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जिला अस्पताल का गजब हाल: एक्सरे मशीन हुई सही तो कान की जांच मशीनें हो गईं खराब, अब मरीज हो रहे परेशान
Fri, 02 Oct 2026 10:43 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 02 Oct 2026 10:43 AM IST
सार
आगरा जिला अस्पताल के ईएनटी विभाग में कान की जांच करने वाली ओएई और इंपेडेंस ऑडियोमीटर मशीनें लंबे समय से खराब हैं। मशीनें नहीं चलने से गंभीर मरीजों को एसएन मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है, जबकि रोजाना 400 से 500 मरीज ईएनटी विभाग पहुंचते हैं।
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जिला अस्पताल, आगरा
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
आगरा के जिला अस्पताल के ईएनटी विभाग में कान की जांच की दो प्रमुख मशीनें लंबे समय से खराब हैं। इससे डॉक्टर साधारण मरीजों को तो देख रहे हैं लेकिन गंभीर को एसएन मेडिकल कॉलेज रेफर करना पड़ रहा है। इसके पीछे लोगों को बजट की कमी बताई जा रही है।
अस्पताल की कुल ओपीडी रोजाना 3,000 से 4,000 मरीजों की है, जिसमें अकेले ईएनटी विभाग में 400 से 500 मरीज इलाज की आस लेकर पहुंचते हैं। यहां संसाधनों की कमी से बच्चों से बुजुर्गों तक को मायूस होकर लौटना पड़ता है। विभाग में रखी ओएई (ऑटोएकॉस्टिक एमिशन) मशीन, जिससे 0 से 1 वर्ष के नवजात शिशुओं के सुनने की क्षमता जांची जाती है, और इंपेडेंस ऑडियोमीटर, जिससे कान के पर्दे के पीछे की अंदरूनी समस्याओं का पता चलता है, दोनों खराब पड़ी हैं। बाजार में ओएई मशीन की कीमत 2.30 लाख से 5.30 लाख और इंपेडेंस ऑडियोमीटर की कीमत करीब 5 लाख रुपये है।
सितंबर महीने में रेफर के आंकड़े
मशीनें न होने का खामियाजा उन मासूमों और मरीजों को भुगतना पड़ रहा है जिन्हें तुरंत जांच की जरूरत होती है। केवल सितंबर महीने में रेफर करने के आंकड़ों पर गौर करें तो ही स्थिति साफ हो जाती है:
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0 से 5 वर्ष: 5 बच्चे
6 से 18 वर्ष: 30 किशोर व युवा
18 से 30 वर्ष: 28 मरीज
30 से 60 वर्ष: 35 वयस्क
मधु नगर निवासी धीरज का कहना है कि मुझे काफी समय से कान में दिक्कत महसूस हो रही थी। जिला अस्पताल में डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने अंदरूनी जांच की जरूरत बताई। इसके बाद मशीन खराब है, यह बोलकर एसएन अस्पताल जाने के लिए बोल दिया। यहां आने का कोई फायदा नहीं मिला।
दयालबाग निवासी रश्मि निवासी ने बताया कि जिला अस्पताल शहर का प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है। यहां अगर कानों की बेसिक जांच मशीनें ही उपलब्ध नहीं होंगी, तो आम मरीज कहां जाएगा, प्रशासन को इन मशीनों को ठीक कराना चाहिए ताकि गरीबों को भटकना न पड़े।
मुख्य अधीक्षक सुनीता राठौर ने बताया कि ईएनटी विभाग में जो मशीन खराब है, उसकी रिपोर्ट विभाग से मंगाकर शासन को भेजेंगे। जल्द ही इसका समाधान कराया जाएगा।
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अस्पताल की कुल ओपीडी रोजाना 3,000 से 4,000 मरीजों की है, जिसमें अकेले ईएनटी विभाग में 400 से 500 मरीज इलाज की आस लेकर पहुंचते हैं। यहां संसाधनों की कमी से बच्चों से बुजुर्गों तक को मायूस होकर लौटना पड़ता है। विभाग में रखी ओएई (ऑटोएकॉस्टिक एमिशन) मशीन, जिससे 0 से 1 वर्ष के नवजात शिशुओं के सुनने की क्षमता जांची जाती है, और इंपेडेंस ऑडियोमीटर, जिससे कान के पर्दे के पीछे की अंदरूनी समस्याओं का पता चलता है, दोनों खराब पड़ी हैं। बाजार में ओएई मशीन की कीमत 2.30 लाख से 5.30 लाख और इंपेडेंस ऑडियोमीटर की कीमत करीब 5 लाख रुपये है।
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सितंबर महीने में रेफर के आंकड़े
मशीनें न होने का खामियाजा उन मासूमों और मरीजों को भुगतना पड़ रहा है जिन्हें तुरंत जांच की जरूरत होती है। केवल सितंबर महीने में रेफर करने के आंकड़ों पर गौर करें तो ही स्थिति साफ हो जाती है:
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0 से 5 वर्ष: 5 बच्चे
6 से 18 वर्ष: 30 किशोर व युवा
18 से 30 वर्ष: 28 मरीज
30 से 60 वर्ष: 35 वयस्क
मधु नगर निवासी धीरज का कहना है कि मुझे काफी समय से कान में दिक्कत महसूस हो रही थी। जिला अस्पताल में डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने अंदरूनी जांच की जरूरत बताई। इसके बाद मशीन खराब है, यह बोलकर एसएन अस्पताल जाने के लिए बोल दिया। यहां आने का कोई फायदा नहीं मिला।
दयालबाग निवासी रश्मि निवासी ने बताया कि जिला अस्पताल शहर का प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है। यहां अगर कानों की बेसिक जांच मशीनें ही उपलब्ध नहीं होंगी, तो आम मरीज कहां जाएगा, प्रशासन को इन मशीनों को ठीक कराना चाहिए ताकि गरीबों को भटकना न पड़े।
मुख्य अधीक्षक सुनीता राठौर ने बताया कि ईएनटी विभाग में जो मशीन खराब है, उसकी रिपोर्ट विभाग से मंगाकर शासन को भेजेंगे। जल्द ही इसका समाधान कराया जाएगा।