फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Agra Court Acquits Four Policemen in 2015 Prisoner Escape Case

यूपी: एसएन मेडिकल कॉलेज से भागा था कैदी, पुलिस की लापरवाही, लेकिन मिलीभगत नहीं; चारों सिपाही बरी

Fri, 02 Oct 2026 10:35 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Fri, 02 Oct 2026 10:35 AM IST
सार

एसएन मेडिकल कॉलेज से 2015 में उम्रकैद का कैदी फरार होने के मामले में अदालत ने चार पुलिसकर्मियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने पुलिसकर्मियों की लापरवाही मानी, लेकिन कैदी को भगाने में आपराधिक मिलीभगत का ठोस सबूत नहीं मिला।
 

विज्ञापन
Agra Court Acquits Four Policemen in 2015 Prisoner Escape Case
एसएन मेडिकल कॉलेज

विस्तार

आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज से वर्ष 2015 में फरार हुए उम्रकैद के एक कैदी के मामले में अदालत ने फैसला सुनाया है। अभियोजन पक्ष पुख्ता सबूत पेश करने में नाकाम रहा, जिससे अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालय संख्या-23 अमित कुमार यादव ने आरोपी चारों पुलिसकर्मियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
विज्ञापन


अदालत ने माना कि कैदी के भागने में पुलिसकर्मियों की लापरवाही तो थी लेकिन आपराधिक मिलीभगत का कोई सबूत नहीं मिला। घटना 24 जून 2015 की है। मथुरा के राधा निवास हैजा निवासी सीटी लाला उर्फ गोपाल हत्या के आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा था। वह एसएन मेडिकल कॉलेज के सर्जिकल वार्ड में भर्ती था। उसकी सुरक्षा में कांस्टेबल सतेंद्र सिंह, पवन कुमार, सुशील कुमार और अनिल कुमार तैनात थे। दोपहर करीब 1 बजे वह अस्पताल से फरार हो गया। प्रतिसार निरीक्षक प्रथम परशुराम सिंह की तहरीर पर थाना एमएम गेट में चारों पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।
विज्ञापन


कमजोर पड़े आरोप और गवाह
सुनवाई के दौरान अभियोजन ने वादी और डॉक्टरों समेत 9 गवाह पेश किए। वादी ने जिरह में कहा कि सिपाहियों की मिलीभगत की कोई जानकारी नहीं मिली, हां लापरवाही जरूर थी। डॉ. चंद्र प्रकाश पाल और डॉ. अश्वनी सिंह की गवाहियों से आरोप और कमजोर हुए। एक डॉक्टर ने सूचना देने की पुष्टि की, जिससे यह आरोप टिक नहीं पाया कि घटना छिपाई गई थी। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि घटना वाले दिन कैदी का ऑपरेशन होना था। उसे ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया और सुरक्षाकर्मियों को बाहर रहने को कहा गया। डॉक्टरों की गवाही में यह संभावना भी रही कि कैदी डॉक्टरों को चकमा देकर भागा हो।
विज्ञापन
विज्ञापन

सजा के लिए केवल लापरवाही पर्याप्त नहीं

अदालत ने स्पष्ट किया कि धारा 222 आईपीसी के तहत केवल लापरवाही पर्याप्त नहीं है। अभियोजन को यह साबित करना था कि पुलिसकर्मियों ने जानबूझकर कैदी को भगाया या मदद की लेकिन ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला। अदालत ने कहा कि लापरवाही पर विभागीय कार्रवाई हो सकती है, सजा नहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed