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आगरा: कीठम झील में अचानक मरने लगीं मछलियां, ये बताई जा रही वजह
Sat, 03 Feb 2024 01:22 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 03 Feb 2024 01:22 PM IST
सार
कीठम झील में मछलियों पर आफत टूट पड़ी है। सैकड़ों की संख्या में मछलियां मरी पाई गईं, जिसकेक बाद वन विभाग ने प्रकरण में सिंचाई विभाग और प्रदूषण नियंत्रण विभाग को पत्र लिखा है।
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कीठम झील
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
वर्ल्ड वेटलैंड डे पर शहर के एकमात्र वेटलैंड (आर्द्रभूमि क्षेत्र) सूर सरोवर पक्षी अभ्यारण्य कीठम में सैकड़ों मछलियां मरी पाई गईं। इसकी वजह प्रदूषण को माना जा रहा है। वन विभाग ने प्रकरण में सिंचाई विभाग और प्रदूषण नियंत्रण विभाग को पत्र लिखा है।
कीठम झील में आगरा नहर और लोअर कैनाल की ओर सिंचाई विभाग ने सेल्यूस गेट लगा रखे हैं। ये गेट कीठम झील में पानी का स्तर स्थिर रखने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। कीठम में पक्षियों की रिहाइश के लिए 18 फुट पानी का स्तर निर्धारित है। इससे अधिक पानी होने पर ये टापू डूब जाते हैं। बीते दिनों नहर की ओर वाले गेट टूट गए, पानी का स्तर बरकरार रखने के लिए सिंचाई विभाग ने बोरे डालकर कामचलाऊ इंतजाम कर दिया। जिसके चलते प्रदूषित पानी लगातार कीठम में आ रहा है।
विभाग ने इसकी लिखित सूचना सिंचाई विभाग को दी लेकिन अब तक कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए। नतीजा शुक्रवार को मछलियों के मरने के रूप में सामने आया। यमुना का प्रदूषित पानी आने से झील के पानी में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया। जिससे सैकड़ों मछलियां मर गईं। शुक्रवार को मछलियों की मौत के बाद विभागीय वार्डन और रेंजर लगातार नजर बनाए हैं।
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उप वन संरक्षण राष्ट्रीय चंबल सेंक्चुअरी प्रोजेक्ट आरुषि मिश्रा ने बताया कि वन विभाग को फिर से लिखित और मौखिक दोनों रूप से सूचित किया जा चुका है। प्रदूषण नियंत्रण कार्यालय को भी इसकी सूचना दे दी गई है। विभाग अपने स्तर से सभी संभव प्रयास कर रहा है।
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कीठम झील में आगरा नहर और लोअर कैनाल की ओर सिंचाई विभाग ने सेल्यूस गेट लगा रखे हैं। ये गेट कीठम झील में पानी का स्तर स्थिर रखने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। कीठम में पक्षियों की रिहाइश के लिए 18 फुट पानी का स्तर निर्धारित है। इससे अधिक पानी होने पर ये टापू डूब जाते हैं। बीते दिनों नहर की ओर वाले गेट टूट गए, पानी का स्तर बरकरार रखने के लिए सिंचाई विभाग ने बोरे डालकर कामचलाऊ इंतजाम कर दिया। जिसके चलते प्रदूषित पानी लगातार कीठम में आ रहा है।
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विभाग ने इसकी लिखित सूचना सिंचाई विभाग को दी लेकिन अब तक कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए। नतीजा शुक्रवार को मछलियों के मरने के रूप में सामने आया। यमुना का प्रदूषित पानी आने से झील के पानी में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया। जिससे सैकड़ों मछलियां मर गईं। शुक्रवार को मछलियों की मौत के बाद विभागीय वार्डन और रेंजर लगातार नजर बनाए हैं।
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उप वन संरक्षण राष्ट्रीय चंबल सेंक्चुअरी प्रोजेक्ट आरुषि मिश्रा ने बताया कि वन विभाग को फिर से लिखित और मौखिक दोनों रूप से सूचित किया जा चुका है। प्रदूषण नियंत्रण कार्यालय को भी इसकी सूचना दे दी गई है। विभाग अपने स्तर से सभी संभव प्रयास कर रहा है।