जहरीली गैसों का चैंबर बनी ताजनगरी, 40 गुना ज्यादा प्रदूषण
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आगरा शहर की आबोहवा बेहद खराब हो रही है। हवा जहलीली बनती जा रही है। सीजन की पहली धुंध छाई जो भारी प्रदूषण तत्वों के कारण स्मॉग की चादर में बदल गई। इससे सुबह स्कूल जाने वाले बच्चों और सुबह की सैर के लिए निकले लोगों को सांस लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ा।
प्रदूषण का स्तर बेहद खतरनाक हो गया, जिसमें 40 गुना ज्यादा कार्बन मोनोऑक्साइड और 8 गुना ज्यादा धूल के कण स्मॉग में पाए गए। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी की गई एयर क्वालिटी इंडेक्स की सूची में आगरा का सूचकांक 354 पर रहा, जो बेहद खराब श्रेणी में है।
दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार समेत सरकारी एजेंसियों पर भी भारी जुर्माना लगाया जा रहा है, वहीं धूल कणों से बचने के लिए लगातार पानी का छिड़काव और वाहनों पर रोक लगाई जा रही है, लेकिन आगरा में हाईवे अथारटी के अफसर प्रदूषण का स्तर बेहद खतरनाक स्तर पर लाने में जुटे हैं।
हाईवे अथारिटी ने अरतौनी से वाटरवर्क्स के बीच कहीं पर भी पानी का छिड़काव निर्माण कार्य पर नहीं किया है, वहीं सिकंदरा सब्जी मंडी के सामने लगातार धूल उड़ रही है, जिससे यहां सब्जी बेचने, खरीदने आने वाले लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। यहां एक दिन भी पानी का छिड़काव नहीं किया गया।
कूड़ा जलाने वालों पर नहीं की कार्रवाई
शहर में सुबह धुंध छाने के साथ स्मॉग की खतरनाक चादर आने की प्रमुख वजह रही रात में कूड़ा जलाना। दरअसल, रात में ही कूड़े के बिन्स और खत्ताघरों में आग लगा दी गई, जिससे पूरी रात ये सुलगता रहा और सुबह धुंध के कारण स्मॉग में तब्दील हो गया। किसी भी कर्मचारी या व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई न होने से इनके हौंसले बुलंद हो रहे हैं। यही वजह है कि डीएम के घर के पास हो या एसएसपी के घर, ऑफिस के पास, कूड़ा जलाने वालों पर शिकंजा नहीं कसा जा सका है।
प्रदूषण ने बढ़ाई सांस रोगियों की मुसीबत
हवा में कई गुना प्रदूषण बढ़ने से सबसे ज्यादा मुसीबत अस्थमा और सांस रोगियों के लिए खड़ी हो गई है। एसएन मेडिकल कालेज की ओपीडी में नाक-आंख में खुजली, टीबी-सांस के पुराने मरीज आने लगे हैं।
वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के डॉ. जीवी सिंह बताते हैं कि प्रदूषण बढ़ने से मरीजों के शरीर में आक्सीजन की सप्लाई प्रभावित होती है। सबसे ज्यादा मुसीबत टीबी, अस्थमा और सांस रोगियों के लिए है। ओपीडी में पुराने मरीजों की समस्या बढ़ने लगी है। ये मरीज सांस फूलने, खांसी की शिकायत लेकर आ रहे हैं। टीबी के पुराने मरीज में संक्रमण की शिकायत है। प्रदूषण में ज्यादा रहने से टीबी मरीजों के खांसी के साथ खून भी आ सकता है।
आंखों में जलन, नाक में खुजली
हवा में धूल के कणों की मात्रा बढ़ने से आंखों में जलन और नाक में खुजली के मरीज बढ़े हैं। दूषित कण नाक की झिल्ली में जाकर संक्रमित करती है, जिससे जुकाम और खुजली की शिकायत है। एसएन के ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि प्रदूषित हवा से छींक आना, नाक से पानी बहना, गला खराब की समस्या लेकर नए मरीज आने लगे हैं। नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. हिमांशु यादव ने बताया कि प्रदूषित हवा आंखों की टीयर फिल्म को नुकसान पहुंचाती है। इससे करकराहट, लाल होना, पानी आना, जलन-दर्द के अलावा थोड़े समय तक धुंधला भी दिखाई देता है। खास तौर से बच्चों को ज्यादा परेशानी हो रही है।
बचाव के लिए ये करें उपाय:
- घर से बाहर निकलते वक्त मास्क का उपयोग करें।
- सुबह-शाम प्रदूषण ज्यादा रहता है, इस समय घर से निकलने से बचें।
- चश्मा लगाकर चलें, घर आकर आंखाें को साफ पानी से धोएं
- झाड़ू के वक्त, मरम्मत कार्य, निर्माण क्षेत्र में जाने से बचें।
जहरीली हवा के कारण
479 माइक्रोग्राम पहुंचे पीएम 2.5 कण
8 गुना ज्यादा हैं धूल के बारीक कण
152 पर पहुंचा कार्बन मोनोऑक्साइड
161 पर नाइट्रोजन डाइक्साइड