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UP: आगरा कॉलेज प्राचार्य के शैक्षिक दस्तावेज और जाति प्रमाणपत्र फर्जी या असली, पुलिस जुटाएगी साक्ष्य
Sat, 04 Oct 2025 10:17 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 04 Oct 2025 10:17 AM IST
सार
आगरा कॉलेज के प्राचार्य पर लगाए गए गंभीर आरोप के मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस प्राचार्य से पूछताछ करेगी। साथ ही साक्ष्य भी जुटाए जाएंगे।
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आगरा कॉलेज Agra College
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
आगरा कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सीके गौतम के खिलाफ फर्जी शैक्षिक दस्तावेज और जाति प्रमाणपत्र लगाने के आरोप लगाए गए हैं। उनके खिलाफ कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रो. अनुराग शुक्ला ने लोहामंडी थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। इस पर शुक्रवार को आगरा कॉलेज में शिक्षकों के दोनों गुटों में चर्चाएं चलती रहीं। शिक्षकों का कहना था कि डॉ. गौतम दस्तावेज के सत्यापन के बाद आए हैं। इस पद पर रार बीते वर्षों से ही चल रही है। पुलिस इस मामले में केस दर्ज होने के बाद साक्ष्य जुटा रही है। प्राचार्य को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।
प्रो. अनुराग शुक्ला ने शिकायत में कहा है कि प्रो. सीके गौतम ने वर्ष 1990 में हाथरस के पीसी बागला कॉलेज से अंग्रेजी विषय में एमए तृतीय श्रेणी में उत्तीर्ण किया था। साक्षात्कार में शामिल होने के लिए उन्होंने 1995 में फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाया और इसी आधार पर उनका चयन हुआ। इसके अलावा फर्जी अंकतालिका बनवा ली। वहीं इस मामले में प्राचार्य प्रो. सीके गौतम का कहना है कि विश्वविद्यालय की ओर से एसटीएफ ने भी जांच की है। इसमें सभी दस्तावेज पूरी तरह से सही पाए गए थे जिसका लिखित आदेश भी दिया गया। तहसील से जाति मामले की जांच हो चुकी है। ऐसा कोई प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया।
प्रो. सीके गाैतम ने दावा किया है कि वर्ष 1995 में उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग से सामान्य वर्ग में उन्हें नियुक्ति मिली है। तहसील सादाबाद से कोई भी एससी का प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किया है। तहसील के अधिकारियों ने एसटीएफ को यह लिखकर दिया है। प्राचार्य ने दावा किया कि अंकतालिका से लेकर जाति प्रमाण पत्र सत्यापित है। मेरे खिलाफ षणयंत्र रचा जा रहा है। छवि बिगाड़ने के आरोप में मानहानि का दावा करूंगा। इसके बावजूद जांच की आवश्यकता पड़ेगी तो मैं तैयार हूं।
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प्रो. अनुराग शुक्ला ने शिकायत में कहा है कि प्रो. सीके गौतम ने वर्ष 1990 में हाथरस के पीसी बागला कॉलेज से अंग्रेजी विषय में एमए तृतीय श्रेणी में उत्तीर्ण किया था। साक्षात्कार में शामिल होने के लिए उन्होंने 1995 में फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाया और इसी आधार पर उनका चयन हुआ। इसके अलावा फर्जी अंकतालिका बनवा ली। वहीं इस मामले में प्राचार्य प्रो. सीके गौतम का कहना है कि विश्वविद्यालय की ओर से एसटीएफ ने भी जांच की है। इसमें सभी दस्तावेज पूरी तरह से सही पाए गए थे जिसका लिखित आदेश भी दिया गया। तहसील से जाति मामले की जांच हो चुकी है। ऐसा कोई प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया।
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प्रो. सीके गाैतम ने दावा किया है कि वर्ष 1995 में उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग से सामान्य वर्ग में उन्हें नियुक्ति मिली है। तहसील सादाबाद से कोई भी एससी का प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किया है। तहसील के अधिकारियों ने एसटीएफ को यह लिखकर दिया है। प्राचार्य ने दावा किया कि अंकतालिका से लेकर जाति प्रमाण पत्र सत्यापित है। मेरे खिलाफ षणयंत्र रचा जा रहा है। छवि बिगाड़ने के आरोप में मानहानि का दावा करूंगा। इसके बावजूद जांच की आवश्यकता पड़ेगी तो मैं तैयार हूं।
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