अयोध्या में हादसा: व्यापारी अशोक गोयल बेटे का बनवा रहे हैं घर, गृह प्रवेश से पहले करना चाहते थे दर्शन
प्रभु श्रीराम ने बुलाया है...उनके दर्शन करके ही मन को शांति मिलती है...श्रीराम काज की आस में वहां जा रहा हूं। बेटे के लिए बन रहे मकान का गृह प्रवेश भी होना है। इससे पहले दर्शन करूंगा। वही सारी मनोकामना पूरी करते हैं।
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प्रभु श्रीराम ने बुलाया है...उनके दर्शन करके ही मन को शांति मिलती है...श्रीराम काज की आस में वहां जा रहा हूं। बेटे के लिए बन रहे मकान का गृह प्रवेश भी होना है। इससे पहले दर्शन करूंगा। वही सारी मनोकामना पूरी करते हैं।
आढ़ती अशोक गोयल गुरुवार को घर से निकले तो पड़ोसी सुखवीर से यही बोले थे। उनके परिवार पर मौत का कहर टूटने पर हर किसी का जैसे कलेजा ही फट गया। इलाके की पार्षद मंजू वार्ष्णेय ने बताया कि अशोक गोयल मोहम्मद पुर स्थित एक मंदिर में सेवा करते हैं। रोजाना वहां जाते हैं। हर महीने किसी न किसी धर्मस्थल पर तीर्थयात्रा पर भी जाते थे। श्रीराम मंदिर निर्माण को लेकर उन्होंने परिवार के सभी सदस्यों की रसीद कटवाई थी। दो दिन पहले भी दोबारा रसीद कटवाने के लिए बात की थी। वह परिवार के आठ सदस्यों के नाम से रसीद कटवाना चाहते थे। इस पर बताया था कि उनकी रसीद जमा कर दी हैं। तब अशोक गोयल ने यही बताया कि अब प्रभु श्रीराम के दर्शन करेेंगे। वही सबकी मनोकामना पूरी करते हैं।
बेटे के लिए बनवा रहे थे घर
पड़ोसियों ने बताया कि अशोक गोयल बेटे और बेटियों को आसपास ही रखना चाहते थे। इसलिए घर के पास ही बेटों के लिए मकान बनवाए थे। पंकज के लिए मकान बनने वाला था। बेटियों को भी शास्त्रीपुरम में ही मकान दिलवा रखे थे। उनका मन था कि बेटे और बेटियां नजदीक रहें, जिससे परिवार में किसी तरह का आयोजन होने पर जल्दी इकट्ठा हो जाएं।
अयोध्या की सरयू में परिवार के साथ हुए हादसे की जानकारी से अशोक गोयल का बेटा पदमेश गुमसुम है। वहीं बहू खुशी बेहोश हो गई। मौके पर मौजूद पड़ोस की महिलाओं और पुरुषों ने उनको किसी तरह संभाला।
अशोक गोयल के बेटा पदमेश और बहू खुशी आगरा में ही रह गए थे। वह अपने मकान में थे। पदमेश सुबह दुकान चला गया। शाम को सात बजे पुलिस ने पड़ोसियों को बताया। तब बेटे पदमेश को पता चला। वह जैसे ही घर आया फूट-फूटकर रोने लगा। बहू खुशी अपने मकान पर थी। वह पैदल आई। घर के दरवाजे पर आकर बेहोश हो गई। पड़ोस की महिलाओं ने उसे संभाला। उसके चेहरे पर पानी डाला। तब वह होश में आई। वह एक ही बात कर रही थी कि ये क्या हो गया।
मदद को आगे आए पड़ोसी
घटना के बाद पड़ोसी परिवार की मदद के लिए आगे आ गए। वह बेटे के अयोध्या जाने के लिए वाहन का इंतजाम करने लगे। पड़ोसी गुड्डू चाहर, ओमप्रकाश, रन सिंह और प्रीतम सिंह बोले कि ऐसे दुख की घड़ी में कोई कैसे अलग खड़ा रह सकता है। वह परिवार की हरसंभव मदद करेंगे।
तीन बेटे और चार बेटियों का था परिवार
ए-171, शास्त्रीपुरम निवासी अशोक गोयल की ताजगंज और सिकंदरा मंडी में सब्जी की आढ़त है। उनके तीन बेटे और चार बेटियां थीं। पत्नी राजकुमारी थीं। बेटे ललित और पदमेश सिकंदरा-बोदला रोड पर प्लास्टिक के दोने-पत्तल की दुकान चलाते हैं। पंकज पान-मसाले, सिगरेट का कारोबार करता था। हादसे में ललित, पंकज, राजकुमारी की मौत हो गई।
अशोक गोयल की बेटी जूली उर्फ गीता पत्नी देवेंद्र अग्रवाल नामनेर में रहती हैं। देवेंद्र एक निजी बस में परिचालक का काम करते हैं। उनकी एक बेटी श्रुति और एक बेटा सार्थक थे। हादसे में श्रुति की मौत हो गई।
अशोक की दूसरी बेटी आरती पत्नी सतीश शास्त्रीपुरम में रहती है। सतीश का गल्ले का कारोबार है। उनके एक बेटा नमन और बेटी परी है। परी उर्फ प्रियांशी लापता है। अशोक की तीसरी बेटी सीता पत्नी सचिन सिकंदरा में रहती थीं। सचिन की पश्चिमपुरी में डिस्पोजल सामान की दुकान है। उनकी एक बेटी दृष्टि थी। सीता और दृष्टि की मौत हो गई। चौथे नंबर की बेटी सिल्की उर्फ गौरी की शादी नहीं हुई है। हादसे में सतीश की बेटी प्रियांशी, देवेंद्र की पत्नी जूली और उनकी बेटा सार्थक लापता हैं।
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