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UP: एंबुलेंस ड्राइवर कैसे बन गया डॉक्टर, फिर खोला खुद का अस्पताल...बच्चा तस्करी से कर डाली इतनी कमाई
Wed, 10 Sep 2025 09:52 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Wed, 10 Sep 2025 09:52 AM IST
सार
एंबुलेंस चलाने वाले कमलेश ने बच्चा चोर गिरोह से जुड़कर इतनी कमाई कर डाली कि वो एक अस्पताल का मालिक बन गया। वह कस्बा में डाॅक्टर के नाम से चर्चित भी हो गया था। उसके पास कोई डिग्री भी नहीं है।
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कमलेश और उसका अस्पताल
- फोटो : संवाद
विस्तार
दिल्ली में पकड़े बच्चों की तस्करी करने वाले गिरोह में शामिल फतेहाबाद का कमलेश एंबुलेंस चालक से अस्पताल संचालक बना था। पहले उसने अस्पताल में नाैकरी की। इससे काम का तरीका सीखा। इसके बाद अपना खुद का अस्पताल खोल लिया। अस्पताल ठीक से चलता नहीं था। इस कारण वो बच्चा चोरी गिरोह से जुड़ गया। अब माना जा रहा है कि निसंतान दंपती को बेचे जाने वाले बच्चों से होने वाली काली कमाई से ही उसके खर्चे पूरे होते थे। वह कस्बा में डाॅक्टर के नाम से चर्चित भी हो गया था। उसके पास कोई डिग्री भी नहीं है। इससे अस्पताल के संचालन पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
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दिल्ली से अगवा बच्चे को पिनाहट क्षेत्र के नयापुरा गांव का हलवाई का काम करने वाला वीरभान चोरी करके आगरा लाया था। उसने अपने ससुर कालीचरन निवासी नगरचंद, बाह के साथ मिलकर बच्चे को फतेहाबाद के रहने वाले अस्पताल संचालक कमलेश को बेचा था। दिल्ली पुलिस ने वीरभान उर्फ वीरू को पकड़ा था। उसकी निशानदेही पर 24 अगस्त को दिल्ली पुलिस केके हॉस्पिटल पर पहुंची थी। इसके बाद कमलेश को पकड़कर ले गई थी।
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मूलरूप से गांव उझावली, फतेहाबाद निवासी कमलेश के बड़े भाई किसान हैं। पिता की मौत हो चुकी है। क्षेत्र के लोगों ने बताया कि कमलेश के दो बेटे हैं। वो वर्ष 2015 में कस्बा के ही एक अस्पताल में एंबुलेंस चलाता था। आरोप लगाया कि वह कमीशन पर काम करता था। वर्ष 2017 में एक अस्पताल में बाह राजमार्ग पर पार्टनर हो गया। वह खुद को डाॅक्टर बताने लगा। इस कारण लोग उसे डाक्टर ही बोला करते थे। हालांकि कुछ समय बाद हाॅस्पिटल बंद कर दिया। वह रामबाग स्थित एक हॉस्पिटल में नौकरी करने लगा।
वर्ष 2018 में उसने फिर से अस्पताल खोल लिया और एक युवती के साथ कहीं चला गया। 3 साल बाद लाैटकर आया। बाद में वह एक अन्य अस्पताल में नौकरी करने लगा। एक साल बाद अस्पताल संचालक ने उसे निकाल दिया। इस पर वर्ष 2024 में उसने बाह रोड बाईपास पर खुद का केके हॉस्पिटल बना लिया। वह खुद ही लोगों का इलाज करने लगा। अस्पताल की पहली मंजिल पर ही परिवार सहित रहने लगा। क्षेत्र के लोगों ने बताया कि उसके पास निसंतान दंपती आया करते थे। इस पर उसने बच्चा चोरी गिरोह से संपर्क कर लिया। आरोप है कि वह बच्चे बेचने लगा। अस्पताल ठीक से नहीं चल पाता है। इसके बावजूद वह महंगे खर्चे कर रहा था।
अस्पताल में नहीं लगा कोई बोर्ड
पुलिस केके अस्पताल में पहुंची थी। मगर अस्पताल पर किसी डाॅक्टर का बोर्ड नहीं लगा हुआ था। अस्पताल किराये के भवन में चल रहा है। जिस बिल्डिंग में अस्पताल चलता है, उसमें बेसमेंट है। इसमें मकान मालिक ने गोदाम बना रखा है। भूतल पर कमलेश ने अस्पताल खोल लिया था। पहली मंजिल पर काम चल रहा है। इसमें ही उसका परिवार भी रह रहा था।
पुलिस केके अस्पताल में पहुंची थी। मगर अस्पताल पर किसी डाॅक्टर का बोर्ड नहीं लगा हुआ था। अस्पताल किराये के भवन में चल रहा है। जिस बिल्डिंग में अस्पताल चलता है, उसमें बेसमेंट है। इसमें मकान मालिक ने गोदाम बना रखा है। भूतल पर कमलेश ने अस्पताल खोल लिया था। पहली मंजिल पर काम चल रहा है। इसमें ही उसका परिवार भी रह रहा था।