आगरा में बुखार का कहर: तीन और बच्चों ने तोड़ा दम, सात दिन में 18 मासूमों की गई जान
आगरा जिले में जानलेवा बुखार की चपेट में मासूम बच्चे आ रहे हैं। जिले में सात दिन में बुखार से 18 मासूमों की जान जा चुकी है। इनमें पिनाहट में सबसे ज्यादा आठ, फतेहपुर सीकरी, बरहन, बाह और टेढ़ी बगिया में दो-दो बच्चे और खंदौली, कागारौल में एक-एक बच्चे की मौत हुई है।
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आगरा जिले के पिनाहट क्षेत्र में बुखार का कहर थम नहीं रहा है। गुरुवार को बुखार से तीन बच्चों की मौत हो गई। मृतकों में गांव मेदीपुरा की प्राची (4 वर्ष), पिनाहट के चांदनी चौक मोहल्ला की सुमन (8 वर्ष) और पडुआपुरा की नंदनी (4 वर्ष) हैं। उधर, बाह क्षेत्र के गांवों में भी बुखार का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। इससे ग्रामीणों में दहशत है।
जानकारी के मुताबिक मेदीपुरा निवासी मनोज की 4 वर्षीय पुत्री प्रज्ञा को दो दिनों से बुखार आ रहा था। गुरुवार को तबीयत बिगड़ने पर आगरा ले जाते समय उसकी सांसें थम गईं। पिनाहट कस्बा के चांदनी चौक निवासी योगेश की पुत्री सुमन तीन दिन से बुखार से पीड़ित थी। कस्बे के ही एक निजी अस्पताल से इलाज कराया जा रहा था।
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गुरुवार को ज्यादा तबीयत खराब होने पर परिजन फतेहाबाद लेकर गए, जहां सुमन को मृत घोषित कर दिया गया। गांव पडुआपुरा निवासी मदन की 4 वर्षीय पुत्री नंदनी को भी तीन दिन से बुखार आ रहा था, जिसका फतेहाबाद में इलाज चल रहा था। गुरुवार की सुबह तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे लेकर सीएचसी पिनाहट पहुंचे, जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पिनाहट क्षेत्र में ही बुखार अब तक आठ बच्चों की मौत हो चुकी है। 11 सितंबर को भावनाथ की ढारि निवासी वीकेश (14), गायत्री, 17 सितंबर को सूबेदार पुरा निवासी सतीश की नौ माह की पुत्री, 19 सितंबर को पूर्व प्रधान रवि पांडेय के 14 वर्षीय पुत्र छोटू, 22 सितंबर को अमन (3) पुत्र राजेंद्र वर्मा निवासी चांदनी चौक, प्राची (9) पुत्री प्रमोद शर्मा निवासी गांव राटौटी की मौत हुई थी।
जांच के लिए पहुंचे अपर निदेशक स्वास्थ्य
बुखार से बच्चों की मौत की जांच के लिए गुरुवार को अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. एके सिंह और संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य डॉ. प्रदीप शर्मा पिनाहट और राटौटी गांव पहुंचे। परिजनों से जानकारी ली। अधिकारियों ने स्वास्थ्य विभाग की टीमों को सफाई, कीटनाशक का छिड़काव और शिविर लगाकर इलाज के निर्देश दिए।
बुधवार को राटौटी में नौ वर्षीय प्राची और पिनाहट के चांदनी चौक मोहल्ले में अमन (3) की मौत हुई थी। इस पर गुरुवार की दोपहर करीब बारह बजे अपर निदेशक और संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य पिनाहट पहुंचे। परिजनों से पूछा की बच्चों को कब से बुखार आ रहा था। घर के आसपास गंदगी और पानी भरा देख नाराजगी जताई।
सीएससी प्रभारी डॉ. विजय कुमार को सफाई करवाकर कीटनाशक का छिड़काव कराने, गांवों में शिविर लगाकर इलाज मुहैया कराने के निर्देश दिए। इन दोनों मोहल्ले में शिविर लगे थे। सीएचसी प्रभारी ने बताया कि राटौटी में 85 लोगों की जांच में बुखार से 25 और चांदनी चौक मोहल्ले में 65 मरीजों की जांच में बुखार के 31 मरीज मिले। इनके रक्त का नमूना लेकर जांच के लिए भेजा गया है।
बहन की हो चुकी है मौत, भाई-भाभी भी चपेट में
बाह के गुमानसिंह पुरा गांव निवासी दीपा (28) की बुखार से हालत खराब होने पर 10 दिन पहले आगरा के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों के मुताबिक अस्पताल में उसे डेंगू से ग्रस्त बताया गया था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। दीपा के भाई धीरज और भाभी शुभम की भी बुखार से हालत बिगड़ने पर निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
बेटे को खोया, बेटी भी बुखार से तप रही
गुमानसिंह पुरा गांव निवासी मोहन सिंह के पुत्र विवेक (4) बुखार से ग्रसित था। मोहन ने बताया कि हालत बिगड़ने पर उसे आगरा के एक अस्पताल में भर्ती कराया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। डेढ़ साल की बेटी बबली भी बुखार से तप रही है। बेटे को खोने वाली मां कासन देवी बेटी के पास से हट नहीं रही है। मोहन ने बताया कि भाई की बेटियां करिश्मा और रेशमा भी बुखार की चपेट में हैं।
गांव मिढकौली में बिगड़ रहे हालात
सीडीओ के दौरे के बाद भी मिढकौली स्थित अस्पताल के हालात नहीं सुधरे हैं। गुरुवार की सुबह बुखार से हालत बिगड़ने पर 16 वर्षीय किशोरी को परिजन सीएचसी लेकर पहुंचे। डेंगू की पुष्टि होने और हालत में सुधार न होने पर डॉक्टरों ने उसे एसएन मेडिकल कॉलेज भेज दिया।
गांव की ही रागिनी और भारती भी बुखार से तप रही हैं। अधीक्षक डॉक्टर जितेंद्र वर्मा ने बताया कि मिढकौली में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कैंप में 105 रोगियों की जांच की। बुखार के 20 मरीजों में से 18 के खून के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए।