह्मलाल महाराज की जयघोष से मंदिर क्षेत्र गूंज उठा। बटेश्वर के घाट से लेकर मंदिर तक जलते दीयों की रोशनी से ओउम और स्वास्तिक की आकृति बना कर भगवान भोलेनाथ की उपासना की गई। ज्योतिषाचार्य शिवशरण पाराशर ने बताया कि देव दिवाली पर देवताओं को प्रसन्न करने, घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचरण करने और परिवार में अन्न धन की कमी न होने की भोलेनाथ से प्रार्थना के लिए दीपदान किया गया।
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बटेश्वर के घाट और गोकुलनाथ मंदिर में तुलसी का किया पूजन
बाह। बटेश्वर के घाट पर ''''गैल के बटोही जागे गोदी जागे ललना, संग की सखियां चाली हम हूं चाली जमना'''' गीत गाते हुए कार्तिक स्नान करने वाली महिलाएं और युवतियां समूह में पहुंची। यमुना नदी में स्नान किया। घाट और गोकुलनाथ मंदिर में तुलसी का पूजन किया। महिलाओं रीमा, गविता, सलौनी, अर्चना, ममता, रेखा ने बताया कि महिलाएं अपने एवं परिवार की सुख-समृद्धि के लिए और युवतियां योग्य वर की मन्नत के लिए कार्तिक महीने का स्नान अनुष्ठान करती हैं। तुलसी पूजन के बाद शिव पार्वती को पूजा। घाट पर ब्रज के गीत गाते हुए पहुंची जरार की प्रियंका, उर्मिला, ज्योती, जान्हवी, बाह की संगीता, खुशबू, रीना आदि ने बताया कि कार्तिक स्नान करने वाली महिलाओं और युवतियों ने सोमवार को शिव पार्वती की पूजा और परिक्रमा की है। कार्तिक पूर्णिमा स्नान के साथ महीने भर के स्नान, अनुष्ठान का समापन हो गया।
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मूर्ति विसर्जन हादसे का सबक... रात भर यमुना में डेरा डाले रहे अधिकारी
बटेश्वर में नहीं चलने दी नावें
बाह। खेरागढ़ के कुसियापुर गांव में 2 अक्तूबर को मूर्ति विसर्जन के दौरान हुए हादसे में 13 युवक डूबे थे, जिनमें से एक को बचाया था, 12 शव बरामद हुए थे। मूर्ति विसर्जन हादसे को डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी ने एक सबक के तौर पर लिया। बैकुंठ चतुर्दशी पर पहुंच कर उन्होंने घाट पर यमुना नदी में बैरीकेडिंग कराई, एसडीआरएफ की टीम लगाई, प्रशासन को रात भर अलर्ट मोड पर रखा। बाह के एसडीएम संतोष कुमार शुक्ला, तहसीलदार संपूर्ण कुलश्रेष्ठ, नायब तहसीलदार सुधीर गिरी रात में एसडीआरएफ की टीम के साथ आपात स्थिति से निपटने को यमुना नदी में नाव पर बैठे रहे। इतना ही नहीं घाट पर मंगलवार रात और बुधवार को दिन में नाव और मोटरबोट नहीं चलने दी। सुरक्षा मानक को धता बताकर चलने वाली मोटरबोट पर अंकुश लगने से श्रद्धालुओं को घाटों पर स्नान में सहूलियत हुई। महिलाओं के लिए घाटों पर परदे में कपड़े बदलने की व्यवस्था की गई थी। बुधवार को पहले डीसीपी पूर्वी अभिषेक कुमार अग्रवाल, एसीपी गिरीश कुमार के साथ घाटों पर पहुंचे। श्रद्धालुओं का स्नान पर्व को लेकर फीडबैक लिया। अपने मातहतों को अलर्ट रहने की हिदायत दी। इसके बाद डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी पहुंचे। घाट और मेला में बेहतर प्रबंधन के लिए स्थानीय प्रशासन को शाबासी तो दी, अलर्ट रहने के निर्देश भी दिए। एडीएम वित्त शुभांगी शुक्ला भी बटेश्वर में डेरा डाले रहीं।
महाभारत कालीन शौरीपुर में मेला आज
श्रीकृष्ण के चचेरे भाई भगवान नेमिनाथ की जन्मभूमि है शौरीपुर, निकलेगी रथयात्रा
बाह। महाभारत कालीन नगरी शौरीपुर श्रीकृष्ण के चचेरे भाई भगवान नेमिनाथ की जन्म कल्याणक भूमि है। यहां पर बृहस्पतिवार को मेले का आयोजन होगा। शौरीपुर से बटेश्वर तक भगवान नेमिनाथ की रथयात्रा निकलेगी। जैन सिद्ध क्षेत्र तीर्थ कमेटी के उपमंत्री विनोद जैन ने बताया कि बटेश्वर से तीन किमी दूर यमुना के बीहड़ में सूरसेन ने महाभारत कालीन नगर शौरीपुर बसाया था। उनके बेटे अंधक वृष्णि के पुत्र समुद्र विजय थे। समुद्र विजय की रानी शिवा के गर्भ से श्रावण सुदी छठ को 22 वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ का जन्म हुआ। समुद्र विजय के भाई बसुदेव के बेटे श्रीकृष्ण थे। जूनागढ़ के राजा उग्रसैन की बेटी से भगवान नेमिनाथ का विवाह तय हुआ था। विवाह को जाते समय मूक पशुओं के करुण रुदन से दुखी होकर भगवान नेमीनाथ कंकन बंधन तोड़ दिए और गिरनार पर्वत पर दीक्षा ग्रहण की। मेला आयोजन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।