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आगराः आलू की फसल खराब होने के सदमे में एक और किसान ने दी जान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला इरादतनगर (आगरा)
Updated Sat, 03 Mar 2018 11:40 PM IST
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आगरा के ग्राम बसई खुर्द में शुक्रवार रात खेत पर किसान मलखान सिंह ने कनपटी पर तमंचे से गोली मारकर आत्महत्या कर ली। परिवारीजनों का कहना है कि आलू की फसल खराब होने से वह सदमे में थे।
गांव बसई खुर्द निवासी मलखान सिंह (42) पुत्र घूरेलाल त्यागी अविवाहित थे। उनका छोटा भाई पवन कुमार है, उन पर 16 बीघा खेत हैं। उन्होंने आलू की फसल की थी।
परिवारीजनों ने बताया कि 6.5 लाख रुपये फसल पर खर्च हो चुका है। कर्जा लेकर रकम जुटाई थी। खेतों में कई दिन से आलू की खोदाई का काम चल रहा है।
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गांव बसई खुर्द निवासी मलखान सिंह (42) पुत्र घूरेलाल त्यागी अविवाहित थे। उनका छोटा भाई पवन कुमार है, उन पर 16 बीघा खेत हैं। उन्होंने आलू की फसल की थी।
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परिवारीजनों ने बताया कि 6.5 लाख रुपये फसल पर खर्च हो चुका है। कर्जा लेकर रकम जुटाई थी। खेतों में कई दिन से आलू की खोदाई का काम चल रहा है।
तीन बीघा खेत की खोदाई में 16 पैकेट आलू निकला था। बाकी खराब हो गया। 270 से 300 पैकेट आलू निकलने चाहिए थे। फसल खराब होने पर मलखान सिंह परेशान हो गया। शुक्रवार रात को आठ बजे मलखान भोजन करने के बाद निकला था।
मलखान ने रात नौ बजे भाई से फोन पर बात की। भाई से कहा कि ट्रैक्टर नहीं बेचा होता तो शायद यह स्थिति नहीं होती। अब तो फसल खराब हो गई। वह कैसे कर्र्ज चुकाएंगे?। भाई ने आराम करने के लिए बोल दिया।
शनिवार सुबह भतीजा आर्यन खेत पर चाय देने गया। ट्यूबवेल के पास मलखान सिंह की लाश मिली। हाथ के पास तमंचा था। कनपटी से खून निकला था। सूचना पर पुलिस पहुंच गई। घटना से परिवारीजन भी आ गए।
आलू की फसल खराब होने से मलखान सिंह बुरी तरह से सदमे में आ गया था। उन्हें उम्मीद थी कि फसल अच्छी होगी। इससे न सिर्फ कर्ज चुक जाएगा। मगर, ऐसा नहीं हो सका। इससे लागत तक नहीं निकल पा रही थी।
मलखान ने रात नौ बजे भाई से फोन पर बात की। भाई से कहा कि ट्रैक्टर नहीं बेचा होता तो शायद यह स्थिति नहीं होती। अब तो फसल खराब हो गई। वह कैसे कर्र्ज चुकाएंगे?। भाई ने आराम करने के लिए बोल दिया।
शनिवार सुबह भतीजा आर्यन खेत पर चाय देने गया। ट्यूबवेल के पास मलखान सिंह की लाश मिली। हाथ के पास तमंचा था। कनपटी से खून निकला था। सूचना पर पुलिस पहुंच गई। घटना से परिवारीजन भी आ गए।
आलू की फसल खराब होने से मलखान सिंह बुरी तरह से सदमे में आ गया था। उन्हें उम्मीद थी कि फसल अच्छी होगी। इससे न सिर्फ कर्ज चुक जाएगा। मगर, ऐसा नहीं हो सका। इससे लागत तक नहीं निकल पा रही थी।